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देखिए लोककथा, आस्था और भावनाओं का एक अनोखा संगम ‘कांतारा चैप्टर 1’, अनमोल सिनेमा पर पहली बार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, अक्टूबर, 2026: ‘कांतारा चैप्टर 1’ की भव्य गाथा आ रही है अनमोल सिनेमा पर पहली बार, शनिवार, 24 अक्टूबर को शाम 7 बजे। ऋषभ शेट्टी और रुक्मिणी वसंत स्टारर यह फिल्म आस्था का उत्सव है, भक्ति की गर्जना है और सिनेमा की एक बड़ी जीत भी, जो भारतीय परंपराओं, भावनाओं और भव्यता का जीवंत चित्रण करते हुए हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक जड़ों को सम्मान देती है।

इस कहानी के केंद्र में इंसान, प्रकृति और ईश्वर के बीच दर्शाया गया वह बेहद गहरा रिश्ता है, जो पीढ़ियों से भारतीयों की ताकत रहा है। शानदार विजुअल्स और भव्य स्तर पर बनी यह फिल्म दर्शकों को घने जंगलों के शानदार दृश्यों से लेकर मंत्रमुग्ध कर देने वाले अनुष्ठानों तक ले जाती है, जहाँ हर फ्रेम को इतने ध्यान से गढ़ा गया है कि देखने का अनुभव और भी मनमोहक हो जाता है। दमदार अभिनय, बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी और दिल छू जाने वाले संगीत के साथ ‘कांतारा: चैप्टर 1’ एक दिव्य ब्लॉकबस्टर बनकर सामने आती है।

फिल्म का असर इसकी शानदार बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस में भी साफ नजर आता है। अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों में भारी संख्या में दर्शकों ने इसे देखा और यह 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। इसकी सच्चाई, असरदार कहानी और जबर्दस्त विजुअल्स ने सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विश्व भर में दर्शकों के दिलों को गहराई से छुआ और इसे भारतीय सिनेमा की गौरवशाली उपलब्धि बना दिया।

कदंब वंश के दौर में रची-बसी, ‘कांतारा’ यूनिवर्स की यह दूसरी फिल्म, एक प्रीक्वेल के रूप में सामने आती है और दर्शकों को उस कहानी की शुरुआत तक ले जाती है, जहाँ से यह दंतकथा जन्म लेती है। यह दिव्य शक्तियों के मूल और उस योद्धा के उदय की कहानी पेश करती है, जिसे इस धरती और इसके लोगों की रक्षा के लिए चुना गया है। जब लालच और सत्ता की ताकतें इस धरती की पवित्रता को चुनौती देती हैं, तब ये रक्षक मासूमों की रक्षा के लिए खड़े होते हैं और बुराई का अंत करते हैं।

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देखिए आस्था की एक दिव्य गाथा ‘कांतारा: द लेजेंड, चैप्टर 1’, अनमोल सिनेमा पर पहली बार, शनिवार, 24 अक्टूबर को शाम 7 बजे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।