मुंबई|
भारत में स्वास्थ्य और पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही बहुराष्ट्रीय खाद्य कंपनियों (‘बिग फूड’) के भ्रामक दावों का खेल भी तेज हो गया है। हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने दो दिग्गज कंपनियों—नेस्ले इंडिया (Nestlé India) और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL)—को नए कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notices) थमाए हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारत में 10.1 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह (Diabetes) की चपेट में हैं और 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक स्थिति में हैं। ऐसे में सुपरमार्केट शेल्फ पर ‘हेल्दी’, ‘नो एडेड शुगर’ या ‘क्लिनिकली प्रूवन’ जैसे बड़े-बड़े दावों के साथ बिकने वाले उत्पाद उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रहे हैं।
क्या हैं एफएसएसएआई के नए नोटिस और कंपनियों पर आरोप?
FSSAI द्वारा जारी हालिया नोटिसों में प्रमुख ब्रांडों की सामग्री और उनके दावों के बीच बड़े अंतर उजागर हुए हैं:
- नेस्ले का ‘रिसोर्स रीनल’ (Resource Renal): क्रॉनिक किडनी डिजीज के मरीजों के लिए तैयार इस न्यूट्रिशन पाउडर को बिना आवश्यक विधिक मंजूरी और अनिवार्य शाकाहारी/मांसाहारी लोगो के बेचा जा रहा था।
- एचयूएल का ‘हॉर्लिक्स मदर्स प्लस’ (Horlicks Mother’s Plus): गर्भवती महिलाओं के इस पेय पदार्थ पर ‘स्वस्थ जन्म वजन’ (Healthy Birth Weight) का वादा किया गया, जिसे नियामक ने भ्रामक माना है।
- एचयूएल का ‘हॉर्लिक्स विमेंस प्लस’ (Horlicks Women’s Plus): हड्डियों की मजबूती के दावों के साथ इस पर ‘नो एडेड शुगर’ का लेबल है। हालांकि, इसमें माल्टोडेक्सट्रिन (Maltodextrin) मौजूद है—एक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जो शरीर में जाकर ब्लड ग्लूकोज को तेजी से बढ़ाता है।
- नेस्कैफे रेडी–टू–ड्रिंक (Nescafé Ready-to-Drink): पैकेट के सामने इसे ‘फ्लेवर्ड मिल्क’ और पीछे ‘प्रोपराइटरी फूड’ बताया गया, जो लेबलिंग नियमों का उल्लंघन है।
एक ही कंपनी, दो अलग–अलग मानक (Double Standards)
स्विस जांच संगठन ‘पब्लिक आई’ (Public Eye) और IBFAN की 2024 की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि नेस्ले के शिशु आहार सेरेलेक (Cerelac) के भारतीय संस्करण में औसतन 3 ग्राम प्रति सर्विंग अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है। इसके विपरीत, जर्मनी, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों में बिकने वाले समान उत्पाद में बिल्कुल भी अतिरिक्त चीनी (0% Added Sugar) नहीं होती।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार शिशुओं के भोजन में ऊपर से चीनी मिलाना पूरी तरह वर्जित होना चाहिए। भारत में आलोचना बढ़ने के बाद नेस्ले ने बिना अतिरिक्त चीनी वाले वेरिएंट बाजार में उतारे, जिससे स्पष्ट होता है कि सुधार पहले भी संभव था।
[ यूरोपीय बाजार ] —> 0g एडेड शुगर (सुरक्षित मानक)
[ भारतीय बाजार ] —> ~3g एडेड शुगर प्रति सर्विंग
भारत में क्यों जरूरी हैं सख्त नियम?
ICMR-INDIAB के अध्ययन के मुताबिक भारत में 25.4 करोड़ लोग मोटापे से भी ग्रस्त हैं। शिशुओं और बच्चों में शुरुआती उम्र से ही चीनी की लत लगने से आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
सुधार के लिए 3 आवश्यक कदम:
- फ्रंट–ऑफ–पैक लेबलिंग (FOPL): उत्पाद के सामने वाले हिस्से पर उच्च चीनी, नमक या वसा (High Fat, Sugar, Salt – HFSS) की स्पष्ट चेतावनी दर्ज हो।
- माल्टोडेक्सट्रिन पर पारदर्शिता: ‘नो एडेड शुगर’ का दावा करने वाले प्रोडक्ट्स में यदि जल्दी पचने वाले कार्बोहाइड्रेट हैं, तो उनका प्रमुखता से उल्लेख किया जाए।
- कड़े जुर्माने और सुधारात्मक विज्ञापन: नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और उन्हें सुधारात्मक विज्ञापन (Corrective Ads) जारी करने के लिए बाध्य किया जाए।
उपभोक्ता के तौर पर आप क्या करें?
- फ्रंट पैक सिर्फ विज्ञापन है: पैकेट के सामने लिखे आकर्षक शब्दों पर भरोसा न करें।
- बैक पैक जानकारी है: हमेशा पीछे दी गई न्यूट्रिशन टेबल (Nutritional Facts) और सामग्री की सूची (Ingredients) को पढ़ें।
- छिपी हुई चीनी को पहचानें: सुक्रोज, फ्रुक्टोज, माल्टोडेक्सट्रिन, कॉर्न सिरप और माल्टोस—ये सभी चीनी के ही रूप हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: FSSAI ने नेस्ले और HUL को नोटिस क्यों भेजा है?
Ans: FSSAI ने भ्रामक स्वास्थ्य दावों, ‘नो एडेड शुगर’ लेबल के बावजूद माल्टोडेक्सट्रिन के उपयोग और बिना आवश्यक विधिक मंजूरियों के उत्पाद बेचने के कारण दोनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भेजा है।
Q2: माल्टोडेक्सट्रिन क्या है और यह नुकसानदेह क्यों है?
Ans: माल्टोडेक्सट्रिन एक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत अधिक होता है, जिससे यह साधारण चीनी की तरह ही रक्त में शर्करा (Blood Sugar) का स्तर तेजी से बढ़ाता है।
Q3: ‘हेल्थ ड्रिंक्स’ श्रेणी पर सरकार का क्या रुख है?
Ans: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को हॉर्लिक्स, बॉर्नविटा जैसे ड्रिंक्स को ‘हेल्थ ड्रिंक’ श्रेणी से हटाने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि भारतीय खाद्य कानूनों (FSS Act) में ‘हेल्थ ड्रिंक’ नाम की कोई श्रेणी पंजीकृत नहीं है।
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अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए FSSAI की सार्वजनिक रिपोर्टों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बयानों और खाद्य सुरक्षा जांचों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या आहार परिवर्तन से पहले किसी योग्य चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) से सलाह लें।

