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बंगाली और हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री मिथु मुखर्जी का 71 वर्ष की आयु में निधन: जानिए उनका करियर और प्रमुख फिल्में

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read
कोलकाता । 
भारतीय सिनेमा जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। 1970 और 1980 के दशक में अपनी मनमोहक अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली बंगाली और हिंदी फिल्मों की वरिष्ठ अभिनेत्री मिथु मुखर्जी का निधन हो गया है। वह 71 वर्ष की थीं और पिछले करीब एक साल से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में रविवार रात अंतिम सांस ली।

किशोरावस्था में रखा था अभिनय की दुनिया में कदम

1955 में कोलकाता में जन्मीं मिथु मुखर्जी ने काफी कम उम्र (किशोरावस्था) में ही बड़े पर्दे पर दस्तक दी थी। उन्होंने 1971 में चित्त बोस की बंगाली फिल्म ‘शेष पर्व’ (Shesh Parba) से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की।
इसके बाद वर्ष 1973 में आई फिल्म ‘मर्जीना अब्दुल्ला’ में उनके अभिनय को जबरदस्त सराहना मिली और यह फिल्म उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। अपनी सहज अदाकारी और चुलबुले अंदाज के कारण वह जल्द ही बंगाली सिनेमा की अग्रणी अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।

दिग्गज अभिनेताओं के साथ की यादगार फिल्में

1970 और 1980 के दशक में मिथु मुखर्जी ने बंगाली सिनेमा के स्वर्णिम दौर के दिग्गज कलाकारों जैसे उत्तम कुमार, सौमित्र चटर्जी और रंजीत मल्लिक के साथ काम किया।

उनकी प्रमुख बंगाली फिल्में:

  • शेष पर्व (1971)
  • मर्जीना अब्दुल्ला (1973)
  • निशि कन्या
  • मौचक (1975)
  • स्वयंसिद्धा (1975)
  • होटल स्नो फॉक्स
  • भाग्यचक्र
  • संधि
  • फादर
  • आश्रिता (1990)

 

हिंदी सिनेमा में भी छोड़ी अपनी छाप

बंगाली फिल्मों के अलावा मिथु मुखर्जी ने बॉलीवुड में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 1976 में दुलाल गुहा द्वारा निर्देशित फिल्म ‘खान दोस्त’ के जरिए हिंदी सिनेमा में पदार्पण किया, जिसमें वह शत्रुघ्न सिन्हा और राज कपूर जैसे बड़े सितारों के साथ नजर आईं।
इसके बाद उन्होंने कई चर्चित हिंदी फिल्मों में काम किया:
  1. सफेद झूठ (1977) – बासु चटर्जी द्वारा निर्देशित
  2. दिल्लगी (1978)
  3. दो लड़के दोनों कड़के (1979)

फिल्मी दुनिया से दूरी और निजी जीवन

1980 के दशक के उत्तरार्ध में मिथु मुखर्जी ने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। 1990 में आई फिल्म ‘आश्रिता’ उनकी आखिरी बंगाली फिल्म थी। इसके बाद उन्होंने अभिनय और सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह संन्यास ले लिया।
वह कोलकाता छोड़कर मुंबई में बस गईं और अपने जीवन के अंतिम वर्षों में काफी शांत और एकांत जीवन व्यतीत कर रही थीं।

फिल्म जगत में शोक की लहर

मिथु मुखर्जी के निधन की खबर से बंगाली और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) और प्रसेनजीत चटर्जी सहित कई जाने-माने कलाकारों व संगठनों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी और भारतीय सिनेमा में उनके बहुमूल्य योगदान को याद किया।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1. मिथु मुखर्जी कौन थीं?
उत्तर: मिथु मुखर्जी 1970 और 1980 के दशक की प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री थीं, जिन्होंने बंगाली और हिंदी सिनेमा की कई हिट फिल्मों में अभिनय किया।
Q2. मिथु मुखर्जी का निधन कब और कैसे हुआ?
उत्तर: मिथु मुखर्जी का निधन 20 सितंबर 2026 (रविवार रात) को मुंबई के एक अस्पताल में 71 वर्ष की आयु में हुआ। वह बीते एक वर्ष से कैंसर का इलाज करा रही थीं।
Q3. मिथु मुखर्जी की पहली फिल्म कौन सी थी?
उत्तर: उनकी पहली बंगाली फिल्म 1971 में आई ‘शेष पर्व’ थी। हिंदी cinema में उन्होंने 1976 की फिल्म ‘खान दोस्त’ से डेब्यू किया था।
Q4. मिथु मुखर्जी की प्रमुख हिंदी फिल्में कौन-सी हैं?
उत्तर: उनकी प्रमुख हिंदी फिल्मों में खान दोस्त, सफेद झूठ, दिल्लगी और दो लड़के दोनों कड़के शामिल हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स और मीडिया स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचना एवं श्रद्धांजलि प्रदान करना है।

  • समाचार और मनोरंजन जगत की नवीनतम जानकारी के लिए देखें: Matribhumi Samachar

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।