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बलूचिस्तान में गहराता मानवाधिकार संकट: नागरिकों की हत्या और ‘जबरन गायब’ किए जाने की दास्तां

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क्वेटा । बुधवार, 27 मई 2026

बलूचिस्तान प्रांत से लगातार आ रही नागरिक उत्पीड़न और मानवाधिकारों के उल्लंघन की खबरें वैश्विक समुदाय के लिए गहरी चिंता का विषय बनी हुई हैं। बलूच राष्ट्रीय आंदोलन (Baloch National Movement) के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ (Paank) ने हाल ही में कुछ ऐसी दर्दनाक घटनाओं का खुलासा किया है, जिसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सैन्य एजेंसियों की कार्यप्रणाली को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।

आइए इस पूरे घटनाक्रम को गहराई से समझते हैं और फैक्ट्स के आधार पर कुछ जरूरी सुधारों (Corrections) पर भी नजर डालते हैं।

शवों का मिलना और न्यायेतर हत्याएं (Extrajudicial Killings)

‘पांक’ द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 3 मई को ग्वादर जिले के पसनी के अंतर्गत आने वाले नालेंट इलाके से दो बलूच नागरिकों के गोलियों से छलनी शव बरामद हुए। इन मृतकों की पहचान अजमल बलूच और सईद अहमद के रूप में की गई है।

  • अजमल बलूच का मामला: अजमल को पिछले साल 21 अगस्त को ग्वादर शहर से पाकिस्तान के फ्रंटियर कोर (FC) और खुफिया एजेंसियों के कर्मियों द्वारा कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था।

  • सईद अहमद का मामला: सईद अहमद को 9 दिसंबर 2025 को ग्वादर के जिवानी इलाके में स्थित उनके गृहनगर से फ्रंटियर कोर के जवानों द्वारा उठाया गया था।

महत्वपूर्ण तथ्य: सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किसी नागरिक को बिना अदालती वारंट के उठाना ‘जबरन गायब करना’ (Enforced Disappearance) कहलाता है। जब महीनों बाद उनके शव मिलते हैं, तो मानवाधिकार संगठन इसे सीधे तौर पर ‘न्यायेतर हत्या’ या हिरासत में मौत (Custodial Death) का मामला मानते हैं, जिसकी स्वतंत्र जांच होनी अनिवार्य है।

बरखान और अन्य जिलों से नए अपहरण

नागरिकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच ‘पांक’ ने यह भी उजागर किया है कि सुरक्षा बलों की यह कार्रवाई थमी नहीं है।

  • 3 मई की घटना: बरखान जिले में पाकिस्तानी सेना ने एक घर पर छापेमारी कर दो सगे भाइयों—गुलाम रसूल और अब्दुल्ला जान—को जबरन अपनी कस्टडी में ले लिया, जिसके बाद से उनका कुछ पता नहीं है।

  • अन्य नागरिक: संगठन ने अपनी रिपोर्ट में नसरात खान और जावेद बलूच के भी जबरन गायब किए जाने की कड़ी निंदा की है और उनकी सुरक्षित रिहाई की मांग की है।

बीएमसी महिला छात्रावास कांड और खदीजा बलूच के लिए प्रदर्शन

इस पूरे तनाव के बीच क्वेटा (बलूचिस्तान की राजधानी) में विरोध की आग सुलग रही है। बोलन मेडिकल कॉलेज (BMC) के बाहर छात्रों और स्थानीय नागरिकों का धरना प्रदर्शन लगातार जारी है।

क्या है मामला?

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के अनुसार, 21 अप्रैल को क्वेटा के बीएमसी महिला छात्रावास (Women’s Hostel) से खदीजा बलूच नाम की छात्रा को सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया था। तब से उनके ठिकाने की कोई खबर नहीं है।

छात्रावास जैसी सुरक्षित जगह से एक महिला छात्र का इस तरह गायब होना बलूच समाज में बेहद संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की अगुवाई में छात्र खदीजा की तुरंत और सुरक्षित रिहाई की मांग कर रहे हैं।

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