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बड़ी खबर: सऊदी अरब ने ईरानी राजनयिकों को देश छोड़ने का दिया अल्टीमेटम, क्या खाड़ी में युद्ध तय है?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रियाद. 23 मार्च, 2026| सऊदी अरब और ईरान के बीच रिश्ते एक बार फिर टूटने की कगार पर पहुँच गए हैं। सऊदी सरकार ने रियाद स्थित ईरानी दूतावास के सैन्य अटैची और उनके सहायक समेत 5 मिशन स्टाफ को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ (अवांछित व्यक्ति) घोषित करते हुए तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया है। रविवार को निष्कासन की समयसीमा समाप्त होने के साथ ही खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक युद्ध तेज हो गया है।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान द्वारा सऊदी अरब की संप्रभुता पर किए गए “लगातार और स्पष्ट” हमलों के जवाब में की गई है। हाल ही में रियाद और तेल शोधन संयंत्रों (Refineries) को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

  • मिसाइल अटैक: शनिवार रात रियाद के पास तीन बैलिस्टिक मिसाइलें डिटेक्ट की गईं, जिनमें से एक को मार गिराया गया जबकि दो निर्जन इलाकों में गिरीं।

  • आर्थिक चोट: हमलों के कारण तेल उत्पादन पर असर पड़ने की खबरों के बीच सऊदी अरामको के सीईओ ने अपना विदेश दौरा रद्द कर दिया है।

बीजिंग समझौता और UN प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन

सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि ईरान की ये गतिविधियां न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि दो महत्वपूर्ण समझौतों की धज्जियां उड़ाती हैं:

  1. बीजिंग समझौता (2023): चीन की मध्यस्थता में हुआ वह समझौता जिसने सात साल बाद दोनों देशों के रिश्ते बहाल किए थे, अब पूरी तरह खतरे में है।

  2. UNSC प्रस्ताव 2817 (2026): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इसी महीने (12 मार्च) ईरान के हमलों की निंदा करते हुए यह प्रस्ताव पारित किया था, जिसे अब सऊदी अरब ने ईरान द्वारा ठुकराया हुआ बताया है।

क्षेत्रीय देशों की एकजुटता

सऊदी अरब अकेला ऐसा कदम उठाने वाला देश नहीं है। इस सप्ताह की शुरुआत में कतर ने भी ईरान के सैन्य अधिकारियों को निष्कासित किया था, जब ईरान की मिसाइलों ने कतर के ‘रास लफान’ LNG प्लांट को नुकसान पहुँचाया था। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत ने भी अपने एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा है।

घटनाक्रमप्रभाव
राजनयिक निष्कासनसऊदी-ईरान कूटनीतिक संवाद लगभग बंद।
सैन्य स्थितिखाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में हाई अलर्ट।
वैश्विक अर्थव्यवस्थाहॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के खतरे से तेल की कीमतें बढ़ीं।

विशेषज्ञों की राय: क्या यह महायुद्ध की आहट है?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच के संघर्ष ने अब पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। सऊदी अरब द्वारा सैन्य अधिकारियों को निकालना इस बात का संकेत है कि वह अब कूटनीति के बजाय सैन्य आत्मरक्षा (Article 51) के विकल्प पर विचार कर रहा है।

“ईरान कूटनीति का इस्तेमाल केवल ढाल के रूप में कर रहा है, जबकि जमीन पर उसकी गतिविधियां आक्रामक हैं। यह निष्कासन एक स्पष्ट संदेश है कि अब समझौते का समय खत्म हो चुका है।” — सऊदी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।