लोड हो रहा है...

तमिलनाडु में फिर गरमाया ‘सनातन’ पर विवाद: उदयनिधि के बाद TVK विधायक मुस्तफा के बिगड़े बोल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चेन्नई । गुरुवार, 14 मई 2026

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर ‘सनातन धर्म’ के उन्मूलन को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। द्रमुक (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा विधानसभा में अपनी विवादित टिप्पणी दोहराने के ठीक दो दिन बाद, तमिलनाडु मुस्लिम लीग (TNML) के संस्थापक और तमिलगा वेट्टी कलगम (TVK) के विधायक वी.एम.एस. मुस्तफा ने आग में घी डालने का काम किया है।

मुस्तफा का बयान और मदुरै का महत्व

मदुरै सेंट्रल से नवनिर्वाचित विधायक मुस्तफा ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान स्पष्ट कहा, “हमारी पार्टी का जन्म ही सनातन धर्म को समाप्त करने के लिए हुआ है। हम पेरियार और आंबेडकर की विचारधारा को मानने वाले लोग हैं और सनातन के खात्मे के लिए मैदान में डटे रहेंगे।”

यह बयान विशेष रूप से संवेदनशील इसलिए है क्योंकि मुस्तफा उस मदुरै सेंट्रल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहाँ हिंदुओं का विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी अम्मन मंदिर स्थित है। स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने इसे करोड़ों भक्तों की आस्था का अपमान बताया है।

विधानसभा में उदयनिधि की हुंकार और विजय का समर्थन

विवाद की कड़ी 12 मई 2026 से जुड़ी है, जब विधानसभा सत्र के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने विपक्ष के नेता के रूप में अपने संबोधन में कहा कि “सनातन धर्म लोगों को बाँटता है, इसलिए इसे समाप्त करना ही विकल्प है।” चौंकाने वाली बात यह रही कि इस दौरान मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (थलापति विजय) न केवल वहां मौजूद थे, बल्कि उन्होंने उदयनिधि के संबोधन के बाद उनका गर्मजोशी से अभिवादन भी किया।

भाजपा का पलटवार: ‘हिंदू धर्म कोई पंचिंग बैग नहीं’

इस बयानबाजी पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से चेतावनी दी कि तुष्टीकरण की राजनीति के लिए हिंदू धर्म को निशाना बनाना बंद किया जाए। उन्होंने कहा:

“ये लोग याद रखें कि हिंदू धर्म कोई पंचिंग बैग नहीं है। वोट बैंक के लिए सनातन धर्म को खत्म करने की बात करना इनके पतन की शुरुआत होगी।”

तथ्य जाँच 

  • राजनीतिक गठबंधन: मुस्तफा की पार्टी TNML ने चुनाव में जोसेफ विजय की TVK के साथ गठबंधन किया था, जिसके कारण वह TVK के चुनाव चिह्न पर जीते।

  • विचारधारा: मुस्तफा ने अपने बयान में ‘सामाजिक न्याय’ का हवाला दिया है, जिसे वे सनातन के विरोध से जोड़ रहे हैं।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।