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थिंक गैस ने पाइपलाइन क्षति के बाद शहर में गैस आपूर्ति तेज़ी से बहाल की

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कंपनी ने सुरक्षा हेतु ‘खुदाई से पहले सूचित करें’ के प्रति जागरूकता का आह्वान किया

भोपाल, सितंबर, 2026: भोपाल के बगरोदा, सीआरपीएफ कॉलोनी में थिंक गैस की एक पाइपलाइन जेसीबी से क्षतिग्रस्त हो गई, जिसे एक थर्ड-पार्टी एजेंसी द्वारा सीवरेज कार्य के लिए थिंक गैस को पूर्व सूचना दिए बिना तैनात किया गया था। इस क्षति के कारण गैस रिसाव हुआ और क्षेत्र के प्रभावित औद्योगिक उपभोक्ताओं की गैस आपूर्ति बाधित हो गई। थिंक गैस की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम तुरंत मौके पर पहुँची और किसी भी बड़ी घटना, दुर्घटना या स्थिति के बिगड़ने से रोकने के लिए तत्परता से सुधारात्मक कार्य शुरू किया। आपातकालीन टीम ने प्रभावित हिस्से को अलग (आइसोलेट) किया और लगभग चार घंटे के भीतर गैस आपूर्ति सफलतापूर्वक बहाल कर दी, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित हुई और प्रभावित उपभोक्ता को होने वाली असुविधा न्यूनतम रही।

थिंक गैस ने भोपाल जिले में घरेलू उपयोग हेतु पाइप्ड प्राकृतिक गैस और परिवहन उपयोगकर्ताओं हेतु संपीड़ित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए एक सुदृढ़ पाइपलाइन अवसंरचना स्थापित की है। पाइपलाइन मार्ग पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले रूट मार्कर, चेतावनी संकेत और आपातकालीन संपर्क बोर्ड मौजूद होने के बावजूद, खुदाई कार्य में लगे ठेकेदार ने कार्य शुरू करने से पहले थिंक गैस को सूचित नहीं किया और न ही घटना के बाद कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की।

सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी तीसरे पक्ष को खुदाई कार्य करने से पहले नगर निगम प्राधिकरण या सिटी गैस वितरण कंपनी को ‘खुदाई से पहले सूचित करें’ संपर्क नंबर के माध्यम से सूचित करना अनिवार्य है। यह घटना कंपनी को पूर्व सूचना दिए बिना घटित हुई, जिसके चलते थिंक गैस ने जिम्मेदार पक्ष के विरुद्ध औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। वर्तमान कानूनी प्रावधानों, भारतीय दंड संहिता की धारा 285 और 336 के अंतर्गत, इस प्रकार की अनधिकृत क्षति एक दंडनीय अपराध है, जिसमें 3 वर्ष तक के कारावास और 25 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।

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थिंक गैस सभी ठेकेदारों, एजेंसियों और व्यक्तियों से इस सुरक्षा आवश्यकता का पालन करने का आग्रह करती है। किसी भी खुदाई गतिविधि से पहले थिंक गैस से संपर्क करने हेतु टोल-फ्री नंबर 18001025107 है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।