लोड हो रहा है...

पर्दे के आइकॉन से लेकर पर्सनल हीरो तक, सोनी सब के कलाकारों ने बताया उन अभिनय दिग्गजों के बारे में, जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

मुंबई, फरवरी 2026: हर कलाकार के भीतर एक प्रेरणा की कहानी होती है। यह उस पल को उजागर करती है, जब किसी प्रदर्शन को देखकर एक सपना जन्म लेता है और अभिनय की कला को समझने का नजरिया बदल जाता है। सदाबहार स्क्रीन आइकॉन से लेकर उन निजी नायकों तक, जिन्हें वे गहराई से सराहते हैं, ये दिग्गज कलाकारों के लिए मौन गुरु बन जाते हैं, जो उनके चुनाव, अनुशासन और कलात्मक अभिव्यक्ति को प्रभावित करते हैं। सोनी सब के कलाकार श्रेनु पारिख, सुम्बुल तौकीर खान, रजत वर्मा और दीक्षा जोशी उन महान हस्तियों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया। और साथ ही उन गुणों को साझा करते हैं, जिन्हें वे सबसे अधिक संजोते हैं और बताते हैं कि कैसे ये प्रभाव आज भी कैमरे के सामने उनकी यात्रा को दिशा देते हैं।

श्रेनु पारिख, जो गणेश कार्तिकेय में देवी पार्वती की भूमिका निभा रही हैं, साझा करती हैं, “ऐश्वर्या राय बच्चन हमेशा से मेरी प्रेरणा रही हैं। मुझे याद है कि उनकी परफॉर्मेंस देखते हुए मैं उनकी गरिमा और शांत आत्मविश्वास से प्रभावित होती थी। जिस तरह वे खुद को प्रस्तुत करती हैं, उसमें एक खास गरिमा और शक्ति है, और यह वर्षों से मेरे साथ रहा है। जब मैं भावनात्मक रूप से गहन भूमिकाओं की तैयारी करती हूँ, तो खुद को याद दिलाती हूँ कि शक्ति और कोमलता का संतुलन बनाए रखना है। यह वह चीज़ है जिसे मैं सच में सराहती हूँ और सीखने की कोशिश करती हूँ।”

सुम्बुल तौकीर खान, जो इत्ती सी खुशी में अन्विता का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “मैं वरुण बडोला सर से बहुत प्रेरणा लेती हूँ। उनके साथ काम करना मेरे लिए बड़ा सीखने का अनुभव रहा है। मैंने देखा है कि वे सीन के सबसे छोटे-छोटे पहलुओं पर ध्यान देते हैं और किसी भी पल को हल्के में नहीं लेते। साधारण बातचीत में भी वे इतनी ईमानदारी लाते हैं। इसे करीब से देखना मुझे सिखाता है कि हमेशा तैयार रहना चाहिए और हर सीन का सम्मान करना चाहिए, चाहे वह बड़ा हो या छोटा।”

- Advertisement -

रजत वर्मा, जो इत्ती सी खुशी में विराट की भूमिका निभा रहे हैं, साझा करते हैं, “मैं हमेशा इरफान खान को आदर्श मानता रहा हूँ। मुझे याद है कि उनकी फिल्में देखते हुए ऐसा लगता था कि वे अभिनय नहीं कर रहे, बस जी रहे हैं। वह सहजता मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ गई। इससे मुझे समझ आया कि कभी-कभी कम करना ही ज़्यादा कह देता है। जब भी मैं किसी किरदार को निभाने जाता हूँ, खुद को याद दिलाता हूँ कि इसे सच्चा रखना है और भावनाओं को खुद बोलने देना है।”

दीक्षा जोशी, जो पुष्पा इम्पॉसिबल में दीप्ति का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “मैं तिलोत्तमा शोम और कोंकणा सेन शर्मा जैसी अभिनेत्रियों की बहुत प्रशंसा करती हूँ, क्योंकि वे अपने अभिनय में इतनी ईमानदारी लाती हैं। यह बहुत वास्तविक और सहज लगता है। साथ ही, मैं हमेशा गुलज़ार साहब, मंटो और मन्नू भंडारी जैसे लेखकों से गहराई से प्रेरित रही हूँ। उनके शब्दों में वह गहराई होती है जो आपके साथ रहती है। मजबूत अभिनय और सार्थक लेखन दोनों को देखना मेरे लिए कहानी कहने और भावनाओं को समझने का तरीका तय करता है।”

देखिए इत्ती सी खुशी, गणेश कार्तिकेय और पुष्पा इम्पॉसिबल, सिर्फ सोनी सब पर।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।