मंगलवार, सितंबर 22 2026 | 04:29:01 AM

दिल्ली मतदाता सूची पुनरीक्षण: वीआईपी नेताओं को नोटिस क्यों मिले और क्या कटेगा आपका नाम? जानिए पूरी सच्चाई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
8 Min Read
नई दिल्ली । 
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया इस समय पूरे शहर में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व उपराष्ट्रपतियों, मुख्यमंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के नाम डेटा में विसंगतियों (Logical Discrepancies) या पुराने रिकॉर्ड से न मिलने (Unmapped) के कारण जांच के दायरे में आ गए हैं।
इस स्थिति ने आम नागरिकों और राजनीतिक गलियारों में भ्रम पैदा कर दिया है कि क्या इन दिग्गजों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, चुनाव आयोग का इस पर क्या रुख है और आने वाले दिनों में इस पर क्या कानूनी मोड़ आने वाला है।

33 लाख से अधिक मतदाता नोटिस के दायरे में

दिल्ली में प्रकाशित ताजा ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 97 लाख है। SIR प्रक्रिया के दौरान डेटा मिलान करते समय ऑटोमेटेड सिस्टम ने करीब 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां पाईं।
इन विसंगतियों का मुख्य कारण 2002 के पिछले SIR मतदाता रिकॉर्ड से डेटा का मैपिंग न हो पाना या व्यक्तिगत विवरण (जैसे नाम, उम्र, माता-पिता का नाम) में अंतर होना है। अब तक 31 लाख से अधिक मतदाताओं को औपचारिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

वीआईपी नेताओं और दिग्गजों को क्यों मिले नोटिस?

इस पुनरीक्षण प्रक्रिया की सबसे खास बात यह रही कि इसमें किसी विशेष वर्ग को छूट नहीं मिली है। सिस्टम द्वारा चिन्हित की गई विसंगतियों की चपेट में देश के कई प्रतिष्ठित नागरिक आए हैं:
  • लालकृष्ण आडवाणी व परिवार: पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका आडवाणी के नाम 2002 की SIR मतदाता सूची से मैपिंग न होने (‘Unmapped with last SIR’) की श्रेणी में फ्लैग हुए हैं।
  • एस. जयशंकर: विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको जयशंकर के नाम भी नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में ‘Unmapped’ श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं।
  • रेखा गुप्ता (मुख्यमंत्री, दिल्ली): इनके गणना प्रपत्र में उम्र से संबंधित डेटा में अंतर पाया गया था। हालाँकि, निर्वाचन अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद इनकी प्रविष्टि को मान्य कर दिया गया है।
  • डॉ. एस.एस. संधू (चुनाव आयुक्त): इनके नाम में वर्तनी का अंतर था—गणना प्रपत्र में ‘डॉ. एस.एस. संधू’ दर्ज था, जबकि मतदाता सूची में ‘सुखबीर सिंह संधू’ था। सत्यापन के बाद इसे भी ठीक कर मान्य कर दिया गया है।
  • अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया: पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘Unmapped’ श्रेणी में नोटिस जारी किया गया, जबकि मनीष सिसोदिया, उनकी पत्नी और बेटे के रिकॉर्ड में नाम व माता-पिता के नाम से जुड़ी विसंगतियां दर्ज की गईं।
  • अन्य प्रमुख नाम: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व सीजीआई डी.वाई. चंद्रचूड़, सांसद बांसुरी स्वराज, सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद और नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया जैसे नाम भी जांच के दायरे में शामिल हैं।
एक अनूठा मामला: अर्थशास्त्री और पद्म पुरस्कार से सम्मानित दिवंगत बिबेक देबरॉय (जिनका 2024 में निधन हो चुका है) का नाम भी मतदाता रिकॉर्ड में सामने आया है, जो पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण व सत्यापन प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े करता है।

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: नोटिस का मतलब नाम काटना नहीं

नेताओं और वीआईपी हस्तियों को नोटिस मिलने के बाद मचे बवाल पर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने स्थिति स्पष्ट की है।
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार:
  1. सत्यापन प्रक्रिया: नोटिस जारी करने का प्राथमिक उद्देश्य केवल मतदाता रिकॉर्ड में मौजूद तकनीकी गलतियों, स्पेलिंग की त्रुटियों और मैपिंग संबंधी समस्याओं को सुधारना है।
  2. स्वतः निरस्तीकरण नहीं: नोटिस मिलने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है।
  3. दस्तावेज़ जमा करना: संबंधित मतदाता द्वारा सही दस्तावेज़ प्रस्तुत करने और सत्यापन सफल होने पर नाम अंतिम सूची में बरकरार रखा जाएगा।

22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

इस प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच एक बड़ा कानूनी मोड़ा भी आया है। नोटिस पाने वाले लाखों मतदाताओं के नाम और नोटिस दिए जाने के तकनीकी कारणों (जैसे ‘Logical Discrepancy’ और ‘Unmapped’) को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
याचिका में 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस दिए जाने और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की मांग की गई है। 22 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

अंतिम मतदाता सूची कब जारी होगी?

दिल्ली SIR की तय समय-सीमा के अनुसार:
  • सत्यापन की अंतिम तिथि: चुनाव आयोग फिलहाल नोटिस के जवाब और प्राप्त दस्तावेजों की जांच कर रहा है।
  • अंतिम प्रकाशन (Final Publication): सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: यदि मुझे दिल्ली SIR के तहत नोटिस मिला है तो क्या मेरा वोट कट गया है?
उत्तर: नहीं, नोटिस मिलने का मतलब वोट कटना नहीं है। यह केवल आपके विवरण (जैसे उम्र, नाम, या पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग) को सत्यापित करने के लिए है। आवश्यक दस्तावेज जमा करने पर आपका नाम सूची में बना रहेगा।
प्रश्न 2: दिल्ली SIR 2026 की अंतिम मतदाता सूची कब आएगी?
उत्तर: दिल्ली मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 4 नवंबर 2026 को होगा।
प्रश्न 3: सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर 2026 को किस विषय पर सुनवाई है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट में नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और उन्हें जारी किए गए नोटिस के कारणों को सार्वजनिक व पारदर्शी बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख दिल्ली में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वर्तमान रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों पर आधारित एक सूचनात्मक प्रस्तुति है। मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति जांचने या सुधार के लिए कृपया भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की आधिकारिक वेबसाइट (voters.eci.gov.in) पर जाएं।
संबंधित संदर्भ व खबरें:
  • राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय चुनाव संबंधी अधिक समाचारों के लिए पढ़ें: Matribhumi Samachar

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।