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सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ का गूँजा जयघोष; ‘मातृभूमि’ गाने ने जगाया देशभक्ति का ज्वार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. आज पूरा देश गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या के जश्न में डूबा है, वहीं बॉलीवुड के ‘सुपरस्टार’ सलमान खान ने अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ (Battle of Galwan) का पहला गाना ‘मातृभूमि’ रिलीज कर सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। यह गाना न केवल एक संगीत रचना है, बल्कि साल 2020 में गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए शहीद हुए 20 भारतीय जांबाजों को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है।

1. ‘मातृभूमि’ गाना: रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव

गाने की शुरुआत लद्दाख की बर्फीली चोटियों और तिरंगे के लहराने के साथ होती है।

  • गायक और संगीत: इस गीत को विशाल मिश्रा ने अपनी दमदार आवाज दी है, जबकि इसके शब्द प्रसून जोशी ने लिखे हैं।

  • विजुअल्स: वीडियो में सलमान खान को एक आर्मी अफसर के रूप में दिखाया गया है, जो मुश्किल परिस्थितियों में अपने जवानों का हौसला बढ़ा रहे हैं। गाने के बीच-बीच में वास्तविक गलवान संघर्ष की धुंधली झलकियों का उपयोग इसे और भी प्रभावशाली बनाता है।

2. फिल्म की कहानी: गलवान के शौर्य की दास्ताँ

‘बैटल ऑफ गलवान’ फिल्म जून 2020 में हुई उस हिंसक झड़प पर आधारित है, जहाँ भारतीय सेना के बिहार रेजिमेंट के जवानों ने बिना आधुनिक हथियारों के भी चीनी सेना को धूल चटाई थी।

  • सलमान का किरदार: सलमान खान इस फिल्म में कर्नल संतोष बाबू (मरणोपरांत महावीर चक्र) से प्रेरित एक किरदार निभा रहे हैं।

  • युवाओं को संदेश: फिल्म का उद्देश्य नई पीढ़ी को यह बताना है कि कैसे भारतीय सेना शून्य से नीचे के तापमान में भी देश की अखंडता की रक्षा करती है।

3. ‘मातृभूमि’ और राष्ट्रवाद का सिनेमाई सफर

पिछले कुछ वर्षों में ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ और ‘शेरशाह’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचा है। सलमान खान की यह फिल्म भी उसी श्रेणी में आती है।

  • रिलीज की टाइमिंग: गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले इस गाने को रिलीज करना एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

  • सोशल मीडिया ट्रेंड: ट्विटर (X) पर #MatrubhumiSong और #SalmanKhan टॉप ट्रेंड में है। लोग इसे साल का सबसे बड़ा ‘देशभक्ति एंथम’ बता रहे हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।