लोड हो रहा है...

आईएसबी और मैक्स इंडिया फाउंडेशन ने भारत में सीनियर केयर पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए शुरू की ‘स्केल’ पहल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
7 Min Read

स्केल पहल रिसर्च और इंडस्ट्री के अनुभव को साथ लाकर रिसर्च पर आधारित बेहतर केयर मॉडल, बेहतर फैसले लेने और भारत में बुजुर्गों की बढ़ती जरूरतों के लिए बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधान तैयार करने में मदद करेगी

मोहाली, सितंबर, 2026: इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (एमआईएचएम) और मैक्स इंडिया फाउंडेशन (एमआईएफ) साथ मिलकर स्केल (सीनियर केयर एडवांसमेंट थ्रू लर्निंग एंड एविडेंस / SCALE) पहल कर रहे हैं। एमआईएफ की मल्टी-ईयर सीएसआर ग्रांट से समर्थित यह पहल रिसर्च और जानकारी के जरिए भारत में तेजी से बढ़ रही बुजुर्गों की संख्या के लिए बेहतर केयर मॉडल तैयार करने में मदद करेगी।

भारत में ऐसी सीनियर केयर सेवाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है, जो आसानी से उपलब्ध हों, जरूरत के मुताबिक हों और लंबे समय तक चल सकें। सीनियर लिविंग, हेल्थकेयर, एजटेक, फाइनेंसिंग और इंश्योरेंस जैसे क्षेत्रों में इंडस्ट्री और एक्सपर्ट्स अपने अनुभव और नए प्रयोगों के जरिए कई तरह की जानकारी तैयार कर रहे हैं। हालाँकि, यह जानकारी अलग-अलग जगहों पर बंटी हुई है। स्केल पहल इसी कमी को दूर करने की कोशिश करेगी। इसके तहत रिसर्च के जरिए एविडेंस तैयार किया जाएगा और उसे ऐसे इनसाइट्स में बदला जाएगा, जो इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और पॉलिसीमेकर्स को बेहतर फैसले लेने में मदद कर सकें। पहल में कंज्यूमर बिहेवियर, वर्कफोर्स पार्टिसिपेशन, सोशल इंक्लूजन, ऑपरेटिंग और केयर डिलीवरी मॉडल्स व उनकी फाइनेंसिंग और टेक्नोलॉजी अपनाने जैसे विषयों पर फोकस किया जाएगा। अंतरा सीनियर केयर इस पहल की फाउंडिंग इंडस्ट्री पार्टनर होगी और सीनियर केयर सेक्टर के साथ स्केल की भागीदारी को मजबूत करने में सहयोग करेगी।

इस पहल से जुड़े एमओयू का आदान-प्रदान तारा सिंह वचानी, मैनेजिंग ट्रस्टी, मैक्स इंडिया फाउंडेशन और एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन, अंतरा सीनियर केयर और डीन मदन पिल्लुतला के बीच किया गया। इस मौके पर रजित मेहता, एमडी, मैक्स इंडिया लिमिटेड और सीईओ, अंतरा सीनियर केयर; ईशान खन्ना, सीईओ, अंतरा असिस्टेड केयर सर्विसेस; सारंग देव, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट, आईएसबी; कार्तिक बालकृष्णन, डिप्टी डीन- फैकल्टी एंड रिसर्च, आईएसबी; और डीएनवी कुमार गुरु, सीनियर डायरेक्टर- एडवांसमेंट, एलुमनी एंगेजमेंट एंड एक्सटर्नल रिलेशंस, आईएसबी उपस्थित रहे।

- Advertisement -

आईएसबी के हैदराबाद कैंपस में स्टेकहोल्डर राउंडटेबल के साथ शुरू की गई स्केल पहल में रिसर्चर्स, सीनियर केयर इंडस्ट्री से जुड़े लोग और क्लिनिशियंस एक साथ काम करेंगे। इसका उद्देश्य बुजुर्गों की बदलती केयर जरूरतों को समझना और जरूरी क्षेत्रों में आगे की कार्रवाई के लिए प्राथमिकताएँ तय करना है। यह पहल इंडस्ट्री की वास्तविक चुनौतियों को रिसर्च से जोड़ेगी, जिससे सर्विस डिजाइन, ऑपरेटिंग मॉडल, टेक्नोलॉजी अपनाने, वर्कफोर्स प्लानिंग, इन्वेस्टमेंट और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में बेहतर फैसले लेने में मदद मिल सके।

प्रोफेसर सारंग देव, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट, आईएसबी, ने कहा, “भारत ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, यहाँ बुजुर्गों की बढ़ती आबादी की जरूरतों और उम्मीदों के चलते हमें यह फिर से सोचना होगा कि उनके लिए सिस्टम, सर्विसेस और मार्केट्स को किस तरह तैयार किया जाए। स्केल इस चुनौती को मैनेजमेंट और रिसर्च पर आधारित नजरिए से देखता है। इसमें फाइनेंसिंग, टेक्नोलॉजी, वर्कफोर्स पार्टिसिपेशन, कंज्यूमर और प्रोड्यूसर बिहेवियर और सोशल इंक्लूजन जैसे क्षेत्रों में बिजनेस, हेल्थकेयर ऑर्गेनाइजेशंस और पब्लिक इंस्टीट्यूशंस की भूमिका को समझा जाएगा। स्केल के माध्यम से हमारा उद्देश्य एक मजबूत एविडेंस बेस तैयार करना है, जो प्राइवेट सेक्टर की प्रैक्टिस और पब्लिक पॉलिसी, दोनों को बेहतर बनाने में मदद कर सके और भारत में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के लिए ज्यादा प्रभावी और स्थायी समाधान तैयार किए जा सकें।”

तारा सिंह वचानी, मैनेजिंग ट्रस्टी, मैक्स इंडिया फाउंडेशन, ने कहा, “भारत में जनसंख्या में हो रहे बदलाव हमारे लिए यह समझने का एक अवसर है कि सीनियर्स किस तरह ज्यादा स्वस्थ, आत्मनिर्भर और बेहतर जीवन जी सकते हैं। लोगों की उम्र बढ़ने के साथ सीनियर्स स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता, जीवन में उद्देश्य, सम्मान और अपनी पसंद को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। उनकी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए उनकी अलग-अलग जरूरतों और अनुभवों को बेहतर तरीके से समझना जरूरी है। स्केल पहल रिसर्च, प्रैक्टिशनर्स के अनुभव और अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स की राय को साथ लाकर बढ़ती उम्र और केयर से जुड़े रिसर्च बेस को मजबूत करेगी। हमारा उद्देश्य इस जानकारी को बेहतर केयर मॉडल, मजबूत सपोर्ट सिस्टम और सीनियर्स व उनके परिवारों के लिए बेहतर परिणामों में बदलना है। इस पहल के माध्यम से हम इस व्यापक राष्ट्रीय चर्चा में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि भारत बढ़ती उम्र वाली आबादी से जुड़े अवसरों और चुनौतियों के लिए किस तरह तैयार हो सकता है और उनका सामना कर सकता है।”

मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (एमआईएचएम), आईएसबी में स्केल एक लंबे समय तक चलने वाले रिसर्च और इंडस्ट्री एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। इसके तहत रिसर्च कोलेबरेशन, डेटा पार्टनरशिप, पायलट प्रोजेक्ट्स, इवैल्यूएशन और नॉलेज एक्सचेंज को बढ़ावा दिया जाएगा। समय के साथ इसका उद्देश्य इंडस्ट्री लेवल पर ऐसा रिसर्च बेस तैयार करना है, जो ऑर्गेनाइजेशंस को नए तरीके अपनाने, बदलती कंज्यूमर जरूरतों को समझने, बिजनेस और इन्वेस्टमेंट से जुड़े बेहतर फैसले लेने, वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी मजबूत करने और प्रभावी तरीकों को बड़े स्तर पर लागू करने में मदद कर सके।

इस पहल में अंतरा सीनियर केयर के अनुभव का भी लाभ लिया जाएगा। कंपनी ने सीनियर लिविंग, केयर होम्स और सर्विसेस, वेलनेस और क्रॉनिक डिसीज मैनेजमेंट से जुड़े प्रोडक्ट्स और सॉल्यूशंस के जरिए केयर का एक इंटीग्रेटेड मॉडल तैयार किया है। इससे सीनियर्स और उनके परिवारों की बदलती जरूरतों को समझने और उनके लिए बेहतर समाधान तैयार करने में वास्तविक अनुभव और जानकारी मिलेगी। यह अनुभव एमआईएचएम की हेल्थकेयर रिसर्च एक्सपर्टीज और आईएसबी की उन कोशिशों को भी मजबूत करेगा, जिनके माध्यम से महत्वपूर्ण सामाजिक चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर रिसर्च, नॉलेज और पार्टनरशिप को बढ़ावा दिया जा रहा है।

- Advertisement -

Featured Article

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।