नई दिल्ली।
12 और 13 अक्टूबर 2026 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भारत के अगले वाहन-उत्सर्जन नियमों—‘भारत स्टेज VII’ (BS-VII)—के लिए तीन महत्वपूर्ण ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किए। इन नियमों के तहत, 1 अप्रैल 2029 से नई कारों और SUV के लिए BS-VII मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा। इसके बाद, अप्रैल 2030 से हल्के कमर्शियल वाहनों (LCVs) तथा बसों व ट्रकों को भी इन नियमों का पालन करना होगा। यह पूरा बदलाव 2035 तक अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कागजों पर वाहनों को ‘साफ’ बनाने वाले ये मानक सड़क पर सचमुच जहरीली हवा से राहत दिला पाएंगे? आइए समझते हैं भारत में उत्सर्जन मानकों के 26 साल के सफर और BS-VII के मुख्य पहलुओं को।
‘इंडिया 2000′ से BS-VI तक का ऐतिहासिक सफर
भारत में स्वच्छ हवा की दिशा में पहला कदम 1990 के दशक के अंत में उठाया गया था, जब शहरों (खासकर दिल्ली) में गाड़ियों की बढ़ती संख्या और धुआं सार्वजनिक चिंता का विषय बन गया।
- इंडिया 2000 (Euro I): अप्रैल 1999 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अप्रैल 2000 से ‘इंडिया 2000’ मानक लागू किए गए।
- राष्ट्रीय ऑटो ईंधन नीति (2003): डॉ. आर. ए. माशेलकर समिति की सिफारिशों के आधार पर दिसंबर 2003 में यह नीति बनी, जिससे चरणबद्ध तरीके से देश भर में कड़े नियम लागू किए गए।
- BS-II, BS-III और BS-IV: 2005 में BS-II और 2010 में BS-III लागू हुआ। 2010 से 13 शहरों में शुरू हुआ BS-IV अप्रैल 2017 तक पूरे देश में अनिवार्य कर दिया गया।
- BS-VI की ऐतिहासिक छलांग (2020): जनवरी 2016 में सरकार ने BS-V को छोड़कर सीधे BS-VI पर जाने का फैसला किया। 1 अप्रैल 2020 से देश भर में केवल BS-VI वाहन बेचना और बेचना अनिवार्य कर दिया गया।
BS-IV से सीधे BS-VI: चार मुख्य कारक
दो चरणों का यह बदलाव महज साढ़े तीन साल में पूरा कर लिया गया, जिसके मुख्य कारण थे:
- ईंधन की समय से पूर्व उपलब्धता: तेल कंपनियों ने रिफाइनरियों को अपग्रेड करने में लगभग ₹35,000 करोड़ का निवेश किया और 2018-19 में ही दिल्ली-NCR में BS-VI ईंधन उपलब्ध करा दिया।
- इंजन व एग्जॉस्ट अपग्रेड: डीजल वाहनों में DPF (डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर) और SCR (सिलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन) जैसी आधुनिक तकनीकें जोड़ी गईं।
- वैश्विक तकनीक का स्थानीयकरण: अंतरराष्ट्रीय निर्माताओं और भारतीय ऑटो कंपनियों (जैसे अशोक लीलैंड, कमिंस, बॉश) ने भारतीय सड़कों के अनुसार तकनीकों को ढाला।
- अदालत का सख्त रुख: सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2020 के बाद BS-IV वाहनों की बिक्री और पंजीकरण पर पूरी तरह रोक लगा दी।
उत्सर्जन मानक और जनस्वास्थ्य
वाहनों से निकलने वाला धुआं जनस्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर एजेंसी ने डीजल के धुएं को फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण माना है।
- BS-VI का प्रभाव: BS-VI के तहत डीजल कारों में पार्टिकुलेट मैटर (PM) में 82-93% और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) में 68% की कमी आई। ICCT के अनुसार, यह बदलाव 2020 से 2050 के बीच लगभग 12 लाख (1.2 मिलियन) असमय मौतों को रोकने में सक्षम है।
- BS-VII का नया फोकस: BS-VII मानक न केवल निकास नली (Tailpipe) के धुएं को नियंत्रित करेंगे, बल्कि टायरों व ब्रेक के घिसने से उड़ने वाली धूल तथा 10 नैनोमीटर तक के अति–सूक्ष्म कणों पर भी निगरानी रखेंगे। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी के टिकाऊपन (Durability) के नियम भी तय किए जाएंगे।
चुनौतियाँ और आगे की राह
नियम लागू होने के बावजूद सड़क पर असर दिखने में समय लगता है, क्योंकि:
- पुराने वाहन: सड़क पर चल रहे पुराने, ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहन नए नियमों के दायरे में तुरंत नहीं आते।
- NCAP फंड का उपयोग: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) का एक बड़ा हिस्सा अभी भी पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाया है, और परिवहन प्रदूषण से निपटने में इसका केवल छोटा हिस्सा खर्च हुआ है।
- कार्यान्वयन और परीक्षण: वाहनों का वास्तविक ड्राइविंग (Real-World Driving) प्रदर्शन लैब टेस्ट से भिन्न हो सकता है।
अपडेट्स के लिए आप मातृभूमि समाचार (Matribhumi Samachar) पर विजिट कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. BS-VII (भारत स्टेज VII) नियम भारत में कब से लागू होंगे?उत्तर: MoRTH के ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार, नई कारों और SUV के लिए 1 अप्रैल 2029 से, जबकि हल्के कमर्शियल वाहनों, बसों और ट्रकों के लिए अप्रैल 2030 से BS-VII लागू करने का प्रस्ताव है।
Q2. क्या BS-VII लागू होने पर मेरी मौजूदा BS-IV या BS-VI कार पर असर पड़ेगा?उत्तर: नहीं, नए उत्सर्जन मानक केवल नए निर्मित होने वाले वाहनों पर लागू होते हैं। आपके पास पहले से मौजूद वाहनों के रजिस्ट्रेशन और संचालन पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
Q3. क्या BS-VII के लिए नया पेट्रोल या डीजल खरीदना होगा?उत्तर: नहीं, BS-VII मानकों के लिए नए फ्यूल ग्रेड (ईंधन प्रकार) की आवश्यकता पड़ने की उम्मीद नहीं है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है। नियमों की अंतिम घोषणा और समय–सीमा में सरकारी दिशा–निर्देशों के अनुसार बदलाव संभव है।

