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कानपुर मंडी भाव: गेहूं की कीमतों ने बढ़ाई किसानों की चिंता, क्या MSP से नीचे बिकेगी रबी की फसल?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर | 24 मार्च, 2026 : कृषि डेस्क

कानपुर। उत्तर प्रदेश की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में शुमार चकरपुर अनाज मंडी में मंगलवार को कारोबार की रफ्तार सामान्य रही। रबी सीजन की नई फसल की आवक शुरू होने के साथ ही बाजार में स्थिरता देखी जा रही है, लेकिन किसानों के लिए चिंता का विषय गेहूं की कीमतें बनी हुई हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मंडी में गेहूं के भाव वर्तमान सीजन के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे दर्ज किए गए हैं।

गेहूं के भाव में गिरावट: किसानों में मायूसी

केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल तय किया है। हालांकि, चकरपुर मंडी में गेहूं की खरीद फिलहाल ₹2,400 से ₹2,750 प्रति क्विंटल के बीच हो रही है। औसत भाव की बात करें तो यह ₹2,425 से ₹2,515 के दायरे में सिमट गया है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नमी की मात्रा और शुरुआती आवक के दबाव के कारण कीमतें MSP के स्तर को नहीं छू पा रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि सरकारी खरीद केंद्रों पर तेजी नहीं आई, तो खुले बाजार में कीमतों पर और दबाव बन सकता है।

ताज़ा मंडी भाव श्रेणी: matribhumisamachar.com/mandi-bhav/

दलहन बाजार: अरहर और मूंग में दिखी मजबूती

मंडी में दलहन (दालों) के भाव में मिला-जुला रुख देखने को मिला। अरहर और मूंग की अच्छी मांग के कारण इनके दाम ऊंचे स्तरों पर टिके हुए हैं।

  • अरहर: ₹7,000 से ₹7,500 प्रति क्विंटल।

  • मूंग: ₹6,000 से ₹7,800 (क्वालिटी के आधार पर)।

  • चना: ₹5,400 से ₹5,500 के बीच स्थिर।

  • मसूर: ₹5,650 से ₹5,850 प्रति क्विंटल।

  • मटर: ₹3,800 से ₹3,900 के भाव पर कारोबार हुआ।

कृषि समाचार: matribhumisamachar.com/agriculture-news/

तिलहन और मोटे अनाज की स्थिति

सरसों के भाव में भी स्थिरता देखी गई, जहाँ यह ₹5,385 से ₹5,450 प्रति क्विंटल के बीच बिकी। वहीं मोटे अनाजों में बाजार का रुख कुछ इस प्रकार रहा:

  • ज्वार: ₹2,100 – ₹2,150

  • बाजरा: ₹1,900 – ₹2,100

  • मकई (मक्का): ₹1,900 – ₹2,200

सरकारी योजनाएं (MSP अपडेट): matribhumisamachar.com/government-schemes/

आगे क्या है संभावना?

मंडी समिति के अधिकारियों के अनुसार, अगले 10-15 दिनों में रबी की फसलों की आवक अपने चरम (Peak) पर होगी। यदि निजी खरीदार सक्रिय होते हैं और फसल की गुणवत्ता बेहतर रहती है, तो कीमतों में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, किसानों की नज़रें अब सरकारी क्रय केंद्रों की ओर हैं ताकि उन्हें अपनी मेहनत का सही दाम (MSP) मिल सके।

विशेष टिप: किसान भाई अपनी फसल को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके लाएं, ताकि मंडी में उन्हें अधिकतम भाव मिल सके।

नोट : मंडी में भाव गुणवत्ता (Quality) और आवक (Arrival) के आधार पर दिन भर बदलते रहते हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।