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एशिया कप तीरंदाजी 2026: बैंकॉक में भारतीय तीरंदाजों का जलवा, जीते दो कांस्य; 4 गोल्ड मेडल की ओर बढ़े कदम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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बैंकाक | 26 मार्च, 2026 स्पोर्ट्स डेस्क: थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में आयोजित हो रहे एशिया कप तीरंदाजी स्टेज-1 में भारतीय खिलाड़ियों ने अपने सटीक निशानों से प्रतिद्वंदियों को पस्त कर दिया है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारत की झोली में दो कांस्य पदक आए, वहीं कंपाउंड और रिकर्व की विभिन्न श्रेणियों में भारत ने फाइनल का टिकट कटाकर देश के लिए कम से कम चार और पदक सुरक्षित कर लिए हैं।

? टीम इवेंट: भारत को मिले दो ‘कांस्य’

भारतीय तीरंदाजों ने टीम स्पर्धाओं में जुझारूपन दिखाते हुए दो पोडियम फिनिश हासिल किए:

  • पुरुष कंपाउंड टीम: रजत चौहान, ऋषभ यादव और उदय कंबोज की अनुभवी तिकड़ी ने कांस्य पदक के कड़े मुकाबले में भूटान को 234-232 के करीबी अंतर से हराया। सेमीफाइनल में वियतनाम से मात्र 1 अंक (233-234) से हारने के बाद भारत ने शानदार वापसी की।

  • महिला रिकर्व टीम: रूमा बिस्वास, कीर्ति और रिद्धि फोर की टीम ने मलेशिया पर 5-1 की एकतरफा जीत दर्ज कर कांस्य पदक अपने नाम किया।

? फाइनल की राह: भारत के ‘गोल्डन’ निशाने

भारत ने चार प्रमुख श्रेणियों के फाइनल में जगह बनाई है, जहाँ मुक़ाबले रोमांचक होने की उम्मीद है:

  1. कंपाउंड पुरुष (व्यक्तिगत): इस वर्ग में भारत का दबदबा ऐसा रहा कि फाइनल ‘ऑल-इंडिया’ मुकाबला बन गया है। प्रथमेश समाधान जावकर और उदय कंबोज स्वर्ण पदक के लिए आमने-सामने होंगे। इसका मतलब है कि भारत का गोल्ड और सिल्वर दोनों पक्का है।

  2. महिला कंपाउंड टीम: चिकिथा तानीपर्थी, राज कौर और तेजल साल्वे की टीम ने मेजबान थाईलैंड को 229-226 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। अब स्वर्ण के लिए उनका सामना कजाखस्तान से होगा।

  3. पुरुष रिकर्व टीम: देवांग गुप्ता, सुखचैन सिंह और जुयेल सरकार ने मलेशिया को 5-1 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। यहाँ भी खिताबी भिड़ंत कजाखस्तान से होगी।

  4. महिला रिकर्व (व्यक्तिगत): युवा तीरंदाज रिद्धि फोर ने अपने शानदार फॉर्म को जारी रखते हुए व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई है।

? एक नजर विश्लेषण पर

जहाँ कंपाउंड और महिला रिकर्व खिलाड़ियों ने तिरंगा बुलंद किया, वहीं पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत वर्ग में भारत को निराशा हाथ लगी। इस श्रेणी में कोई भी भारतीय खिलाड़ी पदक की दौड़ (सेमीफाइनल) तक नहीं पहुँच सका, जिसे पिछले सत्र के स्वर्ण पदक प्रदर्शन के मुकाबले एक बड़ा सेट-बैक माना जा रहा है।

नोट: अनुभवी खिलाड़ियों जैसे दीपिका कुमारी और अभिषेक वर्मा (सीनियर) को इस दौरे पर आराम दिया गया है ताकि बेंच स्ट्रेंथ को परखा जा सके, और युवा खिलाड़ियों ने इस मौके का बखूबी फायदा उठाया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।