मुंबई. भारतीय मीडिया और विज्ञापन जगत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। Pitch Madison Advertising Report (PMAR) 2026 के ताजा आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि भारत अब ‘पारंपरिक विज्ञापन’ (Traditional Advertising) के दौर को पीछे छोड़कर पूरी तरह से ‘डिजिटल विज्ञापन अर्थव्यवस्था’ बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत का कुल विज्ञापन खर्च (AdEx) ₹1,74,000 करोड़ के जादुई आंकड़े को पार करने का अनुमान है।
यह 2025 की तुलना में 12-13% की शानदार वृद्धि को दर्शाता है, जो वैश्विक मंदी की आहट के बीच भारतीय बाजार की मजबूती को पेश करता है।
🚀 डिजिटल का दबदबा: 64% हिस्सेदारी के साथ बना लीडर
अब विज्ञापनदाता केवल ‘टीवी’ या ‘अखबार’ तक सीमित नहीं हैं। PMAR 2026 की सबसे बड़ी हाइलाइट यह है कि भारत में डिजिटल विज्ञापन खर्च ₹1.12 लाख करोड़ तक पहुंचने वाला है।
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कुल हिस्सेदारी: डिजिटल अब पूरे विज्ञापन बाजार का 64% हिस्सा कवर करता है (2025 में यह 60% था)।
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ग्रोथ रेट: डिजिटल खर्च में सालाना 20% की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
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स्ट्रेटेजी शिफ्ट: रिपोर्ट कहती है कि कंपनियां अब ‘एक्सपेंशन’ (Expansion) के बजाय ‘एलोकेशन’ (Allocation) पर ध्यान दे रही हैं। यानी अब बजट बढ़ाने से ज्यादा जरूरी यह है कि पैसा किस प्लेटफॉर्म (Meta, Google, Amazon, Quick Commerce) पर लग रहा है।
📉 पारंपरिक मीडिया के लिए ‘अलार्म बेल’?
एक तरफ जहां डिजिटल रिकॉर्ड तोड़ रहा है, वहीं लीनियर टीवी और प्रिंट मीडिया की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है।
| माध्यम | अनुमानित वृद्धि (2026) | वर्तमान स्थिति |
| लीनियर टीवी (TV) | 0% – 1% | लगभग स्थिर |
| प्रिंट मीडिया (Print) | 3% | मामूली सुधार |
| रेडियो और सिनेमा | -5% से +5% | उतार-चढ़ाव भरा |
| OOH (Out-of-Home) | 4-5% | DOOH (Digital OOH) के कारण बेहतर |
विशेषज्ञों का मानना है कि FMCG और टेलीकॉम जैसे बड़े दिग्गजों ने टीवी बजट में कटौती की है, जिसका सीधा असर टीवी एडवरटाइजिंग रेवेन्यू पर पड़ा है।
⚡ Quick Commerce और MSME: विकास के नए इंजन
इस रिपोर्ट में दो ऐसे क्षेत्रों ने सबको चौंका दिया है जो डिजिटल एडवरटाइजिंग के असली ‘गेम चेंजर’ बनकर उभरे हैं:
1. Quick Commerce (₹6,000 करोड़ का दांव)
ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन खर्च ₹4,000 करोड़ से बढ़कर सीधे ₹6,000 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। यह 50% की भारी वृद्धि दर्शाती है कि उपभोक्ता अब सीधे ‘चेकआउट’ बटन के पास विज्ञापन देखना पसंद कर रहे हैं।
2. MSME का बढ़ता प्रभाव
भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) ने डिजिटल विज्ञापनों पर अपना खर्च बढ़ाकर ₹42,976 करोड़ कर दिया है। यह साबित करता है कि अब छोटे शहरों के दुकानदार भी सोशल मीडिया मार्केटिंग के जरिए अपने बिजनेस को बढ़ा रहे हैं।
🔍 क्यों कम हो रहा है टीवी और ई-कॉमर्स दिग्गजों का खर्च?
रिपोर्ट के मुताबिक, कई बड़े सेक्टरों ने अपने बजट में कटौती या बदलाव किया है:
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FMCG: -4% की गिरावट।
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Ecommerce: -4% (परफॉरमेंस मार्केटिंग पर फोकस अधिक)।
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Telecom & Durables: क्रमशः 10% और 8% की कमी।
इसका मुख्य कारण यह है कि ब्रांड अब ‘मास रीच’ के बजाय ‘प्रेसिजन मार्केटिंग’ (Precision Marketing) को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां वे सीधे अपने टारगेट ऑडियंस को ट्रैक कर सकें।
📝 निष्कर्ष: भविष्य क्या है?
PMAR 2026 रिपोर्ट यह साफ करती है कि आने वाला समय डेटा और एल्गोरिदम का है। कंटेंट क्रिएटर इकोनॉमी, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और कनेक्टेड टीवी (CTV) अगले 2-3 वर्षों में इस 64% के आंकड़े को 75% तक ले जा सकते हैं।
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