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संस्मरण, रिपोर्ताज, रेखाचित्र और रोमांचक ऐतिहासिक घटनाओं से परिपूर्ण पुस्तक का लोकार्पण

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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– ‘मैं और मेरा सरदारशहर’ पुस्तक का लोकार्पण

जयपुर,26 अक्टूबर। संस्मरण, रिपोर्ताज, रेखाचित्र और रोमांचक ऐतिहासिक घटनाओं से परिपूर्ण पुस्तक ‘मैं और मेरा सरदारशहर’ का लोकार्पण लेखक से संवाद में कार्यक्रम में किया गया। सेलवास लाउंज, सिविल लाईस में आयोजित पुस्तक लोकार्पण में इस अवसर पर देशभर से आए 50 से अधिक साहित्यकारों सहित अनेक प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।

पुस्तक के लेखक विश्वनाथ तंवर ने कहा कि ‘मैं और मेरा सरदारशहर’ सरदारशहर के अतीत और वर्तमान को जोड़ने का प्रयास है। इसमें ऐतिहासिक घटनाओं के साथ उन लोगों के जीवन प्रसंग भी शामिल हैं, जिन्होंने शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र में योगदान दिया है।

लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों और सच्ची घटनाओं के समावेश से पुस्तक को संस्मरणात्मक स्वरूप मिलता है। यह कृति सरदारशहर से जुड़े पाठकों के साथ-साथ इतिहास, साहित्य और सामाजिक जीवन में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकती है।

उन्होने कहा कि पुस्तक में शहर के शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी महान विभूतियों के जीवन और योगदान को शब्दों में संजोया गया है। इसके साथ ही शहर के लिए वर्तमान समय में निष्ठा और समर्पण के साथ काम कर रहे व्यक्तित्वों के जीवन चरित्र भी शामिल किए गए हैं। पुस्तक की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को सामने लाने का प्रयास करती है।

जीवन के अनुभवों और सच्ची कहानियों का संग्रह

तंवर ने कहा कि पुस्तक की एक खास विशेषता इसमें लेखक के जीवन से जुड़े अनुभवों का समावेश है। लेखक ने अपने जीवन में देखे और महसूस किए गए प्रसंगों को संस्मरणों और सच्ची कहानियों के रूप में प्रस्तुत किया है। इन अनुभवों के माध्यम से पाठकों को जीवन के विभिन्न पहलुओं, सामाजिक परिस्थितियों और मानवीय संवेदनाओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

‘मैं और मेरा सरदारशहर’ केवल एक शहर का परिचय नहीं, बल्कि उससे जुड़ी यादों, व्यक्तित्वों, घटनाओं और सामाजिक जीवन को सहेजने का प्रयास है। इसमें अतीत की ऐतिहासिक घटनाओं के साथ वर्तमान में समाज के लिए समर्पित लोगों के योगदान को भी स्थान दिया गया है।

सरदारशहर की विरासत को सहेजने का प्रयास

कार्यक्रम के अध्यक्ष मोहनलाल डागा ने कहा कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने वाली विभूतियों के उल्लेख के माध्यम से पुस्तक सरदारशहर की पहचान और उसकी समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करती है। साथ ही, शहर के विकास और सामाजिक सरोकारों के लिए काम करने वाले लोगों के जीवन प्रसंग पाठकों को प्रेरित कर सकते हैं।

लोकार्पण समारोह में देशभर के साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों की सहभागिता ने पुस्तक के साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रुचि का विषय हो सकती है, जो सरदारशहर के इतिहास, संस्कृति, समाज और वहां की प्रमुख विभूतियों के बारे में जानना चाहते हैं।

‘मैं और मेरा सरदारशहर’ में संजोए गए संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज और सच्ची कहानियां शहर की स्मृतियों को शब्दों में सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास हैं।

पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम के अध्यक्ष मोहनलाल डागा, मुख्य अतिथि लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’, विशिष्ट अतिथि हरिवाणी,डा.आरती वर्मा, प.बालकृष्ण कोशिक,सुनिता डिसूजा, डा.विजय सिंह नाहटा रहे।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण मोनिका डागा ने दिया।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।