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वंदे मातरम के 150 वर्ष: BNSD शिक्षा निकेतन कानपुर में ‘नमामि भारतम्’ के अंतर्गत ‘पूर्ण वंदे मातरम’ का हुआ भव्य सामूहिक गायन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर |

भारत की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की अमर प्रेरणा और मातृभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा के प्रतीक ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली द्वारा देशव्यापी सामूहिक गायन अभियान ‘नमामि भारतम्’ का आयोजन किया जा रहा है।

इसी राष्ट्रीय श्रृंखला के अंतर्गत 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को पूर्वाहन 11:00 बजे बी० एन० एस० डी० शिक्षा निकेतन, कानपुर के विशाल सभागार में राष्ट्रगीत ‘पूर्ण वन्दे मातरम्’ का सामूहिक पाठ अत्यंत भव्य और देशभक्तिपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

देशभक्ति और सांस्कृतिक ऊर्जा से गुंजायमान हुआ प्रांगण

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के विशाल सभागार में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जहाँ विद्यालय के 200 से अधिक छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं ने एक साथ उपस्थित होकर एक ही समय पर, एक स्वर में संपूर्ण राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ का सस्वर पाठ किया।

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समवेत स्वर में गूंजती राष्ट्रगीत की स्वर-लहरियों से संपूर्ण विद्यालय परिसर राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।

गरिमामयी उपस्थिति

इस ऐतिहासिक आयोजन में निम्नलिखित प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे:

  • मंजुबाला श्रीवास्तव: कार्यक्रम साक्षी एवं प्रधानाचार्या (बी०एन०एस०डी०शि०नि० इंटर कॉलेज, बेनाझाबर, कानपुर)
  • धीरज शर्मा: कार्यक्रम पर्यवेक्षक एवं भौतिक विज्ञान प्राध्यापक
  • मनोज कुमार सिंह: संयोजक (वंदे मातरम् सामूहिक गायन कार्यक्रम)

150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और ‘पूर्ण वंदे मातरम’ का महत्व

सामान्यतः राष्ट्रगीत के केवल प्रारंभिक दो छंदों का ही गायन किया जाता रहा है, लेकिन 150 वर्ष पूर्ण होने के इस पावन अवसर पर विद्यालय में राष्ट्रगीत के सभी 6 छंदों का पूर्ण सस्वर पाठ किया गया।

विवरणतथ्य व महत्व
अभियान का नामनमामि भारतम् (विद्या भारती द्वारा संचालित)
छंदों की संख्यापूर्ण 6 छंद (पारंपरिक 2 छंदों के स्थान पर)
मुख्य उद्देश्यनई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास व त्याग से जोड़ना
सांस्कृतिक संदेशविविधता के साथ भारत की भावनात्मक व सांस्कृतिक एकात्मता

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान सभा द्वारा ‘वन्दे मातरम्’ को राष्ट्रीय गौरव का विशिष्ट स्थान प्रदान किया गया था। ‘नमामि भारतम्’ अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल सामूहिक गायन तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी को इसके त्याग, बलिदान और राष्ट्रीय चेतना की अमर विरासत से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम का आयोजन किसके द्वारा किया जा रहा है?

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‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम का आयोजन विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली द्वारा देश भर के शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।

2. सामान्य वंदे मातरम और पूर्ण वंदे मातरम में क्या अंतर है?

सामान्यतः औपचारिक अवसरों पर वंदे मातरम के केवल प्रारंभिक 2 छंद गाए जाते हैं, जबकि पूर्ण वंदे मातरम में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित सभी 6 छंद शामिल होते हैं।

3. बीएनएसडी शिक्षा निकेतन कानपुर में इस कार्यक्रम में कितने छात्रों ने भाग लिया?

बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, कानपुर में आयोजित इस भव्य गायन में 200 से अधिक विद्यार्थियों, आचार्यों एवं अतिथियों ने एक साथ सस्वर पाठ किया।

  • देश और समाज से जुड़ी नवीनतम राष्ट्रीय खबरों के लिए पढ़ें: Matribhumi Samachar News

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख 25 सितंबर 2026 को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, कानपुर में आयोजित ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम की प्रेस रिपोर्ट पर आधारित है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय चेतना व सांस्कृतिक अभियानों से जुड़ी जानकारी को जनसामान्य तक पहुँचाना है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।