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इजरायल चुनाव: नेतन्याहू आगे पर बहुमत से दूर, अरब पार्टियां बनीं ‘किंगमेकर’; जानिए सरकार गठन का पूरा समीकरण

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

यरूशलेम।

इजरायल के 120 सदस्यीय नेसेट (संसद) के लिए हाल ही में आयोजित चुनावों की आंशिक मतगणना के परिणाम सामने आ चुके हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला दक्षिणपंथी गठबंधन मतगणना में सबसे आगे चल रहा है, लेकिन 61 सीटों के जादुई बहुमत के आंकड़े से अभी भी दूर है।

वर्ष 2023 के हमास हमले और उसके बाद के क्षेत्रीय संघर्षों के बाद हुए इन पहले राष्ट्रीय चुनावों ने देश में राजनीतिक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। एग्जिट पोल और शुरुआती रुझानों में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत न मिलने से अब छोटे दलों और अरब राजनीतिक मोर्चों की भूमिका निर्णायक हो गई है।

 

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चुनावी रुझानों का मुख्य समीकरण

28 अक्टूबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नेसेट की 120 सीटों का रुझान इस प्रकार नजर आ रहा है:

राजनीतिक ब्लॉक / गठबंधनसंभावित सीटेंस्थिति
नेतन्याहू गठबंधन (दाएं/दक्षिणपंथी)~54 सीटेंसबसे बड़ा ब्लॉक, बहुमत से 7 सीटें दूर
आइजेनकोट गठबंधन (विपक्ष)~49 सीटेंदूसरा बड़ा ब्लॉक
अरब पार्टियां (Joint List & Ra’am)~17 सीटेंनिर्णायक भूमिका (‘किंगमेकर’)
बहुमत के लिए आवश्यक61 सीटेंकिसी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं

नेतन्याहू का गठबंधन सबसे बड़ा ब्लॉक बनकर उभर रहा है। हालांकि पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन भी कड़ी टक्कर दे रहा है।

 

अरब दल बने निर्णायक मोड़

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चुनावों में अरब राजनीतिक दलों के मजबूत प्रदर्शन (~17 सीटें) ने समीकरण को काफी जटिल बना दिया है। यदि अंतिम परिणाम इसी रूप में रहते हैं, तो सरकार गठन में उनकी भूमिका बेहद अहम होगी।

  • नेतन्याहू की चुनौती: नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने का हमेशा विरोध किया है।
  • आइजेनकोट का संकट: विपक्ष के सामने विविध विचारधारा वाले दलों और अरब समूहों को एक मंच पर लाकर 61 का आंकड़ा जुटाने की बड़ी चुनौती है।

 

सरकार गठन का अगला कदम: 42 दिनों की समयसीमा

अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग प्रक्रिया शुरू करेंगे:

  1. परामर्श प्रक्रिया: राष्ट्रपति नेसेट के सभी विजेता दलों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श करेंगे।
  2. जनादेश सौंपना: सरकार बनाने की सबसे अधिक संभावना रखने वाले सांसद को आमंत्रित किया जाएगा।
  3. समयसीमा: नामित नेता को शुरुआत में 28 दिन का समय मिलेगा। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति इसे 14 दिन अतिरिक्त बढ़ा सकते हैं (कुल अधिकतम 42 दिन)।
  4. विफलता की स्थिति: यदि पहला प्रयास विफल होता है, तो दूसरे उम्मीदवार को मौका दिया जाएगा। यदि कोई भी 61 सीटों का आंकड़ा नहीं जुटा पाता, तो नेसेट भंग कर दोबारा चुनाव कराने पड़ेंगे।

 

आगे के 4 संभावित राजनीतिक परिदृश्य

  1. नेतन्याहू का गठबंधन: नेतन्याहू छोटे/स्वतंत्र दलों या अति-दक्षिणपंथी गुटों को जोड़कर 61 का आंकड़ा जुटा लें।
  2. आइजेनकोट का वैकल्पिक ब्लॉक: विपक्ष अन्य दलों को मिलाकर एक साझा सरकार तैयार करे।
  3. अल्पमत सरकार: किसी मुख्य गठबंधन को अरब दलों या अन्य गुटों का बाहरी समर्थन मिले।
  4. फिर से नए चुनाव: गठबंधन वार्ताएं पूरी तरह विफल होने की सूरत में देश फिर से मतदान की ओर बढ़े।

जब तक नई सरकार का गठन नहीं होता, तब तक बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: इजरायल की संसद (नेसेट) में बहुमत के लिए कितनी सीटों की आवश्यकता होती है?A: इजरायल की संसद ‘नेसेट’ में कुल 120 सीटें हैं, और सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा 61 सीटें है।

Q2: नामांकित प्रधानमंत्री को सरकार बनाने के लिए कितना समय मिलता है?A: नामांकित नेता को गठबंधन बनाने के लिए शुरुआत में 28 दिन मिलते हैं। राष्ट्रपति आवश्यकता पड़ने पर इसे 14 दिन और बढ़ा सकते हैं, जिससे अधिकतम 42 दिन का समय मिलता है।

Q3: यदि कोई भी गठबंधन बहुमत हासिल करने में सफल नहीं होता तो क्या होगा?A: यदि सभी प्रयास विफल रहते हैं, तो संसद (नेसेट) भंग कर दी जाती है और इजरायल में फिर से नए चुनाव कराने की नौबत आती है।

 

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार लेख आंशिक मतगणना और शुरुआती रुझानों पर आधारित है। अंतिम परिणाम घोषित होने तक आंकड़ों और सीटों के समीकरण में बदलाव संभव है। यह सामग्री केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की गई है।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।