नई दिल्ली।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने न्यायिक प्रशासन में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पी. साम कोशी को दिल्ली हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। 26 अक्टूबर 2026 को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में कॉलेजियम सदस्य जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना भी शामिल थे।
यह सिफारिश दिल्ली हाई कोर्ट में स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व स्थापित करने के उद्देश्य से की गई है, जहाँ पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.के. उपाध्याय की सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति के बाद से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के माध्यम से कार्य संचालित किया जा रहा था।
जस्टिस पी. साम कोशी का 35 वर्षों का समृद्ध कानूनी सफर
30 अप्रैल 1967 को जन्मे जस्टिस पी. साम कोशी का कानूनी करियर उत्कृष्ट और विविध रहा है:
- वकालत की शुरुआत: उन्होंने 1990 में अपनी कानून (LL.B.) की पढ़ाई पूरी की और 9 मार्च 1991 को एक अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए।
- प्रारंभिक अनुभव: अपने शुरुआती करियर में उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (जबलपुर) और 2000 के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (बिलासपुर) में सिविल, संवैधानिक, सेवा और श्रम कानूनों से जुड़े मामलों में विशेषज्ञता हासिल की।
- सरकारी जिम्मेदारियां: छत्तीसगढ़ में उन्होंने सरकारी अधिवक्ता (Government Advocate) और डिप्टी एडवोकेट जनरल के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
- न्यायिक पदोन्नति: 16 सितंबर 2013 को उन्हें छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया और 8 मार्च 2016 को वे स्थायी न्यायाधीश बने।
- स्थानांतरण एवं वर्तमान पद: जुलाई 2023 में उनका स्थानांतरण तेलंगाना हाई कोर्ट हुआ, जहाँ वे वर्तमान में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी निभा रहे थे।
जस्टिस कोशी का हाई कोर्ट न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल अप्रैल 2029 तक है। ऐसे में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका संभावित कार्यकाल लगभग ढाई वर्ष का होगा।
चार उच्च न्यायालयों में नए मुख्य न्यायाधीशों की सिफारिश
26 अक्टूबर 2026 को हुई कॉलेजियम बैठक में देश के चार प्रमुख उच्च न्यायालयों के लिए मुख्य न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की गई:
| उच्च न्यायालय (High Court) | अनुशंसित मुख्य न्यायाधीश (Recommended Chief Justice) |
| दिल्ली हाई कोर्ट | जस्टिस पी. साम कोशी |
| गुजरात हाई कोर्ट | जस्टिस मनाश रंजन पाठक |
| तेलंगाना हाई कोर्ट | जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती |
| उत्तराखंड हाई कोर्ट | जस्टिस सुधीर सिंह |
क्या कॉलेजियम की सिफारिश ही अंतिम नियुक्ति है?
नहीं, कॉलेजियम की सिफारिश नियुक्ति प्रक्रिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रारंभिक संवैधानिक चरण है, लेकिन यह अपने आप में अंतिम नियुक्ति नहीं होती।
संवैधानिक प्रक्रिया का क्रम:
- कॉलेजियम की सिफारिश: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम नामों का चयन कर केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय को भेजता है।
- केंद्रीय समीक्षा: केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय और खुफिया एजेंसियां (IB) पृष्ठभूमि की समीक्षा करती हैं।
- राष्ट्रपति की मंजूरी: सिफारिश पर राष्ट्रपति की औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद आधिकारिक राजपत्र (Gazette Notification) में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की जाती है।
- शपथ ग्रहण: संबंधित राज्य के राज्यपाल (या दिल्ली के मामले में उपराज्यपाल/राष्ट्रपति निर्देशानुसार) नए मुख्य न्यायाधीश को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम क्या है और इसके सदस्य कौन हैं?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीशों का एक समूह है, जो उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों तथा मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले की सिफारिश करता है। इस बैठक की अध्यक्षता CJI जस्टिस सूर्यकांत ने की, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना शामिल थे।
Q2: दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल कितना होगा?
उत्तर: जस्टिस पी. साम कोशी अप्रैल 2029 में सेवानिवृत्त होंगे। यदि उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाती है, तो दिल्ली हाई कोर्ट में उनका कार्यकाल लगभग 2.5 वर्ष (ढाई वर्ष) का होगा।
Q3: कॉलेजियम ने किन–किन राज्यों के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों की सिफारिश की है?
उत्तर: कॉलेजियम ने चार उच्च न्यायालयों—दिल्ली (जस्टिस पी. साम कोशी), गुजरात (जस्टिस मनाश रंजन पाठक), तेलंगाना (जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती), और उत्तराखंड (जस्टिस सुधीर सिंह) के लिए सिफारिश की है।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रस्तावों, प्रेस विज्ञप्तियों और आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित है। कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशें संवैधानिक प्रक्रिया (केंद्र सरकार की समीक्षा और भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी) के अधीन हैं। अंतिम नियुक्ति अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी मानी जाएगी।
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