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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: लखनऊ KGMU परिसर की 6 मजारें घोषित हुईं अवैध, जल्द चलेगा बुलडोजर

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लखनऊ । शुक्रवार, 29 मई 2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद संवेदनशील और बड़ी खबर सामने आई है। लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) परिसर के भीतर बनी 6 मजारों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरी तरह से ‘अवैध’ और ‘लावारिस’ घोषित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और गाइडलाइंस के कड़े अनुपालन के तहत की गई इस आंतरिक जांच के बाद अब इन अवैध ढांचों को ढहाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की संस्तुति (सिफारिश) भेजी गई है।

इस पूरी जांच प्रक्रिया में कैंपस के अंदर मौजूद कुल 8 मजारों की पड़ताल की गई, जिनमें से केवल 2 मजारों को ही वैध पाया गया है। बाकी 6 मजारों के पक्ष में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया फैसला

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों में महिला स्वास्थ्यकर्मियों तथा मरीजों की सुरक्षा को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसी आदेश के अनुपालन और सुरक्षा ऑडिट के तहत केजीएमयू परिसर में बने इन ढांचों की जांच शुरू की गई थी।

जांच में सामने आया कि ये मजारें अस्पताल परिसर के भीतर मरीजों, डॉक्टरों और तीमारदारों के आवागमन मार्ग (रास्ते) में बनी हुई हैं, जिससे अस्पताल के रोजमर्रा के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था में बाधा उत्पन्न हो रही थी। मजारों में इस्तेमाल की गई आधुनिक ईंटों, टाइल्स और अन्य निर्माण सामग्री के आधार पर यह पूरी तरह साफ हो गया है कि इनका निर्माण पिछले कुछ सालों के भीतर ही अतिक्रमण के रूप में किया गया है।

तीन बार जारी किया गया अल्टीमेटम, नहीं मिला कोई ठोस जवाब

केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, प्रशासन ने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए मजार के कथित प्रबंधकों और जिम्मेदारों को अपनी बात रखने के पर्याप्त मौके दिए। इसके तहत कुल तीन बार नोटिस जारी किए गए:

  1. पहला नोटिस: 22 जनवरी 2026

  2. दूसरा नोटिस: 9 फरवरी 2026

  3. तीसरा नोटिस: 4 अप्रैल 2026

नोटिस के जरिए मजारों से जुड़े लोगों को यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार के समक्ष उपस्थित होकर जमीन के मालिकाना हक या निर्माण से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। तय तारीखों पर विश्वविद्यालय द्वारा नामित अधिकारी तो मुस्तैद रहे, लेकिन मजारों की तरफ से कोई भी संतोषजनक जवाब या आधिकारिक कागजात लेकर नहीं आया। इसके बाद प्रशासन ने इन सभी 6 मजारों पर ‘लावारिस’ और ‘अवैध’ होने का ठप्पा लगा दिया।

कौन सी मजारें हैं वैध और किन पर चलेगा बुलडोजर?

विश्वविद्यालय की जांच समिति ने स्पष्ट किया है कि केजीएमयू परिसर में ऐतिहासिक रूप से स्थित ‘शाहमीना साहब की दरगाह’ और ‘हरमैन साहब की मजार’ को पूरी तरह वैध पाया गया है, क्योंकि इनसे जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं। इनके अलावा क्वीन मैरी अस्पताल, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, न्यू बॉयज हॉस्टल, रेस्पिरेटरी मेडिसिन और शताब्दी फेज-2 जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा ब्लॉकों के पास पिछले कुछ वर्षों में बनाई गईं 6 अन्य मजारों को पूरी तरह से अवैध माना गया है।

उत्तर प्रदेश शासन को भेजी गई रिपोर्ट, फोर्स मिलते ही शुरू होगा एक्शन

केजीएमयू प्रशासन ने अवैध मजारों को हटाने के लिए एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार को सौंप दी है। इसके साथ ही आगे की दंडात्मक और ध्वस्तीकरण कार्रवाई (बुलडोजर एक्शन) के लिए उत्तर प्रदेश शासन को भी पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर से इन अवैध धार्मिक ढांचों को पूरी तरह हटाने के लिए राज्य सरकार से अंतिम सहमति और प्रशासनिक सुरक्षा सहयोग मांगा है। केजीएमयू प्रबंधन का कहना है कि जैसे ही स्थानीय प्रशासन की ओर से पर्याप्त पुलिस बल (Police Force) और प्रशासनिक अधिकारी उपलब्ध करा दिए जाएंगे, परिसर की सुरक्षा और यातायात को दुरुस्त करने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

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