
जोधपुर। प्रदेश में साम्प्रदायिक सद्भाव व सौहार्द बनाए रखने व जनजीवन असंतुलन से उत्पन्न संभावित अशांति को रोकने तथा अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की सम्पत्तियों एवं किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण के उद्देश्य से राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में “अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की सम्पत्तियों एवं किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण हेतु विधेयक-2026” के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की गई।
प्रदेश सरकार के इस निर्णय का विश्व हिन्दू परिषद ने स्वागत किया किया है और इसे सामाजिक सद्भाव, कानून-व्यवस्था तथा प्रदेश के शांतिप्रिय समाज के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम बताया।
विश्व हिन्दू परिषद राजस्थान क्षेत्र के विधि प्रमुख एवं राजस्थान उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित ने सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि यह विधेयक उन क्षेत्रों में सामाजिक, धार्मिक असंतुलन से उपजे तनाव, अवैध कब्जों, जबरन पलायन तथा सामाजिक अस्थिरता को रोकने में प्रभावी सिद्ध होगा। इससे उन क्षेत्रों के स्थायी निवासियों एवं किरायेदारों के संवैधानिक व वैधानिक अधिकारों को संरक्षण मिलेगा और प्रदेश की कानून-व्यवस्था सुदृढ़ होगी।
इस विधेयक की मांग विश्व हिन्दू परिषद लंबे समय से कर रही थी। राजस्थान में योजनाबद्ध रूप से ऐसे अनेक क्षेत्र विकसित हुए हैं, जहां धार्मिक असंतुलन स्थापित कर अन्य समुदायों को पलायन हेतु मजबूर किया गया। कई स्थानों पर लोगों की सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे किए गए अथवा उन्हें न्यूनतम मूल्यों पर सम्पत्ति बेचने के लिए विवश किया गया। प्रदेश में ऐसे 86 ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। इस विधेयक के लागू होने से ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी, बाजार मूल्य से कम पर बिक्री नहीं हो सकेगी, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को पनपने से रोका जाएगा तथा किसी भी समुदाय की आबादी को सुनियोजित रूप से बसाने पर नियंत्रण स्थापित होगा।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में बहुमत से पारित होने के पश्चात यह विधेयक कानून का रूप लेगा, जिसके अंतर्गत ऐसे ब्लॉकों का चयन किया जाएगा, जहां एक वर्ग विशेष की बहुलता के कारण क्षेत्र संवेदनशील बन गया है तथा कानून-व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो रहा है। ऐसे क्षेत्रों में महिलाओं एवं आम नागरिकों का निर्बाध आवागमन कठिन हो गया है। इन क्षेत्रों को प्रतिषेध क्षेत्र घोषित कर वहां के परंपरागत निवासियों का किसी भी स्थिति में पलायन नहीं होने दिया जाएगा।
ऐसे क्षेत्रों में कोई भी व्यक्ति मजबूरी में औने-पौने दामों पर सम्पत्ति नहीं बेच सकेगा। सम्पत्ति विक्रय से पूर्व जिला कलेक्टर को आवेदन करना अनिवार्य होगा, जिसमें विधिसम्मत कारण बताने होंगे। जिला प्रशासन द्वारा जांच के पश्चात यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विक्रय वास्तविक बाजार मूल्य पर ही हो, तभी अनुमति प्रदान की जाएगी।
विहिप द्वारा प्रस्तुत अधिकांश मांगों को विधेयक में सम्मिलित किया गया है। साथ ही संगठन की अतिरिक्त मांग है कि अशांत क्षेत्रों में यात्रियों एवं पर्यटकों के आवागमन पर कड़ी निगरानी रखी जाए, अवैध गतिविधियों में बाहरी तत्वों की भूमिका की जांच हो, बड़े उद्योगों की अनुमति न दी जाए। जिससे श्रमिकों के शोषण की संभावना बढ़ती है। इसके अतिरिक्त उन क्षेत्रों की भी जांच की जाए जहां बहुसंख्यक समाज, विशेषकर अनुसूचित जाति-जनजाति वर्गों की रहने की परिस्थितियों को विषम बनाया जा रहा है तथा उनकी पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
साभार : विश्व संवाद केंद्र
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