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कैलाश खेर की ‘जोगी’ यात्रा: बद्रीनाथ धाम में गूँजा ‘नारायण’ का जाप, भक्ति में डूबे श्रद्धालु

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

देहरादून | गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

पद्मश्री कैलाश खेर की हालिया आध्यात्मिक यात्रा और उनके नए एल्बम ‘जोगी’ ने भक्ति संगीत की दुनिया में एक नई लहर पैदा कर दी है। ऋषिकेश की पावन गंगा आरती से लेकर बद्रीनाथ धाम की बर्फीली वादियों तक, सिंगर का ‘नारायण जाप’ हर किसी को मंत्रमुग्ध कर रहा है।

आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर बद्रीनाथ धाम

बीते बुधवार को प्रसिद्ध सूफी और भक्ति गायक कैलाश खेर भगवान बद्रीविशाल के दर्शन करने पहुंचे। कड़ाके की ठंड और ऊँचाई के बावजूद सिंगर का जोश देखते ही बनता था। पीले वस्त्रों और माथे पर तुलसी की माला धारण किए कैलाश खेर ने मंदिर परिसर में “श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि” का जाप शुरू किया, तो वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु भी उनके साथ झूम उठे। सिंगर ने बताया कि बद्रीनाथ धाम आकर उन्हें एक अदभुत आध्यात्मिक शांति और नई ऊर्जा का अनुभव होता है।

‘जोगी’ एल्बम: आदि शंकराचार्य को संगीतमय वंदना

कैलाश खेर का नया एल्बम ‘जोगी’ इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यह एल्बम केवल संगीत नहीं, बल्कि भारतीय ऋषियों की तपश्चर्या और आदि शंकराचार्य के दिव्य जीवन का एक संगीतमय वंदन है। इस गीत के माध्यम से सिंगर ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि भारत की आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति अडिग है। इसके म्यूजिक वीडियो में शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठों और भारत के धर्म पुनर्जागरण की झलक दिखाई गई है।

ऋषिकेश से शुरू हुआ भक्ति का सफर

इस यात्रा की शुरुआत ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन से हुई, जहाँ गंगा तट पर स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में एल्बम का भव्य विमोचन हुआ। इसके बाद कैलाश खेर ने गंगा आरती में भी भाग लिया और अपनी बुलंद आवाज से पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया।

मुख्य बातें:

  • कैलाश खेर ने बद्रीनाथ धाम के सिंहद्वार पर भक्तों के साथ किया भजन-कीर्तन।

  • नया एल्बम ‘जोगी’ आदि शंकराचार्य और सनातन धर्म की अमर चेतना को समर्पित है।

  • एल्बम का विमोचन ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानंद सरस्वती द्वारा किया गया।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।