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आजमगढ़ शंभूपुर पुजारी हत्याकांड: अस्थि कलश लेकर DM कार्यालय पहुंचे परिजन, ₹1 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

आजमगढ़ ।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र स्थित शंभूपुर गांव में हुए दर्दनाक पुजारी हत्याकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। 22 सितंबर को अनुष्ठान के दौरान हुई गोलीबारी की वारदात के बाद बुधवार, 30 सितंबर को मृतक पुजारियों के परिजन अपने हाथों में अस्थि कलश लेकर जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पहुंचे और परिसर में धरना दिया।

पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी प्रमुख मांगें रखीं और सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की।

 

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अस्थि कलश के साथ दिया धरना, बयां किया आर्थिक संकट

धरना दे रहे परिजनों का कहना है कि पूजा-पाठ के जरिए परिवार का भरण-पोषण करने वाले मुख्य कमाने वाले सदस्यों की असमय मृत्यु के बाद उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार के भविष्य और बच्चों की परवरिश को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। परिजनों ने स्पष्ट कहा कि जब तक सरकार की ओर से ठोस और स्थायी आर्थिक मदद की घोषणा नहीं होती, उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

परिजनों की प्रमुख मांगें:

  1. प्रति पीड़ित परिवार ₹1 करोड़ का मुआवजा: दोनों मृतक पुजारियों के आश्रितों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
  2. सरकारी नौकरी: प्रत्येक मृतक परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।

क्या थी 22 सितंबर की शंभूपुर वारदात?

22 सितंबर को शंभूपुर गांव में एक घर में महामृत्युंजय अनुष्ठान और पूजा-पाठ का आयोजन चल रहा था। इसी दौरान आपसी विवाद में आरोपी अरविंद सिंह ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस दिल दहला देने वाली घटना में पूजा करा रहे दो पुरोहितों (अखिलेश मिश्रा और महेंद्र पाठक) तथा आरोपी की पत्नी व बेटे की गोली लगने से मौत हो गई।

वारदात के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मुख्य आरोपी अरविंद सिंह भी एनकाउंटर में मारा गया। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और तनावपूर्ण सन्नाटा पसरा हुआ है।

 

प्रशासन से आश्वासन और आगे का रुख

जिलाधिकारी कार्यालय पर ज्ञापन लेने पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिजनों की पीड़ा सुनी और उन्हें नियमानुसार संभव सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। प्रशासन का कहना है कि शासन स्तर से संचालित योजनाओं का लाभ तुरंत दिलाया जाएगा और परिजनों द्वारा सौंपी गई मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रेषित किया जा रहा है।

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फिलहाल, पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

 

FAQs (बार–बार पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में घटना कब और क्या हुई थी?

Ans: यह घटना 22 सितंबर को अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुई थी, जहां धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विवाद में गोलीबारी हुई जिसमें दो पुजारियों समेत लोग मारे गए।

Q2: मृतक पुजारियों के परिजनों की मुख्य मांगें क्या हैं?

Ans: परिजन प्रति मृतक परिवार ₹1 करोड़ का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे हैं।

Q3: 30 सितंबर को परिजनों ने कहां प्रदर्शन किया?

Ans: परिजन अस्थि कलश लेकर आजमगढ़ के जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पहुंचे और वहां अपनी मांगों को लेकर धरना दिया।

 

Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख उपलब्ध प्राथमिक समाचार रिपोर्टों और प्रशासनिक ज्ञापनों पर आधारित सूचनात्मक विवरण है। घटना से जुड़ी कानूनी कार्रवाई और मुआवजे पर अंतिम फैसला उत्तर प्रदेश सरकार एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लिया जाना है।

(संबंधित और विस्तृत समाचार कवरेज के लिए Matribhumi Samachar पर विजिट करें।)

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।