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अफगानिस्तान में भूकंप: बदख्शां में 5.7 तीव्रता के झटके, उज्बेकिस्तान तक कांपी धरती

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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काबुल. अफगानिस्तान का उत्तरी हिस्सा आज एक बार फिर भीषण भूकंप के झटकों से दहल उठा। बुधवार, 25 फरवरी 2026 को स्थानीय समयानुसार दोपहर 4:12 बजे, बदख्शां प्रांत के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में 5.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया।

भूकंप का केंद्र और गहराई

भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) 37.17°N अक्षांश और 71.16°E देशांतर पर बदख्शां प्रांत में स्थित था। जमीन के भीतर इसकी गहराई (हाइपोसेंटर) 67 किलोमीटर मापी गई है। हिंदूकुश क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण यह झटके महसूस किए गए।

पड़ोसी देशों में भी दहशत

भूकंप की लहरें इतनी तीव्र थीं कि सीमा पार उज्बेकिस्तान के कई हिस्सों में भी लोग घरों से बाहर निकल आए।

  • सुरखांदरया क्षेत्र: यहाँ सिस्मिक स्केल पर 2 पॉइंट की तीव्रता के साथ झटके महसूस किए गए।

  • ताशकंद: उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद, जो केंद्र से लगभग 485 किलोमीटर दूर है, वहाँ भी कंपन दर्ज किया गया।

जान-माल का नुकसान

ताजा जानकारी मिलने तक, पहाड़ी इलाका होने के कारण संचार में बाधा आ रही है। हालांकि अभी तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि 67 किमी की गहराई होने के कारण बड़े पैमाने पर तबाही की संभावना कम है, लेकिन कच्चे मकानों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जोखिम बना हुआ है।

विशेषज्ञों की राय: हिंदूकुश पर्वतमाला दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। यूरेशियन और इंडियन प्लेटों के टकराव के कारण यहाँ अक्सर मध्यम से उच्च तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।