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पश्चिम बंगाल रामनवमी 2026: 7,500 जवान, ड्रोन और हाईकोर्ट की सख्ती; क्या टल गया बड़ा टकराव?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कोलकाता | गुरुवार, 26 मार्च 2026

पश्चिम बंगाल में आज रामनवमी के अवसर पर भक्ति और सतर्कता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर कोलकाता और हावड़ा में शोभायात्राओं के दौरान छिटपुट तनाव की खबरों के बीच प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। 2026 के विधानसभा चुनावों के मुहाने पर खड़े बंगाल में इस बार रामनवमी की रैलियां राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही हैं।

सुरक्षा का अभेद्य किला: 7,500 जवान तैनात

प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए राज्य भर में 7,500 से अधिक अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है। कोलकाता, हावड़ा, चंदननगर और इस्लामपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टुकड़ियों ने मार्च किया।

  • ड्रोन और CCTV: भीड़ नियंत्रण और असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए प्रमुख रूटों पर ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं।

  • ट्रैफिक एडवाइजरी: कोलकाता पुलिस ने दोपहर 12 बजे से आधी रात तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है, ताकि शोभायात्राओं का मार्ग बाधित न हो।

कलकत्ता हाईकोर्ट के सख्त निर्देश

इस वर्ष कलकत्ता हाईकोर्ट ने ‘अंजनी पुत्र सेना’ और अन्य आयोजकों को अनुमति देते समय कुछ कड़ी शर्तें रखी थीं, जिनका पालन सुनिश्चित करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती रहा:

  1. संख्या सीमा: एक शोभायात्रा में 500 से अधिक प्रतिभागियों की अनुमति नहीं दी गई।

  2. हथियार निषेध: वास्तविक हथियारों के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध रहा; केवल PVC (प्लास्टिक) से बने प्रतीकात्मक शस्त्रों की ही अनुमति मिली।

  3. समय सीमा: हावड़ा जैसे इलाकों में टकराव टालने के लिए अलग-अलग संगठनों को सुबह और दोपहर के अलग-अलग स्लॉट दिए गए।

  4. नारेबाजी: उकसाने वाले या सांप्रदायिक नारेबाजी पर सख्त पाबंदी लगाई गई है।

चुनावी माहौल और राजनीतिक हलचल

चूंकि राज्य में विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मी तेज है, इसलिए रामनवमी की इन शोभायात्राओं को चुनावी शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। कोलकाता के भवानीपुर और हावड़ा के शिवपुर में प्रमुख राजनीतिक दिग्गजों ने इन यात्राओं में शिरकत की, जिससे सुरक्षा बलों पर दबाव और बढ़ गया है।

कैसा है मौजूदा हाल?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कुछ स्थानों पर जुलूस के रूट और नारेबाजी को लेकर मामूली बहस हुई, लेकिन पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाल लिया। फिलहाल राज्य के अधिकांश हिस्सों में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और शांतिपूर्ण है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी असत्यापित वीडियो या अफवाह पर विश्वास न करें।

विशेष नोट: पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी संगठन अदालती नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उन पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।