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नेपाल में ‘बालेन युग’ की शुरुआत: केपी ओली को हराकर 35 वर्षीय बालेन शाह बने प्रधानमंत्री

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काठमांडू | शुक्रवार, 27 मार्च 2026

नेपाल के राजनीतिक इतिहास में आज एक ऐसा पन्ना लिखा गया है जिसने दशकों पुरानी स्थापित सत्ता को जड़ से हिला दिया है। 35 वर्षीय बालेंद्र शाह (बालेन शाह) ने आज नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन ‘शीतल निवास’ में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

यह केवल एक शपथ ग्रहण नहीं था, बल्कि नेपाल की सड़कों पर पिछले साल हुए ‘Gen-Z’ आंदोलन की तार्किक परिणति थी।

ऐतिहासिक बहुमत: पुरानी पार्टियों का सूपड़ा साफ

5 मार्च 2026 को हुए आम चुनावों में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने वो कर दिखाया जिसकी कल्पना राजनीतिक विश्लेषकों ने भी नहीं की थी।

  • कुल सीटें: 275 (प्रतिनिधि सभा)

  • RSP की जीत: 182 सीटें (स्पष्ट बहुमत)

  • मुख्य मुकाबला: बालेन शाह ने झापा-5 में चार बार के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को उनके अपने गढ़ में ऐतिहासिक अंतर से हराकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी धमक जमाई।

शपथ ग्रहण के भावुक और पारंपरिक पल

दोपहर 12:34 बजे शुरू हुए इस समारोह में सात शंखनादकों की ध्वनि ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। इस दौरान एक बेहद मानवीय तस्वीर सामने आई जब शपथ लेने के बाद बालेन शाह ने मंच पर मौजूद अपनी छोटी बेटी को गोद में उठा लिया। उनकी पत्नी सबीना भी इस ऐतिहासिक पल की गवाह बनीं। यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर ‘नए नेपाल’ की पहचान बनकर वायरल हो रही है।

इंजीनियरिंग से सत्ता के शिखर तक का सफर

27 अप्रैल 1990 को जन्मे बालेन शाह का सफर किसी प्रेरणादायक फिल्म जैसा है:

  1. शिक्षा: भारत की विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री।

  2. कला: नेपाल के मशहूर रैपर के रूप में युवाओं के बीच पहचान।

  3. मेयर कार्यकाल: काठमांडू के मेयर के रूप में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सख्त छवि और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार ने उन्हें ‘जनता का नेता’ बनाया।

  4. आंदोलन: 2025 के युवा आंदोलन (Gen-Z Movement) में उनकी सक्रियता ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का सबसे बड़ा दावेदार बना दिया।

भारत के लिए क्या हैं मायने?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह को कार्यभार संभालने पर बधाई दी है। बालेन शाह नेपाल के पहले मधेसी मूल के प्रधानमंत्री भी हैं, जिसका सांस्कृतिक संबंध भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों से गहरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी तकनीकी समझ और युवा विजन से भारत-नेपाल के बीच पनबिजली और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी।

चुनौतियां और उम्मीदें

भले ही बालेन शाह को भारी जनसमर्थन मिला है, लेकिन उनके सामने देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी और पुराने राजनीतिक ढांचे को बदलने की कठिन चुनौती है। नेपाल की जनता को उम्मीद है कि जो बदलाव उन्होंने काठमांडू शहर में दिखाया, वही अब पूरे देश में दिखेगा।

निष्कर्ष: नेपाल ने आज अपनी कमान एक ऐसे युवा को सौंपी है जो न केवल तकनीक का जानकार है, बल्कि जनता की नब्ज पहचानता है। यह ‘बालेन राज’ नेपाल के लिए कितना फलदायी होगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

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