नई दिल्ली|
नेशनल टेस्ट एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं (JEE-Main, NEET-UG, CUET, UGC-NET) की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से बहस जारी थी। हाल ही में विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उठापटक के बाद, मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल पर संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने अपनी 382वीं रिपोर्ट पेश की है।
इस रिपोर्ट का शीर्षक ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार और मजबूती’ है। इसमें न केवल परीक्षा प्रणाली में सेंधमारी को रोकने के कड़े कदम सुझाए गए हैं, बल्कि परीक्षा में शामिल होने वाले 1.2 करोड़ से अधिक छात्रों के मानसिक तनाव, वित्तीय नुकसान और कोचिंग व्यवस्था से जुड़ी असमानताओं को दूर करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
आइए विस्तार से जानते हैं कि इस संसदीय रिपोर्ट में छात्रों के लिए कौन-कौन से मुख्य बदलाव और सिफारिशें प्रस्तावित की गई हैं।
NTA में संस्थागत सुधार और स्थायी कैडर
वर्तमान में NTA के स्वीकृत 39 पदों में से केवल 23 पर ही अधिकारी तैनात हैं, जिससे 41% पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा, सभी पद प्रतिनियुक्ति (deputation) के जरिए 2 से 3 साल के लिए भरे जाते हैं, जिससे दीर्घकालिक विशेषज्ञता (expertise) का अभाव रहता है।
- स्थायी पेशेवर कैडर (Permanent Professional Cadre): समिति ने परीक्षा सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स, साइकोमेट्रिक्स और लॉजिस्टिक्स के लिए एक स्थायी एक्सपर्ट कैडर बनाने की सिफारिश की है।
- समर्पित रिसर्च विंग: परीक्षा के संभावित जोखिमों का पहले से अनुमान लगाने के लिए NTA के भीतर एक डेडिकेटेड रिसर्च विंग स्थापित की जाएगी।
- राज्यों का प्रतिनिधित्व: NTA की गवर्निंग बॉडी में राज्य सरकारों और संसद के प्रति अधिक जवाबदेही तय करने का प्रस्ताव रखा गया है।
परीक्षा सुरक्षा और पारदर्शिता के कड़े मानक
NEET-UG और अन्य परीक्षाओं में आई गड़बड़ियों को देखते हुए रिपोर्ट में कई तकनीकी और प्रक्रियात्मक सुरक्षात्मक कदम सुझाए गए हैं:
- विशाल क्वेश्चन बैंक: IITs, AIIMS और IIMs जैसे प्रमुख संस्थानों के वेरिफाइड एक्सपर्ट्स के सहयोग से एक लगातार अपडेट होने वाला क्वेश्चन बैंक तैयार किया जाएगा।
- ब्लैकलिस्टेड वेंडर्स की सार्वजनिक रजिस्ट्री: गड़बड़ी में शामिल दोषी प्राइवेट कंपनियों को बैन कर उनकी सूची एक सार्वजनिक राष्ट्रीय रजिस्ट्री (National Registry) पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे भविष्य में कोई कॉन्ट्रैक्ट न पा सकें।
- सुरक्षा ऑडिट व निष्पक्ष जांच: किसी भी परीक्षा की सुरक्षा प्रक्रिया का एक स्वतंत्र बॉडी द्वारा ऑडिट किया जाएगा और जांच संबंधी सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाएगी।
छात्र कल्याण: वित्तीय मुआवजा और मानसिक स्वास्थ्य
परीक्षा रद्द या देर होने का सबसे बड़ा खामियाजा आर्थिक और मानसिक रूप से छात्रों को ही भुगतना पड़ता है। समिति ने इसे एक संस्थागत जिम्मेदारी माना है:
- प्रशासनिक रद्दीकरण पर मुआवजा: यदि प्रशासनिक विफलता के कारण परीक्षा रद्द या स्थगित होती है, तो प्रभावित छात्रों को वित्तीय मुआवजा (Financial Compensation) देने की सिफारिश की गई है।
- अतिरिक्त 15 मिनट का समय: परीक्षा देते समय हस्ताक्षर और अन्य बायोमेट्रिक फॉर्मेलिटीज के कारण छात्रों का समय बर्बाद न हो, इसके लिए अतिरिक्त 15 मिनट का प्रशासनिक समय दिया जाएगा।
- देर से आने पर राहत: जायज कारणों से कुछ मिनट देरी से पहुंचने वाले छात्रों को अंडरटेकिंग के तहत बिना अतिरिक्त समय दिए परीक्षा में बैठने की छूट पर विचार करने का सुझाव है।
- मुफ्त काउंसलिंग और हेल्पलाइन: मानसिक तनाव को कम करने के लिए एक्सपर्ट्स के माध्यम से 24×7 काउंसलिंग हेल्पलाइन सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
परीक्षा केंद्रों का आधुनिकीकरण और CBT मॉडल
निजी केंद्रों पर निर्भरता कम करने और ग्रामीण इलाकों के छात्रों को सुविधा देने के लिए कई कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं:
- 1,000 सुरक्षित सरकारी CBT सेंटर: देश भर के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर चरणबद्ध तरीके से 1,000 सुरक्षित CBT (Computer-Based Test) सेंटर बनाए जाएंगे।
- हर जिले में कम से कम एक केंद्र: छात्रों को आने-जाने और ठहरने की परेशानी से बचाने के लिए हर जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- NEET-UG के लिए CBT व नॉर्मलाइजेशन: NEET-UG को CBT मोड में बदलने का समर्थन किया गया है। मल्टी-सेशन परीक्षा आयोजित करने से पहले एक पारदर्शी और ऑडिबल नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला (Normalization Method) सार्वजनिक किया जाएगा।
- दिव्यांग (PwD) अभ्यर्थियों के लिए सुविधाएं: आसान पहुंच वाले परीक्षा केंद्र, पर्याप्त स्क्राइब (Scribe) और शिकायत निवारण की व्यवस्था की जाएगी।
कोचिंग निर्भरता और ‘इक्विटी ऑडिट’
समिति ने स्वीकार किया है कि महंगी कोचिंग व्यवस्था ने एक समानांतर पाठ्यक्रम खड़ा कर दिया है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को नुकसान होता है:
- NCERT/स्कूल सिलेबस पर आधारित प्रश्न: JEE-Main, NEET-UG और CUET के पेपर आधिकारिक स्कूल पाठ्यक्रम और वैचारिक समझ (Conceptual Understanding) पर आधारित होंगे।
- वार्षिक इक्विटी ऑडिट (Equity Audit): NTA हर साल अलग-अलग राज्यों, बोर्ड्स, भाषाओं, लिंग और सामाजिक श्रेणियों के आधार पर छात्रों की सफलता दर और कट-ऑफ का निष्पक्षता ऑडिट करेगा।
- NEET-UG के लिए दो–स्तरीय परीक्षा: योग्यता का सही मूल्यांकन करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर दो चरणों वाली (Two-Stage Examination) प्रणाली की संभावना पर विचार करने का प्रस्ताव है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या NEET-UG अब कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में होगा?
उत्तर: संसदीय समिति ने NEET-UG को चरणबद्ध तरीके से CBT (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) मोड में बदलने की सिफारिश की है। हालांकि, इसे लागू करने से पहले पारदर्शी नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया और 1,000 सरकारी सेंटर्स का निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा।
Q2. यदि परीक्षा रद्द होती है तो क्या छात्रों को मुआवजा मिलेगा?
उत्तर: हां, संसदीय समिति की सिफारिशों के अनुसार, यदि NTA या प्रशासनिक लापरवाही के कारण परीक्षा रद्द होती है, तो प्रभावित छात्रों को आर्थिक मुआवजे के साथ-साथ शिकायत निवारण की एक तय समयसीमा मिलेगी।
Q3. ‘इक्विटी ऑडिट’ (Equity Audit) क्या है?
उत्तर: इक्विटी ऑडिट के तहत NTA हर साल यह जांच करेगा कि विभिन्न बोर्ड्स, राज्यों, ग्रामीण/शहरी क्षेत्रों, लिंग और सामाजिक पृष्ठभूमि के छात्रों को परीक्षा में समान अवसर मिल पा रहे हैं या नहीं।
उपयोगी लिंक्स
- अपडेट्स के लिए पढ़ें: Matribhumi Samachar – National News
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख संसदीय स्थायी समिति द्वारा प्रस्तुत 382वीं रिपोर्ट (9 अक्टूबर 2026) के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। NTA या शिक्षा मंत्रालय द्वारा किसी भी नीतिगत बदलाव या नियम की आधिकारिक अधिसूचना के लिए संबंधित सरकारी पोर्टल का अवलोकन करें।

