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Chaitra Navratri 2026 Day 6: आज माँ कात्यायनी की पूजा, जानें क्यों जरूरी है शहद का भोग और शुभ मुहूर्त

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर | मंगलवार, 24 मार्च 2026

Chaitra Navratri 2026, Day 6: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन आज, 24 मार्च 2026 को पूरे देश में शक्ति के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की आराधना की जा रही है। मंगलवार का दिन और षष्ठी तिथि का यह संयोग भक्तों के लिए साहस और विजय का प्रतीक माना जा रहा है। सुबह से ही कानपुर के तपेश्वरी देवी मंदिर से लेकर विंध्याचल और दिल्ली के झंडेवालान मंदिर तक श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।

महिषासुर मर्दिनी का स्वरूप: क्यों खास है आज का दिन?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी दुर्गा ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया था, इसीलिए इनका नाम ‘कात्यायनी’ पड़ा। इन्होंने ही अत्याचारी राक्षस महिषासुर का वध किया था। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माँ कात्यायनी बृहस्पति (Jupiter) ग्रह को नियंत्रित करती हैं। उनकी पूजा से कुंडली में गुरु दोष समाप्त होता है और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

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⏰ आज के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)

आज षष्ठी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष प्रभाव है, जो आध्यात्मिक कार्यों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है:

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:52 बजे तक।

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:19 बजे तक।

  • रोहिणी नक्षत्र: शाम 07:04 बजे तक (इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ)।

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? शहद का भोग और लाल रंग का महत्व

माँ कात्यायनी को शहद (Honey) का भोग लगाना अनिवार्य माना गया है।

  • मान्यता: शहद अर्पित करने से साधक के व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ता है और जीवन की कड़वाहट दूर होती है।

  • शुभ रंग: आज के दिन लाल (Red) रंग के वस्त्र पहनना सबसे उत्तम है। लाल रंग शक्ति, ऊर्जा और विजय का प्रतीक है। कई भक्त आज पीले रंग का भी प्रयोग कर रहे हैं जो माँ की सौम्यता को दर्शाता है।

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? विशेष पूजा विधि और मंत्र

आज के दिन भक्त सुबह स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण कर माँ की प्रतिमा के सम्मुख दीपक प्रज्वलित कर रहे हैं। माँ को पीले फूल, कच्ची हल्दी की गांठ और शहद अर्पित किया जा रहा है।

सिद्ध मंत्र जिसका जप आज फलदायी है:

ॐ देवी कात्यायनीयै नमः॥

या

चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

?️ मंदिरों में उत्सव का माहौल

उत्तर प्रदेश के कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी सहित देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों को फूलों और विद्युत झालरों से भव्य रूप से सजाया गया है। आज शाम को कई जगहों पर ‘यमुना छठ’ और ‘स्कंद षष्ठी’ का पर्व भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सहायता के लिए तैनात हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।