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“जब मैं स्क्रीन पर डॉक्टर का स्क्रब पहनती हूँ, तो ऐसा लगता है कि मैं अपने माता-पिता के सपने को अपने तरीके से सम्मान दे रही हूँ”: सृष्टि सिंह, यादें, सोनी सब

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, जनवरी 2026: सोनी सब अपना आने वाला मेडिकल ड्रामा ‘हुई गुम यादें- एक डॉक्टर, दो जिंदगियां’ लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह एक ऐसी कहानी है, जो जिंदगी के दूसरे मौकों को दिखाती है। यह शो डॉ. देव (इकबाल खान) की असाधारण यात्रा को दिखाता है। वह एक ऐसा आदमी है, जिसकी दुनिया रातों-रात बदल जाती है, जब याददाश्त खोने के कारण वह अपनी पहचान, रिश्तों, भावनाओं और उन फैसलों को फिर से खोजता है, जिन्होंने उसे बनाया है।

इस दुनिया के केंद्र में वाणी है, जिसका किरदार एक्ट्रेस सृष्टि सिंह ने निभाया है। वह एक ऐसी महिला है, जिसे जिंदगी के मुश्किल सबकों ने गढ़ा है। वाणी मजबूत, आत्मनिर्भर और भावनात्मक रूप से खुद को बचाने वाली है, जिसने कम उम्र में ही सीख लिया है कि भावनाओं से पहले जिंदगी बचाना जरूरी है। सृष्टि के लिए, वाणी सिर्फ एक किरदार नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा रोल है, जिसका उनसे व्यक्तिगत रूप से जुड़ाव है। एक समय बायोलॉजी की स्टूडेंट रही और जिसने डेंटल बीडीएस भी क्लियर किया था, स्क्रीन पर एक युवा रेजिडेंट डॉक्टर का किरदार निभाना उनके माता-पिता के उन्हें डॉक्टर बनते देखने के सपने को सम्मान देने जैसा लगता है।

इस रोल को व्यक्तिगत रूप से इतना खास बनाने के बारे में बात करते हुए सृष्टि सिंह बताती हैं, “मेरे माता-पिता हमेशा से चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनूँ और जो बात इस सफर को और भी खास बनाती है, वह यह है कि मैंने मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम दिया था और मुझे डेंटल- बीडीएस डिग्री हासिल करने का मौका मिला था। जिंदगी आखिरकार मुझे एक्टिंग की तरफ ले गई, लेकिन मेरे मन का एक हिस्सा हमेशा चाहता था कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे मेरे माता-पिता का सपना सच हो जाए। जब मैं स्क्रीन पर वह स्क्रब पहनती हूँ, तो मुझे लगता है कि मैं उनके उस सपने को अपने तरीके से सम्मान दे रही हूँ। वाणी के सफर में कदम रखना मेरे लिए बहुत भावनात्मक क्षण है, क्योंकि वह भी ऐसी ही लड़की है, जिसे मजबूती, महत्वाकांक्षा और सिद्धांतों ने गढ़ा है। उसके ज़रिए, मुझे एक डॉक्टर की ज़िंदगी जीने का अनुभव मिलता है, एक ऐसी जिंदगी जिसे चुनने के मैं एक बार करीब आ गई थी, और यही बात इस रोल को अविश्वसनीय रूप से पर्सनल बनाती है।”

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‘हुई गुम यादें – एक डॉक्टर, दो जिंदगियां’ देखने के लिए ट्यून करें, सोनी सब पर जल्द ही

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।