नई दिल्ली, 29 मार्च 2026 (रविवार)
आज चैत्र शुक्ल पक्ष की पावन कामदा एकादशी है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि इसे हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘कामदा’ का अर्थ है ‘कामना पूरी करने वाली’। आज के दिन भगवान विष्णु की आराधना से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि भक्तों की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आज का दिन खगोलीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। चंद्रमा कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश कर चुके हैं, जहाँ पहले से मौजूद केतु के साथ उनकी युति हो रही है। इस युति से ‘ग्रहण दोष’ जैसी स्थिति बन रही है, जो मानसिक शांति और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
📅 शुभ मुहूर्त और पारण का समय (Kamada Ekadashi 2026 Timings)
इस वर्ष एकादशी तिथि के समय को लेकर विद्वानों में मतभेद था, जिसे उदयातिथि के आधार पर स्पष्ट किया गया है:
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एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 मार्च 2026, सुबह 08:45 बजे।
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एकादशी तिथि समाप्त: 29 मार्च 2026, सुबह 07:46 बजे।
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व्रत पारण का समय (30 मार्च): सुबह 06:14 बजे से 07:09 बजे के बीच।
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 से 12:50 तक (पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ)।
🔮 राशियों पर चंद्रमा-केतु युति का प्रभाव
सिंह राशि में चंद्रमा और केतु की मौजूदगी का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग होगा:
| राशि समूह | प्रभाव का स्वरूप | विशेष सलाह |
| मेष, सिंह, धनु | आर्थिक लाभ और सफलता | आत्म-विश्वास बढ़ेगा, लेकिन अहंकार से बचें। |
| वृषभ, मिथुन, कन्या | मिश्रित फलदायी | वाणी पर संयम रखें; पुराने अटके काम पूरे हो सकते हैं। |
| कर्क, वृश्चिक, मीन | व्यस्तता और आध्यात्मिक लाभ | मानसिक तनाव संभव है; ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें। |
| तुला, मकर, कुंभ | सावधानी और धैर्य | कानूनी मामलों में सफलता मिलेगी, लेकिन निवेश में जल्दबाजी न करें। |
🛕 पूजा विधि और महत्वपूर्ण नियम
कामदा एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है:
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तुलसी पूजन: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। आज के दिन उन्हें तुलसी दल अर्पित करें, लेकिन ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है।
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पीला रंग: भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले फलों का भोग लगाएं।
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वर्जित कार्य: इस दिन चावल का सेवन वर्जित है। साथ ही तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) और नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिए।
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मंत्र साधना: चंद्रमा-केतु की युति के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी रहेगा।
💡 ज्योतिषाचार्य की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि केतु के साथ चंद्रमा का होना मन में वैराग्य या भ्रम पैदा कर सकता है। सिंह राशि सूर्य की राशि है, इसलिए आज भगवान विष्णु के साथ-साथ सूर्य देव को अर्घ्य देना भी शुभ फलदायी होगा। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और केतु का नकारात्मक प्रभाव कम होगा।
निष्कर्ष: श्रद्धा और संयम के साथ किया गया यह व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति और समृद्धि प्रदान करता है।
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