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KCR को जुबली हिल्स पुलिस का नोटिस: CrPC धारा 160 का हवाला, एरावली निवास पर पूछताछ की पेशकश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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केसीआर बीआरएस अध्यक्ष पुलिस नोटिस जवाब

हैदराबाद. तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने जुबली हिल्स पुलिस द्वारा जारी नोटिस का औपचारिक और कानूनी जवाब दे दिया है। यह नोटिस अपराध संख्या 243/2024 से संबंधित जांच के तहत जारी किया गया था, जिसमें एसीपी पी. वेंकटगिरी ने उन्हें 30 जनवरी 2026 को दोपहर 3:00 बजे पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

जांच में सहयोग का भरोसा, लेकिन पुलिस स्टेशन जाने में असमर्थता

केसीआर ने अपने जवाब में साफ किया है कि वे जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में पुलिस स्टेशन पहुंच पाना संभव नहीं है। दरअसल, इस समय तेलंगाना में नगर पालिका और नगर निगम चुनाव 2026 की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और 30 जनवरी नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है।

BRS कार्यों का दिया हवाला

भारत राष्ट्र समिति (BRS) प्रमुख के अनुसार, वे पार्टी उम्मीदवारों को बी-फॉर्म (B-Form) और अधिकृत प्राधिकरण पत्र जारी करने जैसे अहम संगठनात्मक कार्यों में व्यस्त हैं। ऐसे में तय समय पर पुलिस के समक्ष उपस्थित होना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया है कि उनकी सुविधा के अनुसार वैकल्पिक तिथि तय की जाए।

CrPC धारा 160 का उल्लेख

केसीआर ने अपने पत्र में सीआरपीसी (CrPC) की धारा 160 का हवाला देते हुए कहा कि कानून के अनुसार 65 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाने के बजाय उसके निवास स्थान पर पूछताछ की जानी चाहिए।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि जांच अधिकारी उनसे सिद्दीपेट जिले के मरकूक मंडल स्थित एरावली निवास (H.No. 3-96) पर आकर पूछताछ कर सकते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में सभी नोटिस इसी पते पर भेजे जाएं

कानून के सम्मान की दोहराई बात

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक और संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति के नाते वे कानून का पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच टीम को हर संभव सहयोग दिया जाएगा, बशर्ते प्रक्रिया संवैधानिक और कानूनी दायरे में हो।

अब पुलिस का अगला कदम क्या होगा?

अब सबकी नजरें हैदराबाद पुलिस के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि पुलिस केसीआर की कानूनी दलीलों को स्वीकार कर एरावली स्थित फार्महाउस पर पूछताछ करती है या फिर किसी नई तारीख के साथ नया नोटिस जारी किया जाता है।

यह मामला सिर्फ एक जांच नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीति, कानून और नागरिक अधिकारों से जुड़ा अहम विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में पुलिस का रुख और जांच की दिशा तेलंगाना की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकती है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।