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शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा, निफ्टी का 22,800 का अहम सपोर्ट स्तर ध्वस्त; जानें वजह और निवेशकों की रणनीति

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read

मुंबई ।

भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का पहला कारोबारी दिन यानी सोमवार (28 सितंबर 2026) बेहद निराशाजनक साबित हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की चौतरफा बिकवाली के चलते बाजार में व्यापक बिकवाली का माहौल रहा।

कारोबार के अंत में BSE Sensex 1,124.02 अंक (1.52%) की बड़ी गिरावट के साथ 72,771.72 पर बंद हुआ। वहीं, NSE Nifty 50 360.25 अंक (1.56%) फिसलकर 22,780.25 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी ने अपने 22,800 के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ दिया और 22,762.20 का इंट्राडे निचला स्तर छुआ।

शेयर बाजार में तेज गिरावट के 5 प्रमुख कारण

  1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें चढ़ीं: अमेरिका-ईरान और मध्य पूर्व (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की अनिश्चितता बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए महंगे तेल से देश का आयात बिल, चालू खाते का घाटा (CAD) और महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है।
  2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में आई तेजी के कारण वैश्विक निवेशक जोखिम भरे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
  3. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भारतीय बाजार की धारणा (market sentiment) को गहरा झटका दिया है। बड़े शेयरों में भारी बिकवाली से सूचकांकों पर सीधा दबाव बना।
  4. भू–राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical Tensions): पश्चिम एशिया में तनाव के चलते दुनिया भर के बाजारों में सतर्कता का माहौल है, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी स्पष्ट दिखाई दिया।
  5. बैंकिंग और स्मॉलकैप/मिडकैप में कमजोरी: बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्रों (Financial Services) के हैवीवेट शेयरों में बिकवाली ने बाजार को नीचे खींचने का काम किया। इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी काफी सुस्ती और बिकवाली दर्ज की गई।

Nifty 50 का तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण स्तर

निफ्टी 50 के लिए 22,800 का स्तर एक बेहद मजबूत तकनीकी और मनोवैज्ञानिक सपोर्ट माना जा रहा था। इस स्तर के नीचे बंद होना बाजार के लिए अल्पकालिक मंदी (Short-term Bearish Pattern) के संकेत देता है।

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  • 22,800 (तत्काल रेजिस्टेंस): यदि निफ्टी अगले कारोबारी सत्रों में 22,800 के ऊपर वापस टिकता है, तभी रिकवरी या पुलबैक (Pullback) की उम्मीद की जा सकती है।
  • 22,500 – 22,600 (अगला मुख्य सपोर्ट): 22,800 के नीचे लगातार बने रहने पर बाजार इस अगले सपोर्ट ज़ोन का परीक्षण कर सकता है।
  • 23,000 (साइकोलॉजिकल रेजिस्टेंस): लंबी अवधि के रुझान में सुधार के लिए निफ्टी को इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकना होगा।

मौजूदा माहौल में निवेशकों के लिए रणनीति

  • पैनिक सेलिंग (Panic Selling) से बचें: बाजार की अस्थिरता (volatility) को देखते हुए जल्दबाजी में कोई भी भावुक फैसला न लें।
  • फंडामेंटल पर ध्यान दें: किसी भी नए निवेश से पहले कंपनियों की बैलेंस शीट, वैल्यूएशन और वित्तीय प्रदर्शन की जांच करें।
  • SIP और DCA जारी रखें: म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) चालू रखें। बाजार में गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों को डिस्काउंटेड रेट पर एसेट एक्युमुलेट करने का मौका देती है।
  • डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स (F&O) के लिए चेतावनी: वायदा एवं विकल्प कारोबार में ट्रेड करने वाले व्यापारी सख्त स्टॉप-लॉस (Stop-Loss) और रिस्क मैनेजमेंट को प्राथमिकता दें।
  • ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स पर नजर रखें: कच्चे तेल के भाव, FII फ्लो और विदेशी मुद्रा भंडार के रुझानों पर लगातार नजर बनाए रखें।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: 28 सितंबर 2026 को शेयर बाजार क्यों गिरा?

Ans: कच्चे तेल में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, FII की लगातार बिकवाली, अमेरिका-ईरान तनाव और बैंकिंग शेयरों में आई कमजोरी इस गिरावट के मुख्य कारण थे।

Q2: निफ्टी 50 के लिए अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल कौन सा है?

Ans: 22,800 का सपोर्ट स्तर टूटने के बाद अब निफ्टी के लिए अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन 22,500 से 22,600 के आसपास माना जा रहा है।

Q3: क्या इस गिरावट में शेयर खरीदने चाहिए?

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Ans: लंबी अवधि के निवेशक चरणबद्ध तरीके से (SIP या DCA के जरिए) मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, एकमुश्त (lump sum) निवेश करने से पहले बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना उचित होगा।

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Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों (Educational Purposes) के लिए लिखा गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार का शेयर क्रय–विक्रय या निवेश निर्णय लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।