नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में 22 आरोपियों को बरी किए जाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। इन आरोपियों में 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पीठ ने मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के 92 गवाहों के अपने बयानों से मुकरने (turning hostile) की घटना को बेहद गंभीर माना और निष्पक्ष सुनवाई से जुड़े कानूनी पहलुओं की गहन जांच की आवश्यकता पर बल दिया।
सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण अवलोकन
- महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों की जांच: शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह मामले के सभी वृहद दस्तावेजों को तलब करने के बजाय 3 से 4 ऐसे महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों की समीक्षा करेगी, जो बरी किए जाने के फैसले के कानूनी पहलुओं को समझने के लिए अहम हैं।
- 92 गवाहों का मुकरना चिंता का विषय: न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि 210 में से 92 गवाहों का मुकरना एक गंभीर चिंता पैदा करता है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गवाहों का मुकरना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पूरा मुकदमा ही गैर-निष्पक्ष था; इसलिए अदालत साक्ष्यों का परीक्षण करेगी।
- अमित शाह से संबंधित फैसले पर रुख: सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस कार्यवाही के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पूर्व में आरोपमुक्त (Discharge) किए जाने के फैसले की समीक्षा नहीं की जाएगी। यह सुनवाई केवल 22 आरोपियों के बरी होने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका तक सीमित रहेगी।
- बरी करने का फैसला फिलहाल कायम: सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी करने का अर्थ केवल विपक्षी पक्षों से जवाब तलब करना है। शीर्ष अदालत ने फिलहाल बरी किए जाने के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है और न ही इसे रद्द किया है।
मामले का घटनाक्रम (Timeline)
| समय/दिनांक | महत्वपूर्ण घटनाक्रम |
| नवंबर 2005 | गुजरात के अहमदाबाद के पास सोहराबुद्दीन शेख की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत। |
| नवंबर 2005 (अंत) | सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की हत्या का आरोप। |
| दिसंबर 2006 | मामले के प्रमुख गवाह और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की एक अन्य मुठभेड़ में मौत। |
| दिसंबर 2018 | मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी 22 आरोपियों को बरी किया। |
| मई 2026 | बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 आरोपियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा। |
| सितंबर 2026 | सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। |
संबंधित मीडिया व लिंक संदर्भ
इस विषय और देश-विदेश से जुड़ी राष्ट्रीय, राजनीतिक व कानूनी समीक्षाओं की विस्तृत रिपोर्ट पढ़ने के लिए Matribhumi Samachar English पर विजिट करें।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1: सुप्रीम कोर्ट के नोटिस जारी करने का क्या मतलब है?
उत्तर: नोटिस जारी होने का मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है और विपक्षी पक्षों से उनका जवाब मांगा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि निचली अदालत का फैसला रद्द हो गया है।
Q2: सोहराबुद्दीन मामले में कितने आरोपी बरी हुए हैं?
उत्तर: मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत और बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 22 आरोपियों को बरी किया जा चुका है, जिनमें 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
Q3: क्या इस सुनवाई में अमित शाह के खिलाफ लगे आरोपों की दोबारा जांच होगी?
उत्तर: नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अमित शाह को आरोपमुक्त (discharge) किए जाने वाले आदेश पर दोबारा विचार नहीं किया जाएगा।
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध कानूनी व अदालती कार्यवाहियों के समाचारों और सार्वजनिक दस्तावेजों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों को कानूनी घटनाक्रम की निष्पक्ष व तथ्यपरक जानकारी देना है। किसी भी न्यायिक निर्णय या कानूनी स्थिति के लिए आधिकारिक अदालती आदेशों का अवलोकन करें।

