नई दिल्ली।
चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों और उसके व्यापारिक बेड़ों की आड़ में सैन्य जासूसी के वैश्विक चिंताओं ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। अमेरिका में चाइना ओशन शिपिंग कंपनी (COSCO) पर लगे जासूसी के ताजा आरोपों ने दुनिया भर के सुरक्षा विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भारत के लिए यह कोई नया खतरा नहीं है, लेकिन वाशिंगटन की ताजा कार्रवाई ने हिंद महासागर (Indian Ocean) में रणनीतिक सतर्कता की जरूरत को और अधिक रेखांकित कर दिया है।
अमेरिका में COSCO जहाजों पर क्यों बढ़ी सख्ती?
1 सितंबर 2026 को रॉयटर्स की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अमेरिकी प्रशासन को COSCO के आम मालवाहक जहाजों पर सैन्य संचार (Military Communications) को इंटरसेप्ट करने वाले छिपे हुए उपकरण लगे होने का शक है।
इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी रिपब्लिकन सांसदों ने होमलैंड सिक्योरिटी को पत्र लिखकर COSCO जहाजों की कड़े निरीक्षण की मांग की। यूएस कोस्ट गार्ड (US Coast Guard) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन जहाजों के विशेष निरीक्षण छूट (‘Qualship 21’ स्टेटस) की समीक्षा के आदेश दिए। इससे पहले सितंबर 2024 की रिपोर्ट में यह सामने आया था कि अमेरिकी बंदरगाहों पर मौजूद 80% शिप-टू-शोर क्रेन चीनी कंपनियों के हैं, जहां खुफिया जानकारी जुटाने वाले उपकरण पाए गए थे।
भारत के लिए COSCO विवाद के रणनीतिक मायने
चीन अपनी मिलिट्री–सिविल फ्यूजन (Military-Civil Fusion) नीति के तहत कमर्शियल कंपनियों को सैन्य व सामरिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करता है। COSCO पेंटागन की धारा 1260H के तहत पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) से जुड़ी चीनी सैन्य कंपनियों की सूची में शामिल है।
भारत के लिए, जिसका अधिकतर व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, यह स्थिति बेहद संवेदनशील है:
- हार्बर इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी: व्यापारिक जहाजों और पोर्ट टर्मिनलों के जरिए भारतीय बंदरगाहों और नौसैनिक ठिकानों की गोपनीय जानकारी जुटाई जा सकती है।
- नौसैनिक हलचलों की मैपिंग: भारतीय नौसेना की युद्धपोतों और पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सकती है।
भारत की ‘रोक और जांच’ रणनीति
भारत ने किसी एक कंपनी पर सीधे बैन लगाने के बजाय सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) और कठोर निवेश नीतियों का इस्तेमाल किया है:
- सुरक्षा मंजूरी से बेदखली: 2017 में सिक्किम (डोकलम) स्टैंडऑफ के समय भारत ने जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) के पास मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक प्रोजेक्ट से चीनी रेलवे कंसोर्टियम को सुरक्षा कारणों से बाहर कर दिया था।
- प्रेस नोट 3 (अप्रैल 2020): भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले सभी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य की गई, जिससे चीनी पूंजी के भारतीय रणनीतिक बुनियादी ढांचे में प्रवेश पर प्रभावी रोक लगी।
हिंद महासागर में चीन के रिसर्च जहाजों की चुनौती
समस्या सिर्फ मालवाहक जहाजों तक सीमित नहीं है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के अनुसार, हिंद महासागर में चीन के करीब 64 रिसर्च और सर्वे जहाज सक्रिय हैं, जिनमें से 80% का संबंध सीधे चीनी सेना (PLA) से है।
- युआन वांग 5 और शी यान 6: श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर रुकने वाले इन जहाजों ने कई बार अपने ट्रांसपोंडर (AIS) बंद करके भारत के पूर्वी तट और मिसाइल परीक्षण रेंजों के पास सर्वेक्षण किया है।
- सीबेड मैपिंग: समुद्र तल का नक्शा तैयार करने की यह गतिविधि चीनी पनडुब्बियों के छिपने और आवाजाही के रास्ते तैयार करने में मदद करती है।
भारत का बहुस्तरीय सुरक्षा और निगरानी नेटवर्क
चीन के इस रणनीतिक घेराव का जवाब देने के लिए भारत ने अपना समुद्री सुरक्षा ढांचा मजबूत किया है:
| क्षेत्र | भारतीय नौसेना व सरकार की पहल |
| सूचना केंद्र (IFC-IOR) | गुरुग्राम स्थित ‘इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर’ 20+ देशों के साथ रियल-टाइम समुद्री डेटा साझा करता है। |
| हवाई गश्त | 12 P-8I पोसीडॉन निगरानी विमान और 15 MQ-9B ‘सी गार्जियन’ सी-ड्रोन का बेड़ा। |
| रणनीतिक चौकियां | अंडमान और निकोबार कमान के जरिए मलक्का जलडमरूमध्य के मुहाने पर कड़ी निगरानी; कारवार में ‘प्रोजेक्ट सीबर्ड’ का विस्तार। |
| कूटनीतिक दबाव | भारत के कूटनीतिक प्रयासों के चलते श्रीलंका ने जनवरी 2024 से विदेशी शोध जहाजों के आगमन पर 1 साल का प्रतिबंध लागू किया। |
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. COSCO क्या है और अमेरिका में इसे लेकर विवाद क्यों है?
उत्तर: COSCO (China Ocean Shipping Company) चीन की सरकारी शिपिंग कंपनी है। अमेरिका को शक है कि इसके व्यापारी जहाजों में जासूसी उपकरण लगे हैं जो सैन्य संचार को इंटरसेप्ट कर सकते हैं।
Q2. चीन की मिलिट्री–सिविल फ्यूजन नीति क्या है?
उत्तर: यह चीन की एक राष्ट्रीय रणनीति है जिसके तहत नागरिक व व्यावसायिक संसाधनों, कंपनियों और तकनीकों का उपयोग चीनी सेना (PLA) के रणनीतिक और सैन्य हितों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
Q3. भारत ने चीनी कंपनियों को अपने बंदरगाहों से दूर रखने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: भारत ने सुरक्षा क्लीयरेंस कड़े किए हैं और अप्रैल 2020 में ‘प्रेस नोट 3’ लागू किया, जिसके तहत सीमा साझा करने वाले देशों के निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य है।
Q4. IFC-IOR क्या है और यह समुद्री सुरक्षा में कैसे मदद करता है?
उत्तर: IFC-IOR (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region) गुरुग्राम में स्थित एक केंद्र है, जो 20 से अधिक साझेदार देशों के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही का रियल-टाइम डेटा साझा करता है।
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों, रणनीतिक विश्लेषणों और आधिकारिक रक्षा घटनाक्रमों के अध्ययन पर आधारित है। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक विषयों पर विशुद्ध रूप से विश्लेषणात्मक जानकारी प्रदान करना है।
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