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“शाहरुख खान का सपना था, समुद्र के सामने एक शानदार बंगला हो”, अनिल कपूर ने याद किया ‘मन्नत’ खरीदने का किस्सा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई, अक्टूबर, 2026: “हर बड़े सपने की शुरुआत एक छोटी-सी ख्वाहिश से होती है।” स्टार प्लस के ‘इंडिया के टॉप 1%’ में बड़ी रकम जीतने की बातें अक्सर उन सपनों तक पहुँच जाती हैं, जिन्हें पूरा करने की उम्मीद लेकर प्रतियोगी शो में आते हैं। खेल के बीच अनिल कपूर उनसे उनकी ज़िंदगी, परिवार और ख्वाहिशों के बारे में बात करते हैं। इन बातचीतों में कभी उनकी अपनी यादें ताज़ा हो जाती हैं, तो कभी बॉलीवुड के दोस्तों से जुड़े दिलचस्प किस्से सामने आते हैं। आने वाले एपिसोड में भी कुछ ऐसा ही होगा, जब अनिल एक प्रतियोगी से पूछेंगे कि यदि वे एक करोड़ रुपए जीत गईं, तो उनका क्या करेंगी। प्रतियोगी की मुंबई में ‘मन्नत’ जैसा समुद्र के किनारे घर खरीदने की ख्वाहिश सुनकर उन्हें अपने करीबी दोस्त शाहरुख खान का सपना याद आ जाता है। अनिल बताते हैं कि कैसे उन्होंने शाहरुख को यह सपना पूरा करते देखा। साथ ही, वे इस बंगले से अपना एक खास जुड़ाव भी साझा करते हैं। शाहरुख का घर बनने से पहले अनिल ने इसी जगह अपनी फिल्म ‘तेज़ाब’ की शूटिंग की थी।

शाहरुख से अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए, अनिल कपूर ने कहा, “शाहरुख साहब और मैं कई सालों से बहुत अच्छे दोस्त हैं। मैं ‘बेनाम बादशाह’ की शूटिंग कर रहा था, तब वे मुझसे मिलने आए थे। जब मैंने उन्हें देखा और उनकी आँखों में देखा, तो मुझे लगा कि वे बहुत बड़े स्टार बनेंगे। वहीं से हमारी जान-पहचान हुई और वक्त के साथ हमारी दोस्ती गहरी होती गई।”

शाहरुख के सपने का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने आगे कहा, “हम अक्सर कार्टर रोड पर मिलते थे, जहाँ उनका एक फ्लैट था। उनका भी सपना था कि समुद्र के सामने एक शानदार बंगला हो और उन्होंने वह सपना पूरा किया। मुझे याद है, उन्होंने मेरे सामने ही ‘मन्नत’ खरीदा था। उनके वहाँ रहने आने से पहले मैंने भी उसी बंगले में ‘तेज़ाब’ की शूटिंग की थी।”

देखिए ‘इंडिया के टॉप 1%’, हर शनिवार और रविवार रात 8 बजे, स्टार प्लस और जियोहॉटस्टार पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।