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लागू हुए एम्बुलेंस सेवा के नए नियम, इमरजेंसी कॉल के 20 मिनट में पहुंचना होगा; जानें एनएएस गाइडलाइन की बड़ी बातें

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली । मंगलवार, 30 जून 2026

भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे देश में आपातकालीन चिकित्सा सेवा (Emergency Medical Services) को लेकर एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने पूरे देश के लिए पहली बार एक समान राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा ऑपरेशनल (NAS) गाइडलाइन जारी की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा 16वीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की बैठक में घोषित की गई इस नीति का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना, हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी आपातकालीन स्थितियों में मरीजों की जान बचाना और स्वास्थ्य प्रणाली की जवाबदेही तय करना है।

चिकित्सा विज्ञान में ‘गोल्डन ऑवर’ (आपातकाल के बाद का पहला एक घंटा) को जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे अहम कड़ी माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पूरे देश के एम्बुलेंस इकोसिस्टम को रीस्ट्रक्चर करने का फैसला किया है।

20 मिनट का रिस्पॉन्स टाइम और कॉल सेंटर के लिए कड़े नियम

इस नई एनएएस (NAS) गाइडलाइन का सबसे क्रांतिकारी पहलू इसका ‘प्रतिक्रिया समय’ (Response Time) है। अब इमरजेंसी कॉल आने के बाद पूरे सिस्टम को बेहद तेज गति से काम करना होगा:

  • 3 मिनट में रवानगी: कॉल सेंटर पर जैसे ही कोई आपातकालीन फोन आता है, उन्हें 3 मिनट के भीतर एम्बुलेंस को घटनास्थल के लिए रवाना करना होगा।

  • 20 मिनट में आगमन: एम्बुलेंस को औसतन 20 मिनट के भीतर मरीज या दुर्घटनास्थल तक पहुंचना अनिवार्य होगा।

  • कॉल अटेंड करने की अनिवार्यता: कॉल सेंटरों को अपने पास आने वाले 95 प्रतिशत फोन कॉल्स को महज 20 सेकंड के भीतर उठाना होगा।

  • 100% बैक-कॉल नियम: यदि कोई कॉल व्यस्तता या किसी तकनीकी कारण से ड्रॉप या मिस हो जाती है, तो कॉल सेंटर के लिए 100% मिस्ड कॉल्स पर खुद वापस फोन (कॉल बैक) करना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।

एम्बुलेंस में होंगे डॉक्टर और प्रशिक्षित ईएमटी (EMT)

अब एम्बुलेंस केवल मरीज को अस्पताल ले जाने वाली गाड़ी नहीं होगी, बल्कि वह ‘पहिया पर अस्पताल’ (Hospital on Wheels) की तरह काम करेगी। रास्ते में ही मरीज को बेहतर प्राथमिक चिकित्सा देने के लिए निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:

  • प्रशिक्षित स्टाफ: हर एम्बुलेंस में अनिवार्य रूप से एक प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) और एक कुशल चालक (Driver) की मौजूदगी रहेगी।

  • ऑन-कॉल डॉक्टर की सलाह: कॉल सेंटर में चौबीसों घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी। जब एम्बुलेंस मरीज को लेकर अस्पताल आ रही होगी, तब गंभीर परिस्थितियों में ये डॉक्टर फोन या वायरलेस के जरिए सीधे एम्बुलेंस के ईएमटी (EMT) को मरीज की स्थिति के अनुसार दवा या इलाज संबंधी लाइव सलाह देंगे।

मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली निजी एम्बुलेंस पर लगेगा प्रतिबंध

इस गाइडलाइन के तहत निजी और सरकारी दोनों ही तरह की एम्बुलेंस सेवाओं को कड़े नियमों के दायरे में लाया गया है। यदि कोई एम्बुलेंस सेवा या एजेंसी तय किए गए राष्ट्रीय मानकों पर खरी नहीं उतरती है, तो उसे सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

  • जिला स्तरीय जांच समिति: किसी भी निजी एजेंसी की एम्बुलेंस को राष्ट्रीय सेवा नेटवर्क में शामिल करने या उसे संचालित करने से पूर्व जिला स्तर पर गठित एक विशेष समिति वाहन और उपकरणों की बारीकी से जांच करेगी। सभी शर्तों और सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही एम्बुलेंस को फिटनेस और संचालन की मंजूरी मिलेगी।

  • जुर्माने का प्रावधान: यदि कोई एम्बुलेंस संचालक या कॉल सेंटर तय समय सीमा (Response Time) या स्वास्थ्य मानकों का पालन करने में विफल रहता है, तो उन पर भारी जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।