वाशिंगटन।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा से ठीक पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) के छह डेमोक्रेटिक सांसदों द्वारा लिखा गया एक पत्र राजनयिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रमिला जयपाल और इल्हान उमर के नेतृत्व में लिखे गए इस पत्र में भारत में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीकों पर चिंता जताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
भारत सरकार और वाशिंगटन में भारतीय दूतावास ने इस कदम को सीधे तौर पर ‘अस्वीकार्य हस्तक्षेप’ करार दिया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अमेरिकी कांग्रेस के उस ‘प्रगतिशील’ (प्रोग्रेसिव) गुट के विवादित रिकॉर्ड और भारत-विरोधी पूर्वाग्रहों को उजागर कर दिया है।
पत्र में उठाई गई मांगें और भारत पर दबाव की कोशिश
16 अक्टूबर 2026 को भेजे गए इस पत्र में जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया भी शामिल थे। पत्र की प्रमुख मांगें और बिंदु निम्नलिखित हैं:
- विरोध प्रदर्शनों पर आरोप: सांसदों ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘गलत तरीके से हिरासत में लेने और अत्यधिक बल प्रयोग’ का पैटर्न अपनाया है।
- स्वतंत्र जांच की मांग: अमेरिकी विदेश मंत्री से आग्रह किया गया कि वे नई दिल्ली पर इन मामलों की स्वतंत्र जांच कराने का दबाव बनाएं।
- दूतावासों पर निगरानी का आरोप: पत्र में कहा गया कि वाशिंगटन को उन दावों की जांच करनी चाहिए कि अमेरिकी धरती पर भारतीय मिशन CJP समर्थकों की निगरानी कर रहे हैं।
- हथियार बिक्री से जोड़ने की धमकी: सांसदों ने संकेत दिया कि भारत का यह आचरण ‘अमेरिकी हथियार निर्यात नियंत्रण अधिनियम’ (US Arms Export Control Act) के तहत रक्षा सामग्री खरीदने की उसकी पात्रता को प्रभावित कर सकता है।
वाशिंगटन में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इस पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दों पर किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।
हस्ताक्षरकर्ता सांसदों का विवादित और भारत–विरोधी रिकॉर्ड
यह पहला मौका नहीं है जब इन छह सांसदों ने भारत के खिलाफ रुख अपनाया है। इस समूह के प्रमुख सदस्यों का विवादों और कड़े बयानों से पुराना नाता रहा है:
प्रमिला जयपाल और इल्हान उमर
- जम्मू–कश्मीर मुद्दा (2019): प्रमिला जयपाल ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद ‘हाउस रेजोल्यूशन 745’ पेश किया था। इसके जवाब में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मामलों की समिति के साथ अपनी बैठक रद्द कर दी थी, जब समिति ने जयपाल को बैठक में शामिल करने की जिद्द की।
- PoK दौरा और संप्रभुता का उल्लंघन: इल्हान उमर ने अप्रैल 2022 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का दौरा किया, जिसे भारत ने अपनी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन माना।
- PM मोदी के भाषण का बहिष्कार: जून 2023 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया, तो इल्हान उमर, रशीदा तलीब और एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था।
अपने ही देश में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना
इन सांसदों पर केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका के भीतर भी गंभीर आरोप लगते रहे हैं:
- इल्हान उमर: यहूदी-विरोधी (Anti-Semitic) बयानों के कारण फरवरी 2023 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने उन्हें 218-211 वोटों से ‘हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी’ से हटा दिया था।
- रशीदा तलीब: नवंबर 2023 में “From the river to the sea” (इज़राइल-हमास संदर्भ में विवादित नारा) का समर्थन करने पर अमेरिकी हाउस ने उनके खिलाफ 234-188 वोटों से निंदा प्रस्ताव (Censure Motion) पारित किया था।
- जिम मैकगवर्न और जीसस गार्सिया: मैकगवर्न पर सदन के नियमों के उल्लंघन और ट्रम्प के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियों के कारण हाउस में बोलने पर अस्थायी प्रतिबंध लगा था। गार्सिया को चुनावी प्रक्रिया प्रभावित करने के आरोपों में 2025 में formal censure का सामना करना पड़ा।
भारत का सख्त रुख और कूटनीतिक संदेश
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मार्को रुबियो की मुलाकात मुख्य रूप से रक्षा, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार पर केंद्रित रही। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन इन गिने-चुने सांसदों के बयानों को अपनी आधिकारिक विदेश नीति का हिस्सा बनाने के मूड में नहीं है।
भारत के विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के पत्र निष्पक्ष मानवाधिकार चिंताओं से प्रेरित नहीं होते, बल्कि एक खास वैचारिक नेटवर्क का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य लगातार भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों में खटास डालना है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1: 6 अमेरिकी सांसदों ने मार्को रुबियो को लिखे पत्र में क्या मांग की थी?Ans: सांसदों ने मांग की थी कि मार्को रुबियो अपनी भारत यात्रा के दौरान CJP विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके, कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और अमेरिकी धरती पर भारतीय मिशनों द्वारा निगरानी के दावों का मुद्दा उठाएं।
Q2: भारत ने इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया दी?Ans: भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में ‘अस्वीकार्य दखल’ करार दिया और स्पष्ट किया कि भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
Q3: क्या इस पत्र का भारत–अमेरिका रक्षा सौदों पर असर पड़ेगा?Ans: नहीं, अमेरिकी विदेश मंत्रालय और प्रशासन की प्राथमिकता व्यापार, ऊर्जा और रक्षा साझेदारी को बढ़ावा देना है। इन डेमोक्रेटिक सांसदों का पत्र आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं है।
अस्वीकरण
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बयानों, कूटनीतिक पत्राचारों और राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़े घटनाक्रमों का निष्पक्ष अवलोकन प्रस्तुत करना है।
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