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बंगाल की खाड़ी में गंभीर हुआ चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’, 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट पर देगा दस्तक; कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

अमरावती।

बंगाल की खाड़ी के मध्य-पूर्वी और उससे सटे पश्चिमी हिस्सों में बना गहरा दबाव तीव्र होकर भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब‘ (Cyclone Arnab) में तब्दील हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार, यह प्रणाली उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए और अधिक गंभीर रूप धारण कर सकती है। इसके प्रभाव से तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और पड़ोसी राज्यों में 27 से 29 अक्टूबर के बीच स्थिति काफी संवेदनशील रहने की आशंका है।

 

बापटला और विशाखापत्तनम के बीच लैंडफॉल की संभावना

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IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात ‘अर्नब’ के 28 अक्टूबर 2026 की दोपहर तक आंध्र प्रदेश और यनम के तटों को पार करने की संभावना है।

  • संभावित लैंडफॉल ज़ोन: बापटला से विशाखापत्तनम के बीच (यनम के निकट)।
  • हवा की गति: तट से टकराते समय निरंतर हवा की रफ्तार 115 से 125 किमी/घंटा रह सकती है, जबकि झोंकों की गति 140 किमी/घंटा तक पहुंचने का अनुमान है।

 

आंध्र प्रदेश के इन जिलों में ‘रेड‘ और ‘ऑरेंज‘ अलर्ट जारी

चक्रवात के सीधे प्रभाव के चलते आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में मूसलाधार बारिश और तेज आंधी चलने की चेतावनी दी गई है।

  • अत्यधिक भारी बारिश वाले क्षेत्र (Extremely Heavy Rainfall): काकीनाडा, डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी और एलुरु।
  • भारी बारिश प्रभावित क्षेत्र: अनकापल्ली, विशाखापत्तनम, एनटीआर, कृष्णा, गुंटूर, बापटला और पलनाडु।

 

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समुद्र में उफान और 1.5 मीटर ऊंची तूफानी लहरें (Storm Surge)

मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि लैंडफॉल के दौरान काकीनाडा, यनम और आसपास के निचले तटीय क्षेत्रों में समुद्र की लहरें सामान्य ज्वार से 1 से 1.5 मीटर अधिक ऊंची उठ सकती हैं। इससे तटीय गांवों और निचले शहरी इलाकों में समुद्री जल घुसने तथा स्थानीय जलभराव (Waterlogging) का बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।

 

ओडिशा, तेलंगाना और अन्य पड़ोसी राज्यों पर असर

आंध्र प्रदेश में लैंडफॉल करने के बाद हालांकि यह प्रणाली धीरे-धीरे कमजोर होगी, लेकिन इसके अवशिष्ट प्रभाव (Remnants) के कारण कई पड़ोसी राज्य प्रभावित होंगे:

  • ओडिशा: दक्षिण ओडिशा के गजपति, गंजम, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं तथा मंत्रियों को सुरक्षा निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
  • तेलंगाना व छत्तीसगढ़: आंतरिक भागों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनेगी।
  • पूर्वी भारत: अवशिष्ट नमी के कारण बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी आंशिक रूप से बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।

 

प्रशासन की अलर्ट व्यवस्था और मछुआरों को निर्देश

  • समुद्र में जाने पर पूर्ण प्रतिबंध: मछुआरों को बंगाल की खाड़ी के मध्य और तटीय इलाकों में न जाने की सख्त ताकीद की गई है।
  • आपदा राहत बल मुस्तैद: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की दर्जनों टीमों को तटीय क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है।
  • निकासी शिविर: निचले और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों (Cyclone Shelters) में स्थानांतरित किया जा रहा है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. चक्रवात ‘अर्नब‘ आंध्र प्रदेश में कब लैंडफॉल करेगा?

उत्तर: IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात ‘अर्नब’ 28 अक्टूबर 2026 की दोपहर तक आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा।

Q2. तूफान के दौरान हवा की अधिकतम गति कितनी होगी?

उत्तर: लैंडफॉल के दौरान लगातार हवा की रफ्तार 115-125 किमी/घंटा और झोंकों में 140 किमी/घंटा तक रहने की आशंका है।

Q3. चक्रवात अर्नब से कौन–कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे?

उत्तर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। इसके अलावा तेलंगाना, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी बारिश का असर रहेगा।

 

प्रासंगिक लिंक्स (Relevant Links)

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Disclaimer (अस्वीकरण):

यह समाचार लेख भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी सार्वजनिक पूर्वानुमानों एवं प्रेस बुलेटिनों पर आधारित है। मौसम संबंधी स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। तटीय क्षेत्रों के नागरिक और यात्री कृपया स्थानीय प्रशासन व आधिकारिक IMD चेतावनियों का ही अंतिम रूप से अनुसरण करें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।