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गणपति पंडाल पहुँचीं ‘थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान’ की अभिनेत्री आरती बिराजदार, बोलीं- किताबें और पेन लाने की अपील ने खींचा ध्यान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

एमपी/यूपी, सितंबर 2026: शूटिंग में लंबे समय तक व्यस्त रहने वाले कलाकारों के लिए छुट्टी का दिन आमतौर पर आराम करने का मौका होता है। लेकिन, गणेश चतुर्थी के दौरान सन नियो के शो ‘थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान’ के कलाकार आरती बिराजदार (वैदेही), अंकिता बहुगुणा (अनुप्रिया) और गौरव बाजपेयी (अभिजीत) ने अपनी छुट्टी को खास तरीके से बिताने का फैसला किया। तीनों कलाकार अपने होस्टल से बाहर निकले और कोल्हापुर के एक गणपति पंडाल में दर्शन के लिए पहुँचे। आरती के लिए यह सिर्फ त्यौहार मनाने का मौका नहीं था, बल्कि इस दौरान उन्हें एक ऐसी बात देखने को मिली, जिसने उनका ध्यान खींचा और इस यात्रा को उनके लिए खास बना दिया।

अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए, आरती ने कहा, “शूटिंग की वजह से हमें आमतौर पर ज्यादा खाली समय नहीं मिल पाता। जब भी छुट्टी मिलती है, हम ज्यादातर होस्टल में आराम करते हैं या आसपास की जगहों पर घूमने निकल जाते हैं। लेकिन, गणपति के दौरान छुट्टी मिली, तो हम सभी ने बाहर जाने और गणपति पंडाल में दर्शन करने का फैसला किया। हम कोल्हापुर के श्री मरगाई गली मंडल गए। वहाँ जिस खूबसूरती से गणपति उत्सव मनाया जा रहा था, उसे देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। सबसे ज्यादा मेरा ध्यान उस बोर्ड ने खींचा, जिसमें भक्तों से सामान्य प्रसाद या चढ़ावे की जगह किताबें और पेन लाने की अपील की गई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे यह सोच बहुत अच्छी लगी। किताब भले ही एक छोटी-सी भेंट लगे लेकिन यह किसी को सीखने, आगे बढ़ने या किसी के चेहरे पर खुशी लाने में मदद कर सकती है। इतनी सरल सोच को इतने अच्छे तरीके से अपनाया गया देखकर मेरे लिए यह यात्रा और भी खास हो गई।”

आरती ने आगे बताया, “मुझे यह देखकर भी बहुत अच्छा लगा कि कई युवा पंडाल की व्यवस्था और आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे। वे पूरे उत्साह के साथ गणपति उत्सव मना रहे थे, लेकिन साथ ही समाज और पर्यावरण के बारे में भी सोच रहे थे। यह बात मेरे मन में रह गई, क्योंकि इससे पता चलता है कि त्यौहार सिर्फ जश्न मनाने तक ही सीमित नहीं होते हैं।”

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उन्होंने कहा, “हम पूरा दिन शूटिंग में बिताते हैं और ज्यादातर समय होस्टल में रहते हैं इसलिए यह छोटी-सी छुट्टी हमारे लिए और भी खास थी। हम वहाँ त्यौहार मनाने और मस्ती करने गए थे, लेकिन वापस एक अच्छी सोच और बहुत सकारात्मक एहसास के साथ लौटे।”

‘थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान’ हर सोमवार से शनिवार शाम 7:30 बजे, सिर्फ सन नियो पर देखें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।