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आज के संकटों के लिए कल का मंच: क्या 81 साल पुराना संयुक्त राष्ट्र 2026 की दुनिया को संभाल सकता है?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
7 Min Read

नई दिल्ली।

1945 के द्वितीय विश्व युद्ध के खंडहरों से उपजा संयुक्त राष्ट्र (UN) अपने अस्तित्व के 81 साल पूरे कर चुका है। लेकिन आज जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है, तब संयुक्त राष्ट्र शांति बहाल करने में असहाय और ठप नज़र आ रहा है। 1945 के दौर की सुरक्षा परिषद (UNSC) की संरचना और पांच स्थायी सदस्यों (P5: अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) के पास मौजूद वीटो (Veto) अधिकार ने इस ऐतिहासिक संस्था को एक गतिरोध के जाल में फंसा दिया है।

हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौर को “व्यवस्थाओं के बीच की दुनिया” (world between orders) करार दिया था। भारत, जो दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश और प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था है, लगातार मांग कर रहा है कि संयुक्त राष्ट्र को आज के दौर के अनुकूल और समावेशी बनाया जाए।

 

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वीटो पावर (Veto Power) और P5 देशों का गतिरोध

1945 के सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में युद्ध के विजेताओं ने सुरक्षा परिषद की स्थायी सीटें अपने पास रखीं और एक-दूसरे को वीटो का अधिकार दिया। इसका मकसद बड़ी ताकतों को जोड़े रखना था, लेकिन इसने एक ऐसा ढांचा तैयार किया जहाँ वीटो शक्तियाँ अंतर्राष्ट्रीय नियमों से ऊपर हो गईं।

  • रूस–यूक्रेन संकट: जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो उसने अपने खिलाफ ही सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया।
  • गाजा संकट: अमेरिका ने बार-बार वीटो का इस्तेमाल कर अपनी सहयोगी नीति के तहत युद्धविराम प्रस्तावों को रोका।
  • अमेरिका–ईरान तनाव: खाड़ी क्षेत्र में हालिया सैन्य संघर्षों और प्रतिबंधों के मुद्दे पर चीन और रूस ने वीटो का सहारा लेकर प्रस्तावों को निष्प्रभावी कर दिया।

यह दोहरा मापदंड इस बात को साबित करता है कि UNSC तब तक काम करती है जब तक बड़ी ताकतों के हित आपस में न टकराएं।

 

भारत और वैश्विक दक्षिण (Global South) का असमान प्रतिनिधित्व

1965 में अस्थायी सदस्यों की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 करने के अलावा UNSC में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

  • भारत का पक्ष: भारत ने विश्व शांति में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। 1950 से अब तक 2,00,000 से अधिक भारतीय शांति सैनिक UN अभियानों में योगदान दे चुके हैं। विशाल जनसंख्या और आर्थिक क्षमता के बावजूद भारत के पास स्थायी सीट नहीं है।
  • अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की उपेक्षा: 2025 में सुरक्षा परिषद के ‘अध्याय VII’ के तहत पारित अधिकांश प्रस्ताव अफ्रीका से संबंधित थे, फिर भी UNSC में अफ्रीका या लैटिन अमेरिका का कोई स्थायी प्रतिनिधि नहीं है।

 

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सुधार की राह में मुख्य बाधाएँ

UNSC में सुधार आसान नहीं है, जिसके पीछे निम्नलिखित तीन प्रमुख कारण हैं:

  1. अनुच्छेद 108 (Article 108): संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन के लिए महासभा के दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ सभी पांच P5 देशों की सहमति अनिवार्य है। यानी P5 के पास सुधारों को भी वीटो करने की शक्ति है।
  2. आपसी गुटबाजी:
    • G4 समूह (भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान): ये देश परस्पर स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं।
    • Uniting for Consensus (इटली, पाकिस्तान, मेक्सिको आदि): यह समूह नई स्थायी सीटों का विरोध करता है और केवल अस्थायी सीटों के विस्तार की वकालत करता है।
    • एज़ुलविनी कंसेंसस (अफ्रीकी संघ): वीटो अधिकार के साथ कम से कम दो स्थायी सीटों की मांग करता है।

3. क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता: चीन लगातार भारत और जापान के दावे का विरोध करता है, जबकि क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी एक-दूसरे के दावों को खारिज करते हैं।

 

एक सार्थक सुधार योजना के 4 मुख्य स्तम्भ

यदि संयुक्त राष्ट्र को अपनी प्रासंगिकता बचाए रखनी है, तो उसे निम्नलिखित चार मोर्चों पर काम करना होगा:

  • सीटों का विस्तार: एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिले।
  • वीटो पर प्रतिबंध: नरसंहार, युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के मामलों में वीटो के प्रयोग को निलंबित किया जाए।
  • पारदर्शिता: निर्णय लेने की प्रक्रिया में गैर-स्थायी सदस्यों की भागीदारी बढ़ाई जाए।
  • वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार: ब्रेटन वुड्स संस्थाओं (IMF, विश्व बैंक) में विकासशील देशों को अधिक अधिकार दिए जाएं।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQ)

Q1: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में P5 देश कौन–कौन से हैं?

उत्तर: P5 देश अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस हैं। इनके पास सुरक्षा परिषद के किसी भी फैसले को रोकने के लिए वीटो पावर (Veto Power) का अधिकार है।

Q2: भारत UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग क्यों कर रहा है?

उत्तर: भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और UN शांति अभियानों में सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा है। भारत का मानना है कि UNSC का मौजूदा ढांचा आधुनिक भू-राजनीतिक सच्चाई का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

Q3: G4 समूह क्या है?

उत्तर: G4 भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान का एक समूह है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के विस्तार के लिए एक-दूसरे के दावे का समर्थन करते हैं।

Q4: वीटो पावर (Veto Power) क्या होती है?

उत्तर: वीटो एक विशेष अधिकार है जिसके तहत P5 देशों में से कोई भी एक देश सुरक्षा परिषद के किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को अकेले खारिज कर सकता है, भले ही बाकी सभी 14 सदस्य उसके समर्थन में हों।

 

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख अंतर्राष्ट्रीय मामलों और विश्लेषणात्मक संदर्भों पर आधारित एक सूचनात्मक रिपोर्ट है। लेख में व्यक्त किए गए विचार वैश्विक घटनाओं और राजनयिक वार्ताओं के विश्लेषण पर आधारित हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।