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NSE Listing Day 2: दूसरे ही दिन दबाव में क्यों आए NSE के शेयर? जानें 5 प्रमुख कारण और ब्रोकरेज की राय

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

मुंबई |

भारत के सबसे बड़े शेयर बाजार संचालक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयरों की बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टिंग के दूसरे दिन निवेशकों को बिकवाली का सामना करना पड़ा। 24 सितंबर 2026 को बाजार में लिस्ट होने के बाद 25 सितंबर को NSE के शेयरों में मुनाफावसूली और बाजार संबंधी अन्य चिंताओं के कारण गिरावट दर्ज की गई।

₹22,569 करोड़ के इस विशाल सार्वजनिक निर्गम (IPO) को निवेशकों द्वारा 5.71 गुना सब्सक्राइब किया गया था। हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत में आई इस गिरावट ने निवेशकों का ध्यान कंपनी के मूल्यांकन, भविष्य की आय और नियामकीय जोखिमों की ओर खींच लिया है।

NSE शेयर का लिस्टिंग से दूसरे दिन तक का प्रदर्शन

विवरणशेयर मूल्य (₹)
IPO इश्यू प्राइस₹1,785
24 सितंबर (लिस्टिंग कीमत)₹1,800 (+0.84%)
पहले दिन का उच्च स्तर₹1,878
पहले दिन का बंद भाव₹1,818
25 सितंबर का इंट्राडे निम्न स्तर₹1,790.10

लिस्टिंग के पहले दिन NSE का शेयर ₹1,800 पर खुला और दिन के दौरान ₹1,878 तक पहुंच गया था। हालांकि, दूसरे दिन आई गिरावट ने पहले दिन की बढ़त के एक बड़े हिस्से को कम कर दिया।

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NSE के शेयर में गिरावट के 5 प्रमुख कारण

  1. लिस्टिंग के बाद मुनाफावसूली (Profit Booking): पहले दिन ₹1,878 के उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद अल्पकालिक निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली की।
  2. ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंताएं: NSE का मार्केट कैप लिस्टिंग के दौरान लगभग ₹4.5 लाख करोड़ तक पहुंच गया था। इतने बड़े मूल्यांकन पर निवेशक कंपनी की मौजूदा कमाई और भविष्य की वृद्धि क्षमता का कड़ाई से आकलन कर रहे हैं।
  3. डेरिवेटिव कारोबार में नियामकीय बदलाव: FY26 में NSE की परिचालन आय में ट्रांजैक्शन चार्ज का योगदान लगभग 79% था। डेरिवेटिव सेगमेंट में नियामकीय बदलावों और फीस स्ट्रक्चर में संशोधन के कारण निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
  4. BSE से कड़ी प्रतिस्पर्धा: हालांकि कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी लगभग 93% और ऑप्शंस में 75% है, लेकिन BSE डेरिवेटिव सेगमेंट में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहा है।
  5. ग्रे मार्केट प्रीमियम में गिरावट: IPO से ठीक पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹192 से घटकर ₹58 के करीब आ गया था, जिससे लिस्टिंग से पहले ही बंपर लिस्टिंग गेन की उम्मीदें घट गई थीं।

 

क्या NSE की लिस्टिंग कमजोर मानी जाएगी?

NSE की लिस्टिंग को पूरी तरह से कमजोर कहना सही नहीं होगा। इश्यू प्राइस ₹1,785 की तुलना में शेयर अभी भी ऊपर कारोबार कर रहा है। IPO की मजबूत मांग का मतलब यह नहीं होता कि लिस्टिंग के बाद शेयर हमेशा ऊपर ही जाएगा; लिस्टिंग के बाद शेयर का भाव मांग, आपूर्ति और कंपनी के बुनियादी आंकड़ों पर निर्भर करता है।

ब्रोकरेज फर्म्स की राय और टारगेट प्राइस

प्रमुख ब्रोकरेज हाउसों ने NSE के दीर्घकालिक भविष्य पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है:

  • Emkay: ₹2,050
  • Macquarie: ₹1,965
  • PL Capital: ₹1,950

ब्रोकरेज का मानना है कि भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार और NSE की मजबूत बाजार स्थिति के कारण लंबी अवधि में यह शेयर अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: NSE का IPO इश्यू प्राइस क्या था?

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Ans: NSE के IPO का इश्यू प्राइस ₹1,785 प्रति शेयर था।

Q2: NSE के शेयर में दूसरे दिन गिरावट क्यों आई?

Ans: मुख्य रूप से मुनाफावसूली (Profit Booking), ऊंचे मूल्यांकन (High Valuation), और डेरिवेटिव्स बाजार में नियामकीय बदलावों की चिंताओं के कारण गिरावट आई।

Q3: क्या NSE की बाजार में हिस्सेदारी कम हो रही है?

Ans: मार्च 2026 तक NSE की कैश इक्विटी में लगभग 93% और ऑप्शंस मार्केट में करीब 75% हिस्सेदारी थी। हालांकि, BSE से इसे प्रतिस्पर्धा मिल रही है।

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Advisor) से परामर्श अवश्य लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।