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भारत का स्पोर्टिंग इकोसिस्टम: जमीनी टैलेंट से ओलंपिक मेडल तक का पूरा रोडमैप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली।

छोटे कस्बों और गांवों से जमीनी प्रतिभाओं की खोज करने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच—ओलंपिक पोडियम—पर मेडल के दावेदार तैयार करने तक, भारत एक मजबूत और स्थायी स्पोर्टिंग इकोसिस्टम (Sporting Ecosystem) का निर्माण कर रहा है।

अब भारतीय खेलों का मुख्य लक्ष्य केवल इक्का-दुक्का चैंपियनों की सफलताओं का जश्न मनाना नहीं, बल्कि एक ऐसा संस्थागत ढांचा (System) तैयार करना है जो हर साल लगातार विश्वस्तरीय एथलीट तैयार कर सके। 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की भारतीय आकांक्षाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या योजनाओं में हो रहा भारी वित्तीय निवेश पदक तालिका में तब्दील हो पाएगा?

 

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व्यक्तिगत चमक से संस्थागत मजबूती की ओर

2003 में पेरिस वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान अंजू बॉबी जॉर्ज ने महिलाओं की लंबी कूद (6.70 मीटर) में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर इतिहास रचा था। वह पहला मौका था जब किसी भारतीय ने इस मंच पर पदक जीता। हालांकि, उस दौर में एथलीटों को उचित कोचिंग, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटरनेशनल एक्सपोजर जैसी सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ता था।

दो दशकों के बाद, खेलो इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) जैसी पहलों ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है।

 

खेलो इंडिया: जमीनी प्रतिभाओं को पंख देने की पहल

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भारतीय खेलों में सबसे बड़ी बाधा हमेशा टैलेंट और सही अवसर के बीच की दूरी रही है। ग्रामीण या छोटे शहरों के युवा खिलाड़ियों के पास प्रतिभा होने के बावजूद ट्रेनिंग ग्राउंड, आधुनिक उपकरण और प्रतियोगिताओं तक पहुँचने के लिए वित्तीय संसाधन नहीं होते थे।

युवा मामलों और खेल मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2026 तक देश भर में 1,067 खेलो इंडिया सेंटर (KIC) स्थापित किए जा चुके हैं। इस विशाल नेटवर्क में:

  • 267 एक्रेडिटेड अकादमियां
  • 24 खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
  • 66 SAI (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया) ट्रेनिंग सेंटर
  • 23 नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, ₹3,176 करोड़ की लागत से 349 स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है।

 

TOPS: एलीट खिलाड़ियों के लिए कस्टमाइज़्ड सपोर्ट

जहाँ खेलो इंडिया का काम खेल का आधार (Base) बढ़ाना है, वहीं 2014 में शुरू की गई TOPS (Target Olympic Podium Scheme) योजना का ध्यान एलीट स्तर के खिलाड़ियों पर केंद्रित है।

अप्रैल 2026 तक TOPS के तहत:

  • 51 कोर एथलीट
  • 52 पैरा कोर एथलीट
  • 130 डेवलपमेंट एथलीटों को सहायता दी जा रही है।

कोर ग्रुप के खिलाड़ियों को ₹50,000 प्रति माह और डेवलपमेंट ग्रुप के खिलाड़ियों को ₹25,000 प्रति माह का आउट-ऑफ-पॉकेट भत्ता दिया जाता है। नीरज चोपड़ा (टोक्यो 2020 गोल्ड, पेरिस 2024 सिल्वर), मनु भाकर (पेरिस 2024 में 2 ब्रॉन्ज़), मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन जैसे दिग्गजों की सफलता में इस कस्टमाइज़्ड सपोर्ट का प्रमुख योगदान रहा है।

 

₹36,441 करोड़ का बजट: आंकड़े और जमीनी हकीकत

31 जुलाई, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया और नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (NSF) के लिए 2026-27 से 2030-31 तक 5 वित्तीय वर्षों के लिए ₹36,441 करोड़ के कुल बजट को मंजूरी दी।

एशियन गेम्स प्रदर्शन तुलना (2014 – 2026)

वर्षआयोजन स्थलभारत का कुल मेडलप्रमुख प्रदर्शन क्षेत्र
2014इंचियोन (Incheon)57प्रारंभिक सुधार संकेत
2018जकार्ता (Jakarta)70ट्रैक एवं फील्ड में सुधार
2023हांग्जो (Hangzhou)107 (चौथा स्थान)एथलेटिक्स (29) व शूटिंग (22)
2026आइची-नागोया (Aichi-Nagoya)85निरंतरता और गहराई की आवश्यकता

 

पारंपरिक और आदिवासी खेलों का समावेश

2026 में शुरू हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के माध्यम से देश के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों से तीरंदाज़ी, एथलेटिक्स, फ़ुटबॉल, हॉकी, स्विमिंग, वेटलिफ़्टिंग और कुश्ती की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया जा रहा है। साथ ही, मल्लखंब, कलारीपयट्टू, गतका और थांग-ता जैसे पारंपरिक खेलों को मुख्यधारा में लाया जा रहा है। 2026 में बिश्केक (किर्गिस्तान) में आयोजित छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स में भारत ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी टीम भेजी।

 

2036 ओलंपिक: असली चुनौती और राह

अक्टूबर 2024 में इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) द्वारा इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) को लेटर ऑफ़ इंटेंट सौंपे जाने के बाद से 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी तेज़ हो गई है।

हालांकि, प्रशासनिक खींचतान, फेडरेशनों के अंदरूनी विवाद और चयन में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों को हल करना अभी बाकी है। 2036 का असली टेस्ट केवल स्टेडियम बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसा स्थायी सिस्टम तैयार करना है जिससे पोडियम फिनिश किसी खिलाड़ी का सिर्फ व्यक्तिगत चमत्कार न रहकर पूरे देश की सहज प्रणाली बन सके।

 

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: खेलो इंडिया योजना और TOPS में क्या अंतर है?

उत्तर: खेलो इंडिया योजना का मुख्य लक्ष्य जमीनी स्तर (Grassroots Level) पर प्रतिभाओं की पहचान करना और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना है, जबकि TOPS का ध्यान चुनिंदा एलीट एथलीटों को ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए कस्टमाइज़्ड कोचिंग और वित्तीय सहायता देना है।

Q2: सरकार ने 2026 से 2031 तक खेलों के लिए कितना बजट मंजूर किया है?

उत्तर: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026-27 से 2030-31 के वित्तीय वर्षों के लिए ₹36,441 करोड़ के कुल खर्च को मंजूरी दी है।

Q3: TOPS योजना के तहत एथलीटों को कितना जेब खर्च (Out-of-Pocket Allowance) मिलता है?

उत्तर: कोर ग्रुप के एथलीटों को ₹50,000 प्रति माह और डेवलपमेंट ग्रुप के एथलीटों को ₹25,000 प्रति माह का भत्ता दिया जाता है।

Q4: भारत ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए औपचारिक प्रक्रिया कब शुरू की?

उत्तर: भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने अक्टूबर 2024 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) को अपना औपचारिक ‘Letter of Intent’ सौंपा था।

 

Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख खेल मंत्रालय के सार्वजनिक आंकड़ों, एशियन गेम्स और ओलंपिक के आधिकारिक रिकॉर्ड्स के आधार पर विश्लेषणात्मक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। ताज़ा अपडेट और खेल समाचारों के लिए कृपया आधिकारिक सरकारी पोर्टल और मातृभूमि समाचार देखें।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।