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कुशा कपिला ने अपनी पहली इंस्टाग्राम सीरीज़ ‘लिखे जो ख़त तुझे’ का किया ऐलान, शीबा चड्ढा के साथ दिखेंगी एक अनोखी कहानी में

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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“यह कहानी खुद तक वापस लौटने की है, जो दो अनजान लोगों के बीच बने एक अप्रत्याशित रिश्ते के ज़रिए सामने आती है”: कुशा कपिला

मुंबई, सितम्बर, 2026: अभिनेत्री, कंटेंट क्रिएटर और उद्यमी कुशा कपिला डिजिटल कहानी कहने के एक नए फॉर्मेट की ओर कदम बढ़ा रही हैं। कुशा अपनी पहली इंस्टाग्राम सीरीज़ ‘लिखे जो ख़त तुझे’ लेकर आ रही हैं, जिसमें वे दिग्गज अभिनेत्री शीबा चड्ढा के साथ स्क्रीन साझा करती नज़र आएँगी। यह सीरीज़ जल्द ही रिलीज़ होगी और मानवीय रिश्तों, भावनात्मक जुड़ाव, उपचार और खुद को दोबारा खोजने की कहानी को सामने रखेगी। कुशा की इंस्टाग्राम पोस्ट में भी इस सीरीज़ को दो ऐसी महिलाओं की कहानी बताया गया है, जो एक-दूसरे के माध्यम से खुद तक वापस लौटने का रास्ता खोजती हैं।

‘लिखे जो ख़त तुझे’ एक तुलसीया ओरिजिनल है, जिसे नम्रता वाधवानी ने लिखा और बनाया है, जबकि इसका निर्देशन राशी प्रिया नाहटा ने किया है। सीरीज़ को तुलसीया और वर्सिस एंटरटेनमेंट ने निर्मित किया है, वहीं मूनवॉक मोशन पिक्चर्स इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। एयरबीएनबी इस प्रोजेक्ट के साथ लोकेशन पार्टनर के तौर पर जुड़ा है। सीरीज़ को कुशा के ब्रांड अंडरनीथ द्वारा प्रायोजित किया गया है।

दो महिलाओं की कहानी, एक अनजाना रिश्ता
14 एपिसोड्स की यह सीरीज़ दो ऐसी महिलाओं की कहानी है, जिनकी ज़िंदगियाँ एक अप्रत्याशित पत्राचार के माध्यम से आपस में जुड़ जाती हैं। कहानी तब शुरू होती है, जब एक महिला अपने पुराने दोस्त के नाम एक ख़त भेजने की कोशिश करती है, लेकिन वह ख़त गलती से उसी घर में रहने वाली दूसरी महिला तक पहुँच जाता है।
यहीं से शुरू होता है एक ऐसा रिश्ता, जिसकी शुरुआत भले ही एक गलती से होती है, लेकिन धीरे-धीरे दोनों महिलाओं की ज़िंदगी में एक महत्वपूर्ण जगह बना लेता है।

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कुशा अनिशा का किरदार निभा रही हैं, जो मुंबई की एक युवा महिला है और अपने टूटे हुए रिश्ते के बाद पैदा हुए भावनात्मक संघर्षों से जूझ रही है। वहीं, शीबा चड्ढा चारु के किरदार में दिखाई देंगी, जो लखनऊ में रहने वाली एक विधवा महिला हैं और अपने निजी दु:खों तथा ज़िंदगी में आए बदलावों से जूझ रही हैं।

दोनों की परिस्थितियाँ और उनकी दुनिया एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, लेकिन उनके बीच होने वाला पत्राचार धीरे-धीरे एक भावनात्मक पुल का काम करता है। दोनों एक-दूसरे के लिए सहारा बनती हैं, अपने अतीत और व्यक्तिगत परेशानियों का सामना करती हैं और इसी प्रक्रिया में खुद को नए सिरे से समझने लगती हैं।

इस कहानी में दोनों के घर भी अहम् भूमिका निभाते हैं। एयरबीएनबी के साथ साझेदारी में तैयार किए गए ये स्थान सिर्फ कहानी की पृष्ठभूमि नहीं हैं, बल्कि दोनों किरदारों की अलग-अलग दुनिया और उनकी भावनात्मक यात्रा को भी दर्शाते हैं।

कुशा कपिला के लिए नया कहानी कहने का अनुभव
‘लिखे जो ख़त तुझे’ कुशा के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि यह इंस्टाग्राम पर लंबे फॉर्मेट की कहानी कहने की दिशा में उनका पहला कदम है। इससे पहले वह ‘व्यर्थ’ जैसी शॉर्ट फिल्म में अभिनय और निर्माण दोनों भूमिकाओं में नज़र आ चुकी हैं, जिसकी कहानी मनोरंजन उद्योग में टाइपकास्टिंग और एक अभिनेत्री के संघर्ष के इर्द-गिर्द थी।
अब ‘लिखे जो ख़त तुझे’ के साथ कुशा एक अलग तरह की भावनात्मक और किरदार-केंद्रित कहानी का हिस्सा बनी हैं।

अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए, कुशा कपिला कहती हैं, “लिखे जो ख़त तुझे पर काम करना मेरे लिए एक बेहद खास अनुभव रहा है और इंस्टाग्राम पर कहानी कहने के इस फॉर्मेट को एक्सप्लोर करना मेरे लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। शीबा जी जैसी अभिनेत्री के साथ काम करना अपने आप में एक मास्टरक्लास रहा है। उनके अनुभव की व्यापकता को देखना और हर फ्रेम में उनकी सहजता और भावनात्मक गहराई को महसूस करना मेरे लिए सीखने वाला अनुभव रहा।”

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वे आगे कहती हैं, “यह सीरीज़ हमारे लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि यह उन दो महिलाओं की कहानी है, जो अपनी-अपनी ज़िंदगी की उथल-पुथल के बीच एक-दूसरे का सहारा बनती हैं। यह कहानी खुद तक वापस लौटने की है, जो सबसे अप्रत्याशित रिश्तों के ज़रिए सामने आती है।”

इंस्टाग्राम पर लंबे फॉर्मेट की कहानी की ओर कदम
सोशल मीडिया पर आमतौर पर छोटे और तेज़ कंटेंट के बीच ‘लिखे जो ख़त तुझे’ किरदारों, रिश्तों और भावनात्मक यात्रा को विस्तार देने वाले लंबे फॉर्मेट की ओर एक कदम है। सीरीज़ यह भी दर्शाती है कि इंस्टाग्राम जैसे सोशल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर कहानी कहने का दायरा सिर्फ शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट तक ही सीमित नहीं है।
कुशा और शीबा की जोड़ी के साथ ‘लिखे जो ख़त तुझे’ दो अलग-अलग ज़िंदगियों के बीच बने उस रिश्ते को सामने लाती है, जिसकी शुरुआत एक गलती से होती है, लेकिन जो धीरे-धीरे दोनों के लिए आत्म-खोज और भावनात्मक उपचार की यात्रा बन जाता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।