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कानपुर अनाज मंडी: मांग निकलने से गेहूं और चना के दाम मजबूत, दलहन बाजार में तेजी बरकरार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर । मंगलवार, 26 मई 2026

उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक, कानपुर की थोक अनाज मंडी में आज अनाज और दलहन की कीमतों में शानदार मजबूती देखने को मिली है। स्थानीय स्तर पर मजबूत मांग और सीमित आवक के चलते गेहूं, चना और अरहर जैसी मुख्य फसलों के भाव ऊंचे स्तर पर टिके हुए हैं। दूसरी ओर, मोटे अनाजों (मक्का और बाजरा) के बाजार में एक सीमित दायरे में कारोबार देखा गया।

मंडी के जानकारों और व्यापारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यदि मौसम में कोई बड़ा बदलाव होता है या नई फसलों की आवक (Supply) बढ़ती है, तो कीमतों में कुछ संशोधन (Corrections) देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल बाजार का रुख पूरी तरह से लिवालों (Buyers) के पक्ष में नजर आ रहा है।

विभिन्न फसलों के ताजा मंडी भाव (₹ प्रति क्विंटल)

नीचे दी गई तालिका में कानपुर की कलेक्ट्रागंज और नौबस्ता जैसी प्रमुख मंडियों के ताजा भावों को व्यवस्थित किया गया है:

फसल का नामवैरायटी / गुणवत्तान्यूनतम भाव (₹)अधिकतम भाव (₹)औसत भाव (₹)
गेहूंगेहूं (दड़ा)2,6002,625—
आर.आर. 21 (RR 21)2,7002,750—
फार्म गेहूं (Premium)2,8002,850—
मोटा अनाजजौ (Barley)2,4002,500—
ज्वार2,1002,150—
बाजरा1,8001,900—
मक्का (Maize)1,7002,000—
चावलऔसत वैरायटी——3,328
दलहन (Pulses)चना (सामान्य)5,5005,600—
चना (बेहतर क्वालिटी)—6,473—
अरहर (Tuwar)7,1007,200—
तिलहन (Oilseeds)सरसों (Mustard)——6,845
अलसी (Flaxseed)6,0007,000—

महत्वपूर्ण तथ्य

  • मांग और आपूर्ति का गणित: इस समय बाजार में अच्छी और सूखी गुणवत्ता वाले अनाज की मांग सबसे ज्यादा है। चूंकि मंडियों में इस स्तर के माल की आवक अभी नियंत्रित है, इसलिए कीमतों को लगातार सपोर्ट मिल रहा है।

  • संभावित गिरावट: थोक व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान भाव अपने ऊपरी स्तर के आसपास हैं। यदि आगामी दिनों में गोदामों से स्टॉक बाहर आता है या मौसम साफ रहने से ग्रामीण इलाकों से मंडियों में आवक अचानक तेज होती है, तो कीमतों में ₹50 से ₹100 प्रति क्विंटल तक का तकनीकी सुधार (Correction) देखा जा सकता है। इसलिए छोटे व्यापारियों और किसानों को बाजार की आवक पर पैनी नजर रखनी चाहिए।

नोट: थोक मंडी के भाव पूरी तरह से मांग, माल की नमी (Quality) और दैनिक आवक पर निर्भर करते हैं, इसलिए एक ही दिन में कई बार इनमें आंशिक बदलाव संभव है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।