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नेपाल में 26 अगस्त की तबाही के बाद राहत अभियान तेज़: चिलिमे सुरंग में भारत-नेपाल का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन, 1,344 शव बरामद और 5,000 अब भी लापता

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चिलिमे जलविद्युत परियोजना सुरंग के बाहर भारत और नेपाल का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन
काठमांडू । रविवार, 6 सितंबर 2026
नेपाल में बीते 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने देश के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 5 सितंबर तक आपदा प्रभावित इलाकों से 1,344 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 5,000 लोग अभी भी लापता हैं।
सुरक्षा बलों और अंतरराष्ट्रीय राहत टीमों की पहली प्राथमिकता दुर्गम और सबसे अधिक प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना तथा ठप पड़ी संचार व सड़क व्यवस्था को बहाल करना है।

चिलिमे जलविद्युत परियोजना: सुरंग में जारी है जिंदगी की तलाश

आपदा का सबसे गंभीर असर रसुवा जिले में स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना पर पड़ा है। यहाँ जलविद्युत संयंत्र की सुरंग (Tunnel) में भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा जमा हो गया है, जिसके भीतर कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है।
इस सुरंग में भारतीय सुरंग बचाव दल (Indian Tunnel Rescue Team) और नेपाली सेना मिलकर संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

संयुक्त अभियान की प्रमुख बातें:

  • रास्ता निर्माण: सुरंग के प्रवेश द्वार तक भारी उपकरण और जेसीबी मशीनें पहुंचाने के लिए स्याफ्रूबेसी से प्रवेश मार्ग का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।
  • मलबे की सफाई: सुरंग के भीतर से पानी और कीचड़ निकालने के लिए विशेष पम्पिंग मशीनों और हैवी ड्रैगिंग उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
  • भौगोलिक चुनौतियां: रसुवा जिले का अति-दुर्गम पहाड़ी भूभाग और संकरी घाटियां भारी मशीनों को घटना स्थल तक पहुंचाने में बड़ी बाधा बन रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहायता और भारत की अहम भूमिका

नेपाल सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, हजारों लोगों को आपदाग्रस्त क्षेत्रों से सुरक्षित निकाल लिया गया है। हालांकि, जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों और मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
इस संकट की घड़ी में भारत सहित कई देशों की विशेषज्ञ टीमें नेपाली सेना और पुलिस बल के साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर रही हैं। भारत ने इस आपदा के तुरंत बाद:
  1. विशेष सुरंग बचाव दल (Tunnel Rescue Experts) भेजा।
  2. उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञ और आधुनिक खोज उपकरण उपलब्ध कराए।
  3. खाद्य सामग्री, दवाएं और अस्थायी आश्रय किट जैसी आपातकालीन राहत सामग्री की आपूर्ति की।
नेपाल प्रशासन का कहना है कि सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना और दूरदराज के कटे हुए इलाकों तक जल्द से जल्द राहत सामग्री पहुंचाना ही इस पूरे अभियान का मुख्य लक्ष्य है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ और भूस्खलन में अब तक कितना नुकसान हुआ है?
उत्तर: 5 सितंबर तक 1,344 लोगों के शव बरामद किए गए हैं और लगभग 5,000 लोग अभी भी लापता हैं।
Q2: चिलिमे जलविद्युत परियोजना में बचाव कार्य कौन चला रहा है?
उत्तर: रसुवा जिले के चिलिमे हाइड्रो-प्रोजेक्ट की सुरंग में भारतीय सुरंग बचाव दल और नेपाली सेना संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
Q3: बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती क्या आ रही है?
उत्तर: संकरी घाटियां, दुर्गम पहाड़ी रास्ता और सुरंग में जमा टनों कीचड़ व पानी भारी उपकरणों को वहां तक पहुंचाने में बड़ी बाधा बने हुए हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध आधिकारिक एवं प्राथमिक रिपोर्टों पर आधारित है। आपदा से जुड़े आंकड़े और स्थिति राहत कार्य की प्रगति के अनुसार परिवर्तनशील हैं।
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