लोड हो रहा है...

गयाजी का गौरव: ₹2390 करोड़ की कॉरिडोर परियोजना से बदलेगी मोक्ष नगरी की सूरत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पटना । गुरुवार, 23 अप्रैल, 2026

गयाजी, जिसे मोक्ष की भूमि कहा जाता है, अब एक भव्य और आधुनिक धार्मिक पर्यटन केंद्र बनने की राह पर है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर (Vishnupad Temple Corridor) के क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। यह परियोजना काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित की जा रही है, जिसका उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले पिंडदानियों और पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है।

परियोजना के प्रमुख आकर्षण और नवीनतम अपडेट्स

इस ₹2390 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना के तहत गयाजी की भौगोलिक और सांस्कृतिक तस्वीर को पूरी तरह बदलने की तैयारी है:

  1. भगवान विष्णु की 108 फीट ऊंची प्रतिमा: फल्गु नदी के शांत जल के बीच भगवान विष्णु की भव्य 108 फीट ऊंची मिश्रधातु (Alloy) की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र होगी बल्कि पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण भी बनेगी।

  2. 694 नए स्ट्रक्चर्स का निर्माण: कॉरिडोर के तहत कुल 694 संरचनाएं विकसित की जाएंगी। इनमें व्यावसायिक दुकानें, आधुनिक धर्मशालाएं और पिंडदानियों के लिए सर्वसुविधायुक्त शेड शामिल होंगे।

  3. विस्तृत पैदल मार्ग: मंदिर और सीता कुंड के बीच की दूरी को सुगम बनाने के लिए 20 फीट चौड़ा पैदल मार्ग तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

  4. पार्किंग और आवागमन: श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तीन स्थानों पर पार्किंग बनाई जाएगी, जहां एक साथ 750 कारें और 20 बसें खड़ी हो सकेंगी।

बिहार पर्यटन विकास की नई पहल

स्थानीय चिंताओं का समाधान

परियोजना के दौरान ‘वेदी’ (Altars) और प्राचीन विरासत को लेकर स्थानीय गयापाल पंडा समाज की कुछ चिंताएं थीं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि:

  • प्राचीन ‘वेदी’ स्थलों को विस्थापित नहीं किया जाएगा।

  • सीजुआ धर्मशाला जैसी विरासतों को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाएगा।

  • परियोजना का मुख्य लक्ष्य परंपरा और तकनीक का मेल है, न कि प्राचीन मान्यताओं से छेड़छाड़।

? डेटा शीट: एक नज़र में

विशेषताविवरण
परियोजना की लागत₹2390 करोड़
प्रतिमा की ऊंचाई108 फीट (भगवान विष्णु)
कुल विकसित संरचनाएं694
पैदल मार्ग की चौड़ाई20 फीट
पार्किंग क्षमता750 कारें, 20 बसें
मुख्य फोकसश्रद्धालु सुविधा, फल्गु नदी सौंदर्यीकरण

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।