नई दिल्ली|
13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक घटना दर्ज हुई। अपने 29 साल के इतिहास में पहली बार, बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी–सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (BIMSTEC) के सदस्य देशों के पुलिस, सीमा और आंतरिक सुरक्षा मंत्रियों ने एक मंच पर आकर सुरक्षा चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इस पहली बिम्सटेक गृह मंत्री स्तरीय बैठक में ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को अपनाया गया और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पांच ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब बंगाल की खाड़ी में चीन की सैन्य व आर्थिक उपस्थिति और बांग्लादेश के साथ उसके संबंध एक नए रणनीतिक समीकरण को जन्म दे रहे हैं।
तीन दशकों का इंतजार और सुरक्षा सहयोग का नया अध्याय
1997 में स्थापित, बिम्सटेक मुख्य रूप से एक आर्थिक और तकनीकी मंच के रूप में कार्य करता रहा है। हालांकि, 2018 के काठमांडू शिखर सम्मेलन और अप्रैल 2025 में बैंकॉक की 20वीं मंत्री स्तरीय बैठक के बाद गृह मंत्रियों के स्तर पर वार्ता का मार्ग प्रशस्त हुआ। आठ साल के लंबे विचार-विमर्श के बाद आखिरकार अक्टूबर 2026 में यह बैठक संपन्न हुई।
यह बैठक तीन मुख्य कारणों से बेहद महत्वपूर्ण है:
- राजनीतिक आधार (Engine): यह बिम्सटेक को सुरक्षा सहयोग के लिए एक मजबूत राजनीतिक शक्ति प्रदान करती है।
- अपराधिक नेटवर्क पर हमला: यह केवल अपराधियों को ही नहीं, बल्कि सीमा पार अपराधों को पोषण देने वाले वित्तीय तंत्र और फंडिंग नेटवर्क पर प्रहार करती है।
- सामरिक संतुलन: बंगाल की खाड़ी में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच यह क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
सुरक्षा के पांच मुख्य स्तंभ
इस ऐतिहासिक बैठक में पांच प्रमुख क्षेत्रों पर सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते किए गए:
- मानव तस्करी पर रोक: विशेष रूप से म्यांमार सीमा के निकट साइबर घोटालों और ऑनलाइन धोखाधड़ी में धकेले जा रहे मानव तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा।
- नशीले पदार्थों का नियंत्रण: ‘गोल्डन ट्राएंगल’ (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) से होने वाली सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी और बंगाल की खाड़ी के समुद्री मार्गों पर कड़ी निगरानी।
- मनी लॉन्ड्रिंग का खात्मा: हवाला नेटवर्क और गलत इनवॉइसिंग (Trade Misinvoicing) के माध्यम से अवैध धन को वैध बनाने की गतिविधियों को रोकना।
- आतंकवाद की फंडिंग (Terror Financing) पर लगाम: क्रिप्टो और अन्य माध्यमों से उग्रवादी समूहों को मिलने वाली वित्तीय सहायता को पूरी तरह ब्लॉक करना।
- अवैध वित्तीय प्रवाह पर नियंत्रण: सीमा पार अपराध तंत्र को आर्थिक रूप से कमजोर बनाना।
बंगाल की खाड़ी में भू–राजनीतिक चुनौतियां और ‘चीन’ का कारक
बंगाल की खाड़ी दुनिया की लगभग 20% आबादी का घर है और मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों का केंद्र है।
हाल के वर्षों में, बांग्लादेश और चीन के बीच प्रगाढ़ होते रक्षा और आर्थिक संबंध (जैसे ‘चीन-बांग्लादेश-म्यांमार आर्थिक गलियारा’ – CBMEC और मोंगला पोर्ट का विकास) भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय रहे हैं। इसके बावजूद, बांग्लादेश ने इस बहुपक्षीय सुरक्षा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। यह दर्शाता है कि आपसी राजनीतिक तनावों के बावजूद, सीमा पार अपराधों से निपटने के लिए बिम्सटेक जैसा बहुपक्षीय मंच अत्यंत आवश्यक है।
बिम्सटेक से आसियान (ASEAN) तक सुरक्षा का विस्तार
बिम्सटेक के दो सदस्य—थाईलैंड और म्यांमार—आसियान (ASEAN) के भी सदस्य हैं। नई दिल्ली बैठक के बाद भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा आसियान साझेदारों के साथ आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञता साझा करने की इच्छा जाहिर करना यह दर्शाता है कि भारत सुरक्षा सहयोग का दायरा बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़ाकर दक्षिण चीन सागर तक ले जाना चाहता है।
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│ BIMSTEC और ASEAN का जुड़ाव │
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│ │ BIMSTEC (7) │ म्यांमार │ ASEAN (11) │ │
│ │ भारत, भूटान, नेपाल,│ एवं │ इंडोनेशिया, मलेशिया, │ │
│ │ श्रीलंका, बांग्लादेश│ थाईलैंड │ फिलीपींस, सिंगापुर, │ │
│ └─────────┬─────────┘ (उभयनिष्ठ) │ वियतनाम आदि │ │
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│ └──────────────┬──────────────────┘ │
│ ▼ │
│ क्षेत्रीय सुरक्षा एवं आतंकवाद-रोधी │
│ विशेषज्ञता का विस्तार │
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आगे की राह
‘दिल्ली घोषणापत्र’ सुरक्षा की दिशा में एक ठोस नींव है। हालांकि, सदस्य देशों की अलग-अलग कानूनी प्रणालियाँ, प्रत्यर्पण (Extradition) में होने वाली देरी और बिम्सटेक सचिवालय में संसाधनों की कमी जैसी व्यावहारिक चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।
यदि ये सात देश संयुक्त जांच, तेजी से सूचना साझा करने और वित्तीय खातों को फ्रीज करने जैसी जमीनी कार्रवाइयों को अंजाम देते हैं, तो बंगाल की खाड़ी वास्तव में एक सुरक्षित, जुड़ा हुआ और समृद्ध क्षेत्र बन सकेगी।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. BIMSTEC का पूरा नाम क्या है और इसमें कौन से देश शामिल हैं?
उत्तर: BIMSTEC का पूरा नाम ‘बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी–सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) है। इसके 7 सदस्य देश हैं: भारत, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड।
Q2. BIMSTEC गृह मंत्रियों की पहली बैठक कहाँ और कब आयोजित की गई?
उत्तर: यह पहली बैठक 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली, भारत में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की।
Q3. ‘दिल्ली घोषणापत्र’ (Delhi Declaration) की मुख्य बातें क्या हैं?
उत्तर: दिल्ली घोषणापत्र के तहत सदस्य देशों ने मानव तस्करी, नशीले पदार्थों के नियंत्रण, मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग और अवैध वित्तीय प्रवाह को रोकने के लिए आपसी सहयोग, प्रत्यर्पण, क्षमता निर्माण और जानकारी साझा करने पर सहमति जताई।
Q4. बिम्सटेक सुरक्षा ढांचा भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: SAARC के निष्क्रिय होने के बाद बिम्सटेक भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों का मुख्य स्तंभ है। यह बंगाल की खाड़ी में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और सीमा पार अपराधों पर रोक लगाने में मदद करता है।
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