न्यूयॉर्क । रविवार, 6 सितंबर 2026
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने वैश्विक मानचित्रों में महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को सही अनुपात में दर्शाने वाले ऐतिहासिक ‘करेक्ट द मैप’ (Correct the Map) प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित कर दिया है। टोगो द्वारा पेश और अफ्रीकी संघ (African Union) के समर्थन वाले इस प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने मतदान किया।
इस प्रस्ताव के खिलाफ एकमात्र वोट संयुक्त राज्य अमेरिका का रहा, जबकि एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
क्या है 16वीं सदी का ‘मर्केटर प्रक्षेपण’ और इसमें समस्या क्या है?
सदियों से दुनिया भर की कक्षाओं और किताबों में इस्तेमाल हो रहा नक्शा मर्केटर प्रक्षेपण (Mercator Projection) पर आधारित है, जिसे 1569 में गेरार्डस मर्केटर ने समुद्री नौवहन (Shipping Routes) की सुविधा के लिए बनाया था।
यह पद्धति भूमध्य रेखा (Equator) के पास स्थित देशों को छोटा और ध्रुवों (Poles) के करीब स्थित क्षेत्रों को बहुत बड़ा दिखाती है:
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ग्रीनलैंड बनाम अफ्रीका: अफ्रीका वास्तव में ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है, लेकिन मर्केटर नक्शे में दोनों लगभग बराबर या ग्रीनलैंड बड़ा दिखाई देता है।
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उत्तरी गोलार्ध का अतिरंजित आकार: यूरोप, उत्तरी अमेरिका और रूस अपने वास्तविक आकार से काफी विशाल नजर आते हैं, जबकि भारत, दक्षिण एशिया और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप को सिकोड़ कर दिखाया जाता है।
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सांस्कृतिक व सामाजिक धारणा: प्रस्ताव में कहा गया है कि यह भौगोलिक विकृति वैश्विक स्तर पर एक असंतुलित दृष्टिकोण बनाती है।
वोटिंग का गणित और वैश्विक रुख
| श्रेणी | देशों की संख्या | विवरण |
| पक्ष में (In Favor) | 164 | भारत, टोगो, अफ्रीकी संघ के देश और अधिकांश विकासशील राष्ट्र |
| विरोध में (Against) | 1 | संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) |
| तटस्थ (Abstained) | 6 | एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया, यूक्रेन |
भारत का रुख और नक्शे बदलने का प्रभाव
यह प्रस्ताव किसी देश का वास्तविक भूमि क्षेत्रफल नहीं बढ़ाता, बल्कि यह नक्शों के विजुअल रिप्रेजेंटेशन (दृश्य अनुपात) को सुधारता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन के प्रथम सचिव रघू पुरी ने कहा:
“मानचित्र यह तय करते हैं कि समाज भूगोल और दुनिया के पैमाने को कैसे समझता है। भारत इस प्रस्ताव के पीछे के उद्देश्य का स्वागत करता है, हालांकि इसे किसी एक विशिष्ट कार्टोग्राफिक पद्धति का समर्थन नहीं माना जाना चाहिए।”
इस प्रस्ताव के पास होने के बाद अब विभिन्न देश अपने स्कूलों, पाठ्यपुस्तकों, मीडिया कवरेज और डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे गूगल मैप्स या जीआईएस सिस्टम) पर समान-क्षेत्रफल वाले नक्शों (Equal-Area Maps) को प्राथमिकता दे सकेंगे। विस्तृत विश्लेषण और अंतर्राष्ट्रीय मामलों की कवरेज के लिए मातृभूमि समाचार पर जाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव पारित होने से भारत का ज़मीनी क्षेत्रफल बढ़ जाएगा?
नहीं, इससे किसी देश का भौगोलिक या सीमावर्ती क्षेत्रफल नहीं बदलता। यह केवल नक्शे में महाद्वीपों को उनके सही दृश्य अनुपात (Visual Ratio) में दिखाता है।
2. क्या यह संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव सभी देशों के लिए बाध्यकारी (Binding) है?
यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यह सदस्य देशों, शैक्षणिक संस्थानों और मीडिया आउटलेट्स को सही नक्शों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
3. मर्केटर नक्शा क्यों गलत माना जाता है?
मर्केटर नक्शा 3D ग्लोब को 2D कागज पर फैलाते समय ध्रुवों के पास की जगहों (जैसे उत्तरी अमेरिका, यूरोप) को फैलाकर बड़ा कर देता है और भूमध्य रेखा के पास की जगहों (जैसे भारत, अफ्रीका) को छोटा कर देता है।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख संयुक्त राष्ट्र महासभा के घटनाक्रम और उपलब्ध भौगोलिक तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक जानकारी प्रदान करना है।
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