नई दिल्ली|
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे (Affidavit) में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वर्ष 2025 और 2026 में SIR से जुड़े सभी प्रमुख फैसले आयोग के तीनों चुनाव आयुक्तों की आपसी सहमति और विचार-विमर्श के बाद ही लिए गए थे।
इसके साथ ही आयोग ने उन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा निर्णय लेने का दावा किया गया था।
एकतरफा फैसलों के आरोपों को किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR की प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई निर्णय प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक और लोकतांत्रिक थी। आयोग के अनुसार:
- किसी भी प्रशासनिक या चुनावी प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों या चुनाव आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव, सवाल या आपत्तियां अंतिम निर्णय का हिस्सा नहीं होते।
- अंतिम निर्णय आयोग की निर्धारित बैठकों में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से लिया जाता है।
- SIR से जुड़ी हर प्रमुख नीतिगत प्रक्रिया में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दोनों चुनाव आयुक्त समान रूप से भागीदार थे।
हलफनामे में तीन प्रमुख आदेशों का उल्लेख
चुनाव आयोग ने कोर्ट को अवगत कराया कि SIR प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए समय-समय पर तीन मुख्य आदेश जारी किए गए थे:
- 24 जून 2025 का आदेश
- 27 अक्टूबर 2025 का आदेश
- 14 मई 2026 का आदेश
आयोग ने स्पष्ट किया कि इन तीनों आदेशों को संवैधानिक संस्था की स्थापित प्रक्रिया के तहत तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिलने के बाद ही लागू किया गया था।
Form 6 और अतिरिक्त घोषणा–पत्र (Declaration) पर स्थिति साफ
SIR विवाद के केंद्र में रहे मतदाता पंजीकरण फॉर्म (Form 6) को लेकर भी आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की:
- Form 6 में कोई बदलाव नहीं: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIR की पूरी प्रक्रिया के दौरान Form 6 के मूल स्वरूप में कोई संशोधन या फेरबदल नहीं किया गया।
- अतिरिक्त घोषणा–पत्र की भूमिका: सत्यापन हेतु इस्तेमाल किया गया घोषणा-पत्र (Declaration Form) मूल Form 6 से पूरी तरह अलग था।
- सत्यापन का उद्देश्य: इस अतिरिक्त फॉर्म का मुख्य उद्देश्य आवेदक की पहचान, उसकी पात्रता और पुराने मतदाता रिकॉर्ड्स के साथ संबंध स्थापित करना था, ताकि कोई गलत या दोहरा नाम सूची में शामिल न हो सके।
आंतरिक प्रशासनिक मतभेदों पर आयोग का जवाब
हलफनामे में जुलाई 2026 में सामने आए आंतरिक प्रशासनिक विवाद का भी जिक्र किया गया है। आयोग ने बताया कि कार्य-वितरण (Work Allocation) से जुड़े एक प्रशासनिक आदेश पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे थे। हालांकि, बाद में दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के आधार पर उस संबंधित आदेश को प्रभावी रूप से रोक दिया गया और लागू नहीं किया गया।
क्या होता है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची को पारदर्शी और सटीक बनाने की एक विशेष प्रक्रिया है। इसके तहत:
- पात्र मतदाताओं का नामांकन: 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के छूटे हुए पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में जोड़ना।
- अपात्र प्रविष्टियों को हटाना: स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित करना।
- दस्तावेजी सत्यापन: मतदाताओं के पुराने रिकॉर्ड और प्रस्तुत दस्तावेजों का गहनता से भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करना।
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बार–बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में SIR को लेकर क्या जवाब दिया?
उत्तर: चुनाव आयोग ने हलफनामे में कहा है कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े सभी प्रमुख फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे।
Q2: क्या SIR प्रक्रिया के दौरान Form 6 में कोई बदलाव किया गया था?
उत्तर: नहीं, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि Form 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया। सत्यापन के लिए जो घोषणा-पत्र लिया गया था, वह Form 6 से अलग था।
Q3: SIR का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर: SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से अपडेट करना, नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना और फर्जी या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें हटाना है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह समाचार लेख उपलब्ध प्राथमिक जानकारियों और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के मुख्य तथ्यों पर आधारित है। इस विषय पर अंतिम कानूनी निर्णय माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन रहेगा।

