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सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामला: सुप्रीम कोर्ट ने 22 आरोपियों को बरी करने के खिलाफ नोटिस जारी किया; 92 गवाहों के मुकरने पर जताई चिंता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

नई दिल्ली।

सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में 22 आरोपियों को बरी किए जाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। इन आरोपियों में 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पीठ ने मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के 92 गवाहों के अपने बयानों से मुकरने (turning hostile) की घटना को बेहद गंभीर माना और निष्पक्ष सुनवाई से जुड़े कानूनी पहलुओं की गहन जांच की आवश्यकता पर बल दिया।

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण अवलोकन

  1. महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों की जांच: शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह मामले के सभी वृहद दस्तावेजों को तलब करने के बजाय 3 से 4 ऐसे महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों की समीक्षा करेगी, जो बरी किए जाने के फैसले के कानूनी पहलुओं को समझने के लिए अहम हैं।
  2. 92 गवाहों का मुकरना चिंता का विषय: न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि 210 में से 92 गवाहों का मुकरना एक गंभीर चिंता पैदा करता है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गवाहों का मुकरना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पूरा मुकदमा ही गैर-निष्पक्ष था; इसलिए अदालत साक्ष्यों का परीक्षण करेगी।
  3. अमित शाह से संबंधित फैसले पर रुख: सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस कार्यवाही के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पूर्व में आरोपमुक्त (Discharge) किए जाने के फैसले की समीक्षा नहीं की जाएगी। यह सुनवाई केवल 22 आरोपियों के बरी होने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका तक सीमित रहेगी।
  4. बरी करने का फैसला फिलहाल कायम: सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी करने का अर्थ केवल विपक्षी पक्षों से जवाब तलब करना है। शीर्ष अदालत ने फिलहाल बरी किए जाने के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है और न ही इसे रद्द किया है।

 

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मामले का घटनाक्रम (Timeline)

समय/दिनांकमहत्वपूर्ण घटनाक्रम
नवंबर 2005गुजरात के अहमदाबाद के पास सोहराबुद्दीन शेख की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत।
नवंबर 2005 (अंत)सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की हत्या का आरोप।
दिसंबर 2006मामले के प्रमुख गवाह और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की एक अन्य मुठभेड़ में मौत।
दिसंबर 2018मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी 22 आरोपियों को बरी किया।
मई 2026बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 आरोपियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।
सितंबर 2026सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।

 

संबंधित मीडिया व लिंक संदर्भ

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Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: सुप्रीम कोर्ट के नोटिस जारी करने का क्या मतलब है?

उत्तर: नोटिस जारी होने का मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है और विपक्षी पक्षों से उनका जवाब मांगा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि निचली अदालत का फैसला रद्द हो गया है।

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Q2: सोहराबुद्दीन मामले में कितने आरोपी बरी हुए हैं?

उत्तर: मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत और बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 22 आरोपियों को बरी किया जा चुका है, जिनमें 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं।

Q3: क्या इस सुनवाई में अमित शाह के खिलाफ लगे आरोपों की दोबारा जांच होगी?

उत्तर: नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अमित शाह को आरोपमुक्त (discharge) किए जाने वाले आदेश पर दोबारा विचार नहीं किया जाएगा।

Disclaimer

यह लेख उपलब्ध कानूनी व अदालती कार्यवाहियों के समाचारों और सार्वजनिक दस्तावेजों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों को कानूनी घटनाक्रम की निष्पक्ष व तथ्यपरक जानकारी देना है। किसी भी न्यायिक निर्णय या कानूनी स्थिति के लिए आधिकारिक अदालती आदेशों का अवलोकन करें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।